मिड-2025 से, Bitcoin ने ग्लोबल M2 मनी सप्लाई की ग्रोथ से खुद को अलग दिखाना शुरू कर दिया है। 2026 तक, यह डीकपलिंग और भी ज्यादा साफ नजर आ रही है।
इन दोनों फैक्टर्स के बीच ऐतिहासिक संबंध ने एक समय कई बुलिश प्रेडिक्शन का बेस बनाया था। अब एनालिस्ट्स इस phenomenon पर बंटे हुए हैं कि 2026 के लिए इसका क्या मतलब है।
Bitcoin और Global M2 के रिश्ते को लेकर Analysts में मतभेद
Fidelity Digital Assets की जनवरी की रिपोर्ट M2 मनी सप्लाई और Bitcoin प्राइस के बीच पॉजिटिव रिलेशन पर विश्वास जताती है।
Fidelity का कहना है कि Bitcoin के बुल साइकिल आमतौर पर उन्हीं पीरियड्स में आते हैं जब M2 तेजी से बढ़ता है। Bitcoin, अपनी लिमिटेड सप्लाई की वजह से, एक्स्ट्रा कैपिटल को बाकी एसेट्स से ज्यादा मजबूती से अब्ज़ॉर्ब करता है।
“जैसे ही ग्लोबल लेवल पर नया मॉनेटरी ईजिंग साइकिल शुरू हुआ है और Fed का QT प्रोग्राम खत्म हो गया है, पूरी संभावना है कि हम 2026 तक इस ग्रोथ रेट को अपवर्ड ट्रेंड में जाते हुए देखेंगे, जो कि Bitcoin प्राइस के लिए पॉजिटिव कैटालिस्ट रहेगा।” — Fidelity ने रिपोर्ट किया।
जो एनालिस्ट्स इस व्यू के सपोर्ट में हैं कहते हैं कि पिछले कुछ समय में गोल्ड और सिल्वर ने inflation-hedging की डिमांड को अब्ज़ॉर्ब किया है। साथ ही ये भी कि अलग-अलग देशों में दोबारा पैसे छापने का सिलसिला Bitcoin के लिए मेन ड्राइवर बन चुका है।
एनालिस्ट MartyParty इससे भी ज्यादा बोल्ड स्टैंड लेते हैं। वे Bitcoin प्राइस की तुलना करते हैं ग्लोबल M2 मनी सप्लाई से, 50-दिन के लेग के साथ। वह प्रेडिक्ट करते हैं कि इसी हफ्ते Bitcoin प्राइस में रिकवरी आ सकती है, ताकि वो ग्रोथ को पकड़ सके जो मनी सप्लाई में हुई है।
“Bitcoin बनाम ग्लोबल लिक्विडिटी – 50 दिन का लेग। M2 कहता है यहां से बाउंस होगा — 12 जनवरी।” — MartyParty ने प्रेडिक्ट किया।
हालांकि, Fidelity के चार्ट से यह पता चलता है कि पिछले एक साल में Bitcoin की सालाना ग्रोथ और ग्लोबल M2 की सालाना ग्रोथ में अब कोई सीधा संबंध नहीं रह गया है। 2026 की शुरुआत में यह अंतर और भी ज्यादा हो गया है। अभी Bitcoin की साल-दर-साल ग्रोथ निगेटिव है, जबकि Global M2 सालाना 10% से ज्यादा की ग्रोथ दिखा रहा है। इसी वजह से कई दूसरे एनालिस्ट्स को शक हो रहा है।
Mister Crypto के ऑब्जर्वेशन दिखाते हैं कि जब-जब Bitcoin प्राइस M2 ग्रोथ से अलग चला जाता है, तब मार्केट में अक्सर एक बड़ा टॉप आता है। इसके बाद आमतौर पर 2 से 4 साल तक बियर मार्केट देखने को मिलती है।
वहीं, एनालिस्ट Charles Edwards इस phenomenon को पूरी तरह अलग नजरिये से समझाते हैं।
उनका कहना है कि 2025 वह साल है, जब quantum computer के जरिए Bitcoin की encryption ब्रेक होने का असली खतरा बना। इसी कारण M2 और Bitcoin के बीच डिकपलिंग दिख रही है।
“यह पहली बार है जब Bitcoin मनी सप्लाई और ग्लोबल liquidity flows से अलग हुआ है। क्यों? 2025 पहला साल था जब Bitcoin Quantum Event Horizon में पहुंचा। अब बिटकॉइन की क्रिप्टोग्राफी को ब्रेक करने के लिए quantum machine के लिए नॉन-जीरो पॉसिबिलिटी पहले जितने टाइम से कम है, जितने टाइम में Bitcoin अपग्रेड होना है। इसी वजह से पैसे खुद को इसी रिस्क के हिसाब से पोजिशन कर रहे हैं।” — Charles Edwards ने कहा।
सारांश में देखें तो एनालिस्ट्स के बीच का ये विभाजन Bitcoin मार्केट की बढ़ती कॉम्प्लैक्सिटी दिखाता है। बुलिश ग्रुप अभी तक के ट्रेडिशनल मॉडल्स फॉलो कर रहा है, जैसे कि Fed के रेट कट्स और मनी प्रिंटिंग। वहीं बियरिश ग्रुप उन टेक्नोलॉजिकल रिस्क्स पर फोकस कर रहा है, जो पहले कभी नहीं देखे गए।
Bitcoin के लिए 2026 में कुछ और रिस्क्स भी हैं। इनमे शामिल हैं yen carry trade की वजह से आने वाले खतरें और तीसरे विश्व युद्ध की आशंका, क्योंकि ग्लोबल इकॉनमी और जियोपॉलिटिकल कंडीशन्स काफी जटिल बनती जा रही हैं।
ये रिस्क्स जरूरी नहीं कि Bitcoin का अंत कर देंगे। ये कई निवेशकों के लिए नए मौके भी ला सकते हैं। ये निवेशक अब भी मानते हैं कि चाहे दुनिया जितनी भी बदल जाए, Bitcoin एक लॉन्ग-टर्म वैल्यू स्टोर बना रहेगा, जैसा कि उसने अपनी 15 साल से ज्यादा की हिस्ट्री में बार-बार दिखाया है।