Back

Cyber Capital के Founder का दावा, 7 से 11 साल में Bitcoin के गिरने का खतरा

author avatar

के द्वारा लिखा गया
Kamina Bashir

editor avatar

के द्वारा edit किया गया
Harsh Notariya

16 जनवरी 2026 13:28 UTC
  • Justin Bons का कहना है, Bitcoin अगले 7 से 11 साल में गिर सकता है, घटते सिक्योरिटी बजट और 51% अटैक के बढ़ते रिस्क की वजह से
  • Bons ने चेताया, बैंक रन जैसी स्थिति में जाम से ट्रांजेक्शन फंस सकते हैं
  • उनका मानना है कि Bitcoin एक असंभव चुनाव के सामने है - या तो सप्लाई बढ़ाए या जोखिम उठाए

Cyber Capital के फाउंडर और चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर Justin Bons ने प्रेडिक्ट किया है कि Bitcoin (BTC) अगले 7 से 11 वर्षों में क्रैश हो सकता है।

उन्होंने गिरते हुए सिक्योरिटी बजट, 51% अटैक के बढ़ते खतरे और नेटवर्क के लिए असंभव विकल्पों की तरफ इशारा किया। Bons का कहना है कि ये मौलिक कमजोरियां ट्रस्ट घटा सकती हैं और यहां तक कि चेन स्प्लिट की वजह बन सकती हैं।

Bitcoin की इकोनॉमिक सिक्योरिटी मॉडल पर सवाल

सालों से एक्सपर्ट्स ने Bitcoin से जुड़े कई रिस्क्स को लेकर अलार्म बजाया है, जिसमें सबसे अहम क्वांटम कंप्यूटिंग का खतरा है, जो मौजूदा क्रिप्टोग्राफिक स्टैंडर्ड्स को कमजोर कर सकता है।

हालांकि, Bons ने एक डीटेल्ड पोस्ट में Bitcoin को लेकर एक अलग टाइप की चिंता जताई। उन्होंने कहा कि Bitcoin का लॉन्ग-टर्म खतरा उसकी आर्थिक सुरक्षा (economic security model) मॉडल में छुपा है।

“BTC अगले 7 से 11 वर्षों में क्रैश हो जाएगा! सबसे पहले माइनिंग इंडस्ट्री गिर जाएगी, क्योंकि सिक्योरिटी बजट कम होता जाएगा। उसी समय अटैक्स शुरू होंगे; सेंसरशिप और डबल-स्पेंड्स,” उन्होंने लिखा।

उनकी दलील का मुख्य पॉइंट है Bitcoin का गिरता हुआ सिक्योरिटी बजट। हर halving के बाद, माइनर्स को मिलने वाला रिवॉर्ड आधा हो जाता है, जिससे नेटवर्क को सुरक्षित रखने की इनसेंटिव कम हो जाती है।

सबसे लेटेस्ट halving अप्रैल 2024 में हुई थी और हर चार साल में ऐसा होना तय है। Bons का मानना है कि मौजूदा सिक्योरिटी लेवल बनाए रखने के लिए Bitcoin को या तो लगातार exponential प्राइस ग्रोथ की जरूरत होगी या ट्रांजैक्शन फीस हमेशा हाई रखना होगा, जो रियलिस्टिक नहीं लगता।

Bitcoin's Declining Security Budget
Bitcoin का गिरता हुआ सिक्योरिटी बजट। स्रोत: X/Justin Bons

माइनर्स की कम होती कमाई और बढ़ता अटैक रिस्क

Bons के अनुसार, माइनर रेवेन्यू – न कि सिर्फ रॉ हैशरेट – नेटवर्क सिक्योरिटी का सबसे अहम पैरामीटर है। उन्होंने बताया जैसे ही हार्डवेयर एफिशिएंसी बढ़ती है, हैशरेट तो बढ़ सकता है लेकिन हैशेस प्रोड्यूस करने की कॉस्ट कम हो जाती है, जिससे ये सही तरीके से अटैक रेसिस्टेंस नहीं दिखाता।

उनके नजरिए में, गिरता हुआ माइनर रेवेन्यू सीधे-सीधे नेटवर्क पर अटैक की कॉस्ट को कम करता है। जब 51% अटैक करने की कॉस्ट डबल-स्पेंडिंग या नेटवर्क डिसरप्शन से होने वाले संभावित फायदे से नीचे आ जाएगी, तो ऐसे अटैक्स इकोनॉमिकली फायदेमंद हो सकते हैं।

“क्रिप्टो-इकोनॉमिक गेम थ्योरी सज़ा और इनाम, गाजर और डंडे के सिद्धांत पर काम करती है। यही वजह है कि माइनर की इनकम किसी भी अटैक की कॉस्ट तय करती है। इनाम के पॉइंट की बात करें तो: डबल-स्पेंडिंग और 51% अटैक, जो एक्सचेंजेस को टारगेट करते हैं, एकदम रियलिस्टिक अटैक वेक्टर है क्योंकि इसमें जबर्दस्त इनाम का मौका है,” पोस्ट में कहा गया।

