Aave एक बड़ा गवर्नेंस वोट करने की तैयारी कर रहा है, जिसमें प्लेटफॉर्म ऑफ-प्रोटोकॉल रेवेन्यू के हिस्से को AAVE टोकन धारकों के साथ शेयर करने और कम्युनिटी को औपचारिक प्रस्ताव भेजने पर विचार करेगा।
यह अपडेट 2 जनवरी 2025 को पोस्ट की गई थी, जिसने तुरंत मार्केट सेंटीमेंट को पॉजिटिव बना दिया। AAVE उस दिन 10% से ज्यादा बढ़ गया क्योंकि ट्रेडर्स को डेवेलपमेंट टीम और DAO के बीच बेहतर तालमेल के संकेत मिले।
New Aave Proposal में क्या-क्या शामिल होगा
Aave Labs के फाउंडर के अनुसार, आने वाला प्रस्ताव बताएगा कि कोर लेंडिंग प्रोटोकॉल के बाहर बनने वाले रेवेन्यू को AAVE होल्डर्स के साथ कैसे शेयर किया जा सकता है।
यह रेवेन्यू आमतौर पर ऑफिशियल Aave ऐप, फ्रंट-एंड स्वैप इंटीग्रेशन, और भविष्य में Aave पर बनने वाले कंज्यूमर या इंस्टीटूशनल प्रोडक्ट्स से आता है।
इसमें Aave DAO की सुरक्षा और होल्डर्स को नुकसान पहुंचाने वाले अचानक बदलावों को रोकने के लिए सेफगार्ड्स भी शामिल होंगे।
एक और अहम फोकस होगा Aave ब्रांड और यूज़र गेटवे का कंट्रोल। इसमें वेब्साइट्स, डोमेन्स और सोशल मीडिया अकाउंट्स शामिल हैं जो पब्लिक में Aave का चेहरा दिखाते हैं।
इस प्रस्ताव में यह साफ किया जाएगा कि ये एसेट्स किसके पास हैं, इनका इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है, और DAO की अप्रूवल के बिना इन्हें मोनेटाइज़ करने की लिमिट क्या है।
साथ ही, यह प्रस्ताव Aave की लॉन्ग-टर्म दिशा को निर्धारित करेगा। Aave Labs का कहना है कि प्रोटोकॉल को सिर्फ क्रिप्टो लेंडिंग तक सीमित नहीं रहना चाहिए और उसे real world asset, कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और इंस्टीटूशनल यूज़ केस की ओर बढ़ना चाहिए।
ये सभी एफर्ट्स भविष्य में Aave V4 और GHO (Aave का स्टेबलकॉइन) के एक्सपैंडेड यूज़ पर डिपेंड करेंगे।
DAO के लिए इसका क्या मतलब है
यह कदम Aave इकोसिस्टम के अंदर कई हफ्तों की पब्लिक असहमति के बाद उठाया गया है।
हाल ही में, कुछ डेलीगेट्स ने Aave Labs पर रेवेन्यू सोर्स और कम्युनिकेशन चैनलों पर बहुत अधिक कंट्रोल रखने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि गवर्नेंस और ओनरशिप को लेकर अनिश्चितता ने हाल के हफ्तों में AAVE की मार्केट वैल्यू में तेज गिरावट में योगदान दिया है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, DAO प्रतिनिधियों ने इस बदले हुए नजरिए का स्वागत किया लेकिन यह भी कहा कि स्पष्ट और लागू करने योग्य कमिटमेंट्स जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि केवल अस्पष्ट वादे काफी नहीं हैं, और ओनरशिप, रेवेन्यू शेयरिंग और जवाबदेही पर स्पष्ट नियम बनने चाहिए।
आने वाला DAO वोट तय करेगा कि क्या यह नया फ्रेमवर्क आगे बढ़ेगा या नहीं।
अगर इसे अप्रूव मिल जाता है, तो यह आंतरिक तनाव कम करने और Aave की ग्रोथ व गवर्नेंस में बैलेंस बनाने में मदद कर सकता है। अगर अप्रूवल नहीं मिला, तो कंट्रोल और अलाइनमेंट को लेकर बहस जारी रहने की संभावना है।