अब संस्थागत निवेशकों के पास क्रिप्टो ट्रेड करने का नया तरीका है, जिसमें उन्हें अपनी एसेट्स सीधे किसी exchange में जमा करने की जरूरत नहीं है। यह उपलब्धि Binance और Franklin Templeton द्वारा टोकनाइज्ड मनी मार्केट फंड्स (MMFs) के इर्द-गिर्द बनाया गया एक ऑफ-एक्सचेंज कोलेटरल प्रोग्राम लॉन्च करने के बाद मिली है।
यह पहल real world asset (RWA) टोकनाइजेशन और बड़ी फाइनेंशियल कंपनियों की जरूरतों के हिसाब से बनाए गए इन्फ्रास्ट्रक्चर की तरफ पूरे इकोसिस्टम में हो रहे बदलाव को दिखाती है, लेकिन इसमें कुछ खतरे भी बने हुए हैं।
Binance और Franklin Templeton ने संस्थाओं के लिए ऑफ-एक्सचेंज क्रिप्टो कोलेट्रल शुरू किया
Binance के co-CEO Richard Teng ने इस लॉन्च की पुष्टि की है और बताया कि अब संस्थागत क्लाइंट Franklin Templeton के Benji Technology Platform के जरिए जारी किए गए टोकनाइज्ड MMF शेयर Binance पर ट्रेडिंग के लिए कोलेटरल के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।
“…इफिशिएंसी बढ़ाना और TradFi को क्रिप्टो के और करीब लाना,” कहा Teng ने।
इस प्रोग्राम के तहत, पात्र संस्थान Franklin Templeton के रेग्युलेटेड MMFs के टोकनाइज्ड शेयर को कोलेटरल के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं, जबकि ये एसेट्स थर्ड-पार्टी कस्टडी में रखी जाती हैं।
फंड्स को exchange में ट्रांसफर करने के बजाय, कोलेटरल की वैल्यू Binance के ट्रेडिंग एनवायरनमेंट में custody पार्टनर Ceffu द्वारा मुहैया कराए गए इन्फ्रास्ट्रक्चर से मिरर की जाती है।
यह स्ट्रक्चर संस्थागत ट्रेडर्स के लंबे समय से बने हुए काउंटरपार्टी रिस्क की चिंता को दूर करता है। जैसे Bitcoin ETFs ने क्रिप्टो एक्सपोजर को लेकर संस्थागत फंड्स की चिंता को कम किया।
एसेट्स को ऑफ-एक्सचेंज रखते हुए, कंपनियां exchange failures के रिस्क को घटा सकती हैं और साथ ही लिक्विडिटी और ट्रेडिंग के मौके भी पा सकती हैं।
इस डिजाइन से कैपिटल एफिशिएंसी भी बेहतर होती है। पारंपरिक रूप से एक्सचेंज में पोस्ट किए गए कोलेटरल से कोई यील्ड नहीं मिलती, लेकिन MMFs से रिटर्न जनरेट होता है। ऐसे में, संस्थाएं अपने कैपिटल को काम में लगाकर ट्रेडिंग एक्टिविटी भी सपोर्ट कर सकती हैं।
“हमारा ऑफ-एक्सचेंज कोलेटरल प्रोग्राम यही है: क्लाइंट्स को थर्ड-पार्टी कस्टडी में रखे अपने एसेट्स को आसानी से काम में लगाने की सुविधा देना, साथ ही न्यू तरीके से सुरक्षित यील्ड कमाने में मदद करना,” बताया Franklin Templeton के Head of Digital Assets Roger Bayston ने।
वहीं, Binance की VIP और Institutional हेड Catherine Chen के मुताबिक, यह कदम पारंपरिक TradFi टूल्स को ब्लॉकचेन-बेस्ड मार्केट्स में इंटीग्रेट करने की बड़ी कोशिश का हिस्सा है।
Binance–Franklin Templeton पार्टनरशिप में नई उपलब्धि
इस लॉन्च का मतलब है कि सितंबर 2025 में घोषित रणनीतिक सहयोग से यह पहला लाइव प्रोडक्ट है। साथ ही, यह इस बात को उजागर करता है कि क्रिप्टो मार्केट्स में टोकनाइज़्ड RWA की भूमिका तेजी से बढ़ रही है, खासकर ट्रेजरी-बैक्ड फंड्स और मनी मार्केट प्रोडक्ट्स जैसे कम-वोलेटिलिटी इंस्ट्रूमेंट्स में।
इंडस्ट्री पार्टिसिपेंट्स के मुताबिक, ऐसे कोलेटरल की डिमांड बढ़ रही है जो 24/7 ट्रेडिंग साइकिल्स को सपोर्ट करता है और यील्ड देता है।
“अब इंस्टिट्यूशन्स ऐसी ट्रेडिंग मॉडल्स की जरूरत महसूस कर रहे हैं जो रिस्क मैनेजमेंट को प्रायोरिटी देती हो, लेकिन कैपिटल एफिशिएंसी से समझौता न करे,” Ceffu के CEO Ian Loh ने कहा।
