2025 के दौरान Bitcoin प्राइस में दिखा एक सूक्ष्म लेकिन अहम बदलाव, जिसमें संस्थागत निवेशकों का व्यवहार बदलता नजर आया। हालांकि BTC अभी भी मार्केट का एंकर बना रहा, लेकिन बड़े निवेशकों ने धीरे-धीरे अपनी होल्डिंग कम की और कुछ चुनिंदा ऑल्टकॉइन्स में पूंजी ट्रांसफर की।
इस पुनर्वितरण से संकेत मिलता है कि संस्थाएं अब जोखिम को अलग-अलग असेट्स में बांटना चाहती हैं। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किस वजह से इंस्टिट्यूशन्स ने Bitcoin से दूरी बना ली, और क्या यह ट्रेंड BTC के ऐतिहासिक चार-वर्षीय चक्र को देखते हुए 2026 तक जारी रह सकता है?
Institutions ने Altcoins को Bitcoin पर चुना
संस्थागत निवेशकों ने जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच Bitcoin से अपनी पूंजी काफी हद तक निकाल ली। CoinShares डेटा के अनुसार, 2024 में संस्थाओं ने BTC (netflows) में करीब $41.69 बिलियन निवेश किया था। वहीं इसी अवधि में ऑल्टकॉइन्स जैसे Ethereum, XRP और Solana को नुकसान हुआ, जहां इनकी इनफ्लो क्रमशः $5.3 बिलियन, $608 मिलियन और $310 मिलियन रही।
2025 में यह ट्रेंड पलट गया। Bitcoin में इनफ्लो $26.98 बिलियन रही, जबकि ETH, XRP और SOL में क्रमशः $12.69 बिलियन, $3.69 बिलियन और $3.65 बिलियन की इनफ्लो रिकॉर्ड हुई।
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2024 से 2025 तक, Bitcoin में संस्थागत रुचि में 31% की गिरावट आई, जबकि Ethereum में 137% की ग्रोथ देखी गई। वहीं Solana और XRP में क्रमशः 500% और 1,066% की जबरदस्त वृद्धि देखी गई।
अब सवाल ये है कि आखिर कौन-सी वजह रही, जिसने संस्थानों को ऑल्टकॉइन्स की ओर मोड़ दिया?
क्या था ये DeFi? ये DeFi नहीं था
डिसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस (DeFi) को हमेशा Bitcoin और टॉप ऑल्टकॉइन इकोसिस्टम्स के बीच सबसे अहम डिफरेंस मेकर माना गया। लेकिन 2025 में असल में DeFi एक्टिविटी ठहर गई। DeFi प्रोटोकॉल्स में टोटल वैल्यू लॉक्ड 2024 में 121% बढ़कर $52 बिलियन से $115 बिलियन हो गया। इससे उम्मीदें बढ़ीं कि यह तेजी आगे भी जारी रहेगी।
लेकिन ये उम्मीदें पूरी नहीं हो पाईं। 2025 में DeFi TVL सिर्फ 1.73% बढ़कर $117 बिलियन पहुँचा। नए प्रोटोकॉल और अपग्रेड्स के बावजूद ग्रोथ बहुत धीमी रही। इस स्टैग्नेशन से पता चलता है कि DeFi को ऐसी नई यूटिलिटी नहीं मिल पाई, जिससे संस्थागत निवेश बना रहे।
यह डेटा इस दावे को कमजोर करता है कि DeFi की मजबूत फंडामेंटल्स ने संस्थागत निवेशकों को altcoins की तरफ बढ़ाया। अगर DeFi असल में catalyze करता, तो कैपिटल डिप्लॉयमेंट यूज़ेज ग्रोथ के साथ चलता। लेकिन, एक्टिविटी एक स्तर पर आकर रुक गई, जिससे यह पता चलता है कि ऑन-चेन यूटिलिटी से अलग कोई और कारण था जिसने साल भर संस्थागत एलोकेशन डिसीजन को प्रभावित किया।
शिफ्ट की असली वजह क्या थी
Exchange-traded funds ने altcoins में संस्थागत शिफ्ट का सबसे बड़ा रोल निभाया। हालांकि, यह बदलाव narrative मोमेंटम से आया था, ना कि किसी ठोस फंडामेंटल्स से। Altcoin ETFs को approval मिला, यह कहते हुए कि DeFi यूटिलिटी की वजह से ज्यादा exposure जस्टिफाई होता है, जबकि ग्रोथ सीमित ही रही।