फिलहाल, ट्रांजेक्शन फीस माइनर्स की इनकम का सिर्फ एक छोटा हिस्सा है। जैसे-जैसे आने वाले दशकों में ब्लॉक सब्सिडीज़ ज़ीरो के करीब पहुंचेंगी, Bitcoin को नेटवर्क को सिक्योर करने के लिए लगभग पूरी तरह से फीस पर निर्भर होना पड़ेगा। लेकिन, Bitcoin की लिमिटेड ब्लॉक स्पेस ट्रांजेक्शन थ्रुपुट पर कैप लगाती है, और इसी वजह से कुल फीस इनकम भी लिमिटेड रहती है।

Bons ने आगे कहा कि लगातार ज्यादा फीस रहना संभव नहीं है, क्योंकि ज़्यादातर यूज़र्स फीस बढ़ने के टाइम नेटवर्क छोड़ देते हैं। इससे फीस, लॉन्ग-टर्म में ब्लॉक सब्सिडीज़ की जगह भरोसेमंद तरीके से नहीं ले सकती।

Congestion, बैंक-रन डाइनैमिक्स और संभावित death spiral

सिक्योरिटी बजट से जुड़ी चिंता के अलावा, Bons ने “बैंक-रन” जैसी सिचुएशन का भी अलर्ट दिया। उनके मुताबिक,

“सबसे कंज़र्वेटिव अनुमान के हिसाब से भी, अगर हर मौजूदा BTC यूज़र सिर्फ एक ट्रांजेक्शन करता है, तो क्यू लगभग 1.82 महीने लंबी होगी!”

उन्होंने बताया कि अगर पैनिक जैसी सिचुएशन आ जाए, तो नेटवर्क शायद तेजी से विदड्रॉल्स प्रोसेस नहीं कर पाएगा। इससे यूज़र्स ट्रैफिक और बढ़ती फीस के कारण फंस सकते हैं, और ऐसे हालात बैंक-रन जैसे बन सकते हैं।

Bons ने ये भी बताया कि Bitcoin की दो हफ्ते में होने वाली डिफिकल्टी एडजस्टमेंट, रिस्क को और बढ़ा देती है। अगर प्राइस में अचानक गिरावट आती है, तो घाटे में चल रहे माइनर्स माइनिंग बंद कर सकते हैं, जिससे ब्लॉक प्रोडक्शन अगले एडजस्टमेंट तक धीमा पड़ जाएगा।

“पैनिक के चलते प्राइस और नीचे जाएगी, इससे और ज़्यादा माइनर्स बंद करेंगे, चेन और स्लो हो जाएगी, जिससे फिर से पैनिक बढ़ेगा, और प्राइस और गिर जाएगी, जिससे और माइनर्स बंद होंगे…ये सिलसिला चलता रहेगा…इसे गेम थ्योरी में vicious cycle, नेगेटिव फीडबैक लूप या death spiral कहा जाता है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसी भीड़भाड़ की रिस्क के चलते, जब सिचुएशन स्ट्रेस में हो तो खुद की कस्टडी रखना भी सेफ नहीं है, क्योंकि डिमांड स्पाइक होने पर यूज़र्स शायद नेटवर्क से जल्दी बाहर नहीं निकल पाएंगे।

Bitcoin के सामने टल नहीं सकने वाली दुविधा

Bons ने कहा कि Bitcoin के सामने एक फंडामेंटल दुविधा है। एक ऑप्शन है कि 21 मिलियन कॉइन लिमिट से ऊपर टोटल सप्लाई बढ़ा दी जाए, ताकि माइनर इंसेंटिव्स और नेटवर्क सिक्योरिटी बनी रहे। लेकिन इससे Bitcoin की कोर वैल्यू कम हो जाएगी और शायद चेन में स्प्लिट भी हो सकता है।

दूसरा ऑप्शन यह है कि सिक्योरिटी मॉडल की कमजोर होती हालत को स्वीकार कर लिया जाए, जिससे अटैक्स और सेंसरशिप का खतरा बढ़ता रहेगा।

“सबसे ज़्यादा चांस यही है कि अब से 7–11 साल के अंदर, ये दोनों ऑप्शंस और भी कई चीजें साथ में होंगी,” Bons ने लिखा।

उन्होंने इस मुद्दे को ब्लॉक साइज वॉर्स की विरासत से भी जोड़ा है। उनका कहना है कि Bitcoin Core के भीतर गवर्नेंस की सीमाओं के कारण प्रोटोकॉल में कोई बड़ा बदलाव तभी संभव है जब कोई गंभीर संकट मजबूर करे। वे चेतावनी देते हैं कि तब तक बहुत देर हो सकती है।

अस्वीकरण

हमारी वेबसाइट पर सभी जानकारी अच्छे इरादे से और केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से प्रकाशित की जाती है, ताकि पाठक जागरूक रह सकें। यह Trust Project दिशानिर्देशों के अनुरूप है। हमारी वेबसाइट पर दी गई जानकारी के आधार पर पाठक द्वारा की गई प्रत्येक कार्रवाई पूरी तरह से उनके अपने जोखिम पर होती है। कृपया हमारी नियम और शर्तें, गोपनीयता नीति और अस्वीकरण पढ़ें।