साथ ही, Binance कम्युनिटी के प्रतिनिधियों ने बताया कि कस्टडी, यील्ड और ऑपरेशनल सेफगर्ड्स इंस्टिट्यूशनल इन्वेस्टर्स के लिए सबसे टॉप प्रायोरिटी हैं।
यह विशेष रूप से एक ऐसे मार्केट में मायने रखता है, जो अब भी exchange फेलियर्स और पिछले साइकिल्स के लिक्विडिटी शॉक्स की याद से प्रभावित है।
2026 में टाइमिंग क्यों है जरूरी
यह लॉन्च ऐसे समय में हुआ है जब क्रिप्टो मार्केट्स वोलैटिलिटी देख रहे हैं और इंस्टिट्यूशनल इन्वेस्टर्स का मूड ओर भी ज्यादा कॉशियस है।
Bitcoin और दूसरे बड़े एसेट्स डिलेवरेजिंग के फेज से गुज़रे हैं, और कुछ इंस्टिट्यूशनल फ्लो भी 2025 के हाई से स्लो हुए हैं। BeInCrypto ने हाल ही में रिपोर्ट किया कि Bitcoin ETF इन्वेस्टर्स को 8% लॉस हुआ है, क्योंकि $3 बिलियन दो हफ्ते में मार्केट से बाहर निकले हैं।
इस माहौल में, ऐसी इन्फ्रास्ट्रक्चर जो कस्टडी रिस्क को कम करते हुए यील्ड भी बनाए रखे, इनवेस्टमेंट को इन क्षेत्रों के लिए ज्यादा अट्रैक्टिव बना सकती है:
- हेज फंड्स
- एसेट मैनेजर्स
- कॉरपोरेट ट्रेजरीज़
हालांकि, यह सब इन खिलाड़ियों की डिजिटल एसेट्स में दिलचस्पी पर डिपेंड करता है, लेकिन वे ऑपरेश्नल रिस्क से सावधान भी रहते हैं।
कुल मिलाकर, यह इनिशिएटिव क्रिप्टो में टोकनाइजेशन की बढ़ती ट्रेंड के साथ मेल खाता है। एनालिस्ट्स का मानना है कि RWA आने वाले फेज में क्रिप्टो एडॉप्शन के लिए केंद्रीय भूमिका निभाएगा, स्टेबल कोलेटरल देगा और ट्रडिशनल फाइनेंस मार्केट्स को ब्लॉकचेन नेटवर्क्स से जोड़ेगा।
Centralization को लेकर चिंता और छिपे हुए Trade-Offs
भले ही उत्साह ज्यादा है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है क्योंकि नई स्ट्रक्चर रिस्क खत्म नहीं करती, सिर्फ उसे कहीं और ट्रांसफर कर देती है। एसेट्स ऑफ-एक्सचेंज तो रहते हैं, लेकिन ट्रेडिंग एग्जीक्यूशन, वैल्यूएशन मिररिंग और लिक्विडिटी बहुत हद तक Binance के इकोसिस्टम और ऑपरेशनल स्टेबिलिटी पर ही निर्भर करती हैं।
ऐसे हाइब्रिड मॉडल्स बड़े सेंट्रलाइज़्ड प्लेटफॉर्म्स की डॉमिनेंस को बढ़ावा दे सकते हैं, बजाय इसके कि वे क्रिप्टो मार्केट्स की शुरुआत में बने डिसेंट्रलाइजेशन के आदर्शों को आगे बढ़ाएं।
यहां ऑपरेशनल और रेग्युलेटरी मुद्दे भी सामने आते हैं:
- टोकनाइज़्ड एसेट्स ब्लॉकचेन से जुड़ी खास रिस्क लेकर आते हैं, और
- कस्टडी और टोकनाइजेशन को लेकर क्रॉस-बॉर्डर रूल्स लगातार बदल रहे हैं।
ऐसी स्थितियों में, इन प्रोग्राम्स में हिस्सा लेने वाले इंस्टीट्यूशंस को अलग-अलग देशों के हिसाब से कॉम्प्लायंस रिक्वायरमेंट्स की कंप्लेक्स वेब को पार करना पड़ता है।
इन चुनौतियों के बावजूद, Binance–Franklin Templeton की इनिशिएटिव क्रिप्टो के मौजूदा ग्रोथ फेज की एक अहम हकीकत को दिखाती है—इंस्टीट्यूशनल एडॉप्शन अब सिर्फ स्पेकुलेटिव उत्साह के बजाय इंफ्रास्ट्रक्चर से प्रेरित है।
कस्टडी, कैपिटल एफिशिएंसी और रिस्क मैनेजमेंट से जुड़े प्रोग्राम अब इंस्टीट्यूशनल इंगेजमेंट की नींव बनते जा रहे हैं। भले ही रिटेल ट्रेडर्स को इसका तात्कालिक इम्पैक्ट न दिखे, लॉन्ग-टर्म में ये टूल्स मार्केट स्ट्रक्चर को बदलने में अहम भूमिका निभाएंगे।
इस तरह, नया कोलेटरल प्रोग्राम अचानक से कोई बड़ा बदलाव नहीं लाता, बल्कि यह धीरे-धीरे हो रहे ट्रांसफॉर्मेशन का हिस्सा है, जो डिजिटल एसेट्स को TradFi के ऑपरेशनल स्टैंडर्ड्स के करीब लाता है, जबकि डिसेंट्रलाइजेशन और कंट्रोल पर डिबेट्स इंडस्ट्री के भविष्य को आकार देती रहेंगी।