Quantum कंप्यूटिंग से Bitcoin को खतरा अक्सर दूर की बात समझा जाता है, लेकिन अगर आप करीब से देखेंगे, तो पाएंगे कि इसका असर अब दिखना शुरू हो चुका है।
हाल ही की रिसर्च और इंस्टिट्यूशनल एक्टिविटीज से लगता है कि घड़ी उम्मीद से ज्यादा तेजी से चल रही है।
Quantum Computing का असर Bitcoin पर दिख रहा है, लेकिन जैसा सोचा था वैसा नहीं
Bitcoin की हालिया परफॉर्मेंस गोल्ड के मुकाबले कमजोर रही है, जिससे इंस्टिट्यूशनल इन्वेस्टर्स का ध्यान फिर से इस पर गया है। हालांकि, इसकी वजह पारंपरिक मार्केट फोर्सेस नहीं, बल्कि quantum कंप्यूटिंग (QC) का रिस्क है, जिससे एक दिन इसकी क्रिप्टोग्राफी को भी खतरा हो सकता है।
अब स्ट्रैटेजिस्ट्स इन खतरों को केवल थ्योरी में नहीं, बल्कि असली मान रहे हैं, जिससे पोर्टफोलियो एलोकेशन बदल रहे हैं और Bitcoin की लॉन्ग-टर्म सिक्योरिटी को लेकर डिबेट तेज हो गई है।
BeInCrypto की रिपोर्ट के अनुसार, Jefferies के स्ट्रैटेजिस्ट Christopher Wood ने अपने मशहूर “Greed & Fear” मॉडल पोर्टफोलियो से 10% Bitcoin पोज़ीशन हटा दी है और इसे physical गोल्ड और माइनिंग स्टॉक्स में डाल दिया है।
Wood ने चिंता जताई कि quantum कंप्यूटिंग, Bitcoin के Elliptic Curve Digital Signature Algorithm (ECDSA) keys को ब्रेक कर सकती है और इसकी स्टोर-ऑफ-वैल्यू थ्योरी कमजोर कर सकती है।
“फाइनेंशियल एडवाइजर्स इस तरह की रिसर्च पढ़ते हैं और क्लाइंट की एलोकेशन या तो कम रखते हैं या बिल्कुल नहीं रखते, क्यूंकि quantum कंप्यूटिंग एक existential खतरा है। जब तक यह सॉल्व नहीं होता, BTC के गले में यह yoke रहेगा,” ऐसा X पर पॉपुलर यूजर batsoupyum ने लिखा।
रिसर्च भी इस सावधानी की पुष्टि करती है, 2025 की Chaincode Labs स्टडी के अनुसार 20-50% सर्क्युलेटिंग Bitcoin एड्रेस भविष्य में quantum अटैक के लिए वल्नरेबल हैं, क्योंकि इनमें पब्लिक कीज री-यूज़ हुई हैं। लगभग 6.26 मिलियन BTC, जिसकी वैल्यू $650 बिलियन से $750 बिलियन के बीच है, रिस्क में आ सकती है।
इसी बीच, Projection Calculator का चार्ट इस बड़े खतरे की ओर दिखाता है, जिसमें समय के साथ quantum हार्डवेयर कैपेबिलिटी में एक्सपोनेंशियल ग्रोथ नजर आ रही है।
जैसे-जैसे quantum मशीनों का qubit काउंट तेजी से बढ़ रहा है, खासतौर से Google की 2025 की उपलब्धियों के बाद, cryptographically relevant quantum कंप्यूटर्स (CRQCs) का बनना और भी संभव लग रहा है।
Bitcoin की डिसेंट्रलाइज्ड स्ट्रक्चर इस चुनौती को और बढ़ा देता है। पारंपरिक बैंकों के उलट, जो सेंट्रल अथॉरिटी से quantum-safe अपग्रेड्स करा सकते हैं, Bitcoin में ये बदलाव डिस्ट्रिब्यूटेड नेटवर्क को coordinate करके करने होते हैं।
यहां कोई रिस्क कमिटी नहीं है, न ही कोई ऐसा नियम है, और न ही कोई एक इकाई है जो तुरंत कार्रवाई कराने की क्षमता रखती हो।