XRP, Solana, Dogecoin और Hedera के लिए ETF लॉन्च जल्द ही हुए। शुरुआती उत्साह ने inflows बढ़ाए, पर ज्यादातर प्रोडक्ट्स के लिए डिमांड जल्दी कम हो गई। Solana और XRP के अलावा बाकी जगह एक्टिविटी काफी कम रही। Dogecoin ETFs में ज्यादातर ट्रेडिंग सेशंस के दौरान नेट इनफ्लो लगभग शून्य रहा।
HBAR ETFs को भी ऐसा ही रिजल्ट देखने को मिला। Inflows बहुत कम या बिल्कुल भी नहीं रहे। ये पैटर्न बताता है कि altcoin ETFs के लिए संस्थागत investors की दिलचस्पी बहुत गहरी नहीं थी। इन products ने थोड़ी चर्चा जरूर बटोरी, लेकिन लगातार कैपिटल नहीं आया। इससे यह कन्फर्म होता है कि रियल यूटिलिटी की बजाय सिर्फ hype ने ही Bitcoin से हटकर शिफ्ट करवाया।
Bitcoin का बीता वक्त, भविष्य के लिए क्या संकेत देता है
2025 की पॉजिटिव सोच 2026 में बड़ा करेक्शन देख सकती है। दो प्रमुख कारण इस रीअसेसमेंट की ओर इशारा करते हैं। पहला- यूटिलिटी या डिमांड की कमी और दूसरा है Bitcoin का चार साल का cycle। इतिहास में देखा गया है कि इस cycle में जब उत्साह अपने peak पर होता है, तो उसके बाद मार्केट ठंडा पड़ जाता है।
Fidelity के डायरेक्टर ऑफ ग्लोबल मैक्रो, Jurrien Timmer ने दिसंबर 2025 में 2026 को “ऑफ ईयर” बताया था। ये अनुमान पिछले cycles से मेल खाता है, जहां जबरदस्त रैली के बाद मार्केट कंसोलिडेशन या हल्के बियरिश मोड में आ जाती है। आमतौर पर ऐसे समय में संस्थान भी रिस्क कम करते हैं।
“…मेरा मानना है कि Bitcoin ने अपना एक और 4-year cycle halving phase, प्राइस और समय दोनों में पूरा कर लिया है। अगर हम सभी बुल markets (हरा रंग) को विजुअली देखें तो अक्टूबर में $125k का high, 145 महीनों की रैली के बाद, ठीक वहीं फिट बैठता है जैसा उम्मीद की जाती है। Bitcoin विंटर्स लगभग एक साल चले हैं, इसलिए मुझे लगता है 2026 Bitcoin के लिए “ऑफ ईयर” रह सकता है,” Timmer ने कहा।
अलग-अलग एसेट्स की प्राइस परफॉर्मेंस भी इस सोच को सपोर्ट करती है। Bitcoin प्राइस 2025 में 6.3% गिरा। Ethereum 11% नीचे आया, XRP 11.5% गिरा और Solana में 34% की तेज गिरावट दिखी। altcoins की ये कमजोरी दिखाती है कि फंडामेंटल्स में कोई अच्छी बढ़त नहीं थी। ETF की एक्सपोजर के अलावा, संस्थानों के पास Bitcoin के मुकाबले altcoins चुनने की कोई खास वजह नहीं दिखी।
जब Bitcoin कंसोलिडेशन में जाता है, तो इतिहास में altcoins भी उसी ट्रेंड को फॉलो करते हैं। 2021 से 2022 के ट्रांजिशन में ये साफ दिखा। जैसे ही BTC कमजोर हुआ, इंस्टीट्यूशनल कैपिटल पूरे मार्केट से बाहर जाने लगा (संदर्भ: Institutional Flows in 2025)। 2026 में भी कुछ ऐसा ही पैटर्न देखने मिल सकता है, जिससे speculative diversification की मांग कम हो जाएगी और liquidity व रिस्क मैनेजमेंट पर ध्यान बढ़ जाएगा।
2025 में Bitcoin से संस्थानों का मूव स्ट्रक्चरल कम और साइक्लिकल ज्यादा लगता है। ETF ड्रिवन नैरेटिव्स, DeFi ग्रोथ के स्लो होने से जो गैप आया था, उसे तो भरने की कोशिश की, लेकिन डिमांड ज्यादा मजबूत साबित नहीं हुई। जैसे-जैसे cycle dynamics फिर से एक्टिव होंगे, संस्थान ये सोच सकते हैं कि क्या वाकई altcoins, Bitcoin के मुकाबले कोई फायदा दे रहे हैं।