“पहले मैं क्वांटम कंप्यूटिंग (QC) के Bitcoin पर रिस्क को दूर की कौड़ी मानता था। अब ऐसा नहीं है। आमतौर पर जवाब ये मिलता है: QC सालों तक कोई खतरा नहीं रहा, और अगर खतरा आया भी तो पूरा फाइनेंशियल सिस्टम ही खतरे में आ जाएगा… [Bitcoin] टेक्निकली अपग्रेड कर सकता है। लेकिन ऐसा करने के लिए डिसेंट्रलाइज नेटवर्क में धीमा और जटिल कॉर्डिनेशन चाहिए। कोई ये नहीं कह सकता, ‘हम अभी स्विच कर रहे हैं।’”, Jamie Coutts ने बताया ।
Quantum Computing का रिस्क Bitcoin की इंस्टीट्यूशनल अपील पर पड़ रहा भारी
मार्केट में ये चिंता अब दिखने लगी है। 2026 में Bitcoin ने गोल्ड की तुलना में YTD परफॉर्मेंस में 6.5% की गिरावट देखी है, वहीं गोल्ड 55% तक बढ़ गया है। जनवरी 2026 में BTC/gold रेश्यो 19.26 पर पहुंच गया, जो कि सलाहकारों की सतर्कता के साथ मेल खाता है।
संस्थाएं अपने रेस्पॉन्स में अलग-अलग हैं। जहां Wood ने अपनी एक्सपोजर कम की, वहीं खबर है कि Harvard ने अपनी Bitcoin अलोकेशन करीब 240% तक बढ़ाई है।
इसी तरह, Morgan Stanley ने अपने वेल्थ मैनेजमेंट क्लाइंट्स को सलाह दी है कि वे अपने पोर्टफोलियो का 4% तक डिजिटल एसेट्स में डाइवर्ट करें। साथ ही, Bank of America 1% से 4% के बीच अलोकेशन की अनुमति देता है।
यह दिखाता है कि सपोर्ट खत्म नहीं हो रहा, बस अलग-अलग रिस्क असेसमेंट के हिसाब से फैल रहा है।
फिर भी, कुछ का मानना है कि क्वांटम रिस्क लो-प्रॉबेबिलिटी लेकिन हाई-इम्पैक्ट है। Coinbase के David Duong ने दो बड़े खतरे बताए: क्वांटम कंप्यूटर्स ECDSA कीज को तोड़ सकते हैं और SHA-256 पर निशाना साध सकते हैं, जो कि Bitcoin के प्रूफ-ऑफ-वर्क सिस्टम की नींव है।
जो एड्रेस सबसे ज़्यादा वलनरेबल हैं, उनमें लेगेसी Pay-to-Public-Key स्क्रिप्ट्स, कुछ मल्टीसिग वॉलेट्स, और खुले Taproot सेटअप्स शामिल हैं।
एड्रेस हाईजीन, री-यूज़ किए गए एड्रेस से बचना और कॉइन्स को क्वांटम-रेजिस्टेंट एड्रेस में ट्रांसफर करना, ये सब अहम बचाव स्ट्रेटजी माने जाते हैं।
2024 में NIST द्वारा फाइनल किए गए पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी स्टैंडर्ड्स भविष्य में सुरक्षा के लिए रोडमैप देते हैं। लेकिन, Bitcoin का एडॉप्शन अब भी जटिल है।
Cardano के Charles Hoskinson ने चेतावनी दी है कि जल्दबाजी में एडॉप्शन से एफिशिएंसी काफी कम हो सकती है। वहीं, DARPA का Quantum Blockchain Initiative मानता है कि 2030 के दशक में इस टेक्नोलॉजी से जुड़े गंभीर खतरे सामने आ सकते हैं।
फिर भी, प्रोजेक्शन चार्ट में दिखती तेज रफ्तार और AI के इंटीग्रेशन से quantum डेवेलपमेंट का समय लाइन छोटा हो सकता है। इसका मतलब ये है कि quantum टेक्नोलॉजी की ग्रोथ पहले से भी तेज हो सकती है।
Quantum computing का मुद्दा अब सिर्फ़ थ्योरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो पर भी इसका असर दिखने लगा है। Bitcoin का अंडरपरफॉर्म करना सिर्फ मार्केट के साइकल का नतीजा नहीं है, बल्कि ये उस एक्सिस्टेंशियल रिस्क का भी असर है, जो अब इन्वेस्टर्स के फंड एलोकेशन और खुद नेटवर्क के लिए एक बड़ा टेक्निकल चैलेंज बन गया है।
जब तक Bitcoin की डिसेंट्रलाइजेशन सिस्टम पूरी तरह से quantum-resistant अपग्रेड के लिए कोऑर्डिनेट नहीं कर लेता, तब तक BTC की ग्रोथ पर ये “जुआ” बना रहेगा।