जैसे-जैसे ग्लोबल डिजिटल-एसेट इंडस्ट्री mature हो रही है, discussion speculation से हटकर structure, compliance और लॉन्ग-टर्म infrastructure की तरफ़ बढ़ रहा है। Bitpanda इस बदलाव को सबसे अच्छे तरीके से दिखाने वाली कंपनियों में से एक है। शुरुआत में यह प्लेटफॉर्म Europe में शुरू हुआ था, लेकिन आज यह एक रेग्युलेटेड, मल्टी-एसेट investment इकोसिस्टम में बदल चुका है और अब इसकी ग्लोबल reach तेज़ी से बढ़ रही है।
हाल ही में Bitpanda के वाइस प्रेसिडेंट ऑफ ग्लोबल मार्केट्स स्ट्रेटेजी एंड ऑपरेशंस Vishal Sacheendran के साथ बातचीत में एक बात लगातार सामने आई: रेग्युलेशन से कंपनी की स्पीड कम नहीं हो रही है, बल्कि यह इसके expansion को और तेज़ बना रहा है।
ग्रोथ के लिए रेग्युलेशन, रुकावट नहीं
Bitpanda के लिए रेग्युलेशन सिर्फ़ एक फ़ॉर्मेलिटी नहीं है। जैसा Sacheendran ने बताया, “रेग्युलेशन हमारे ग्लोबल एक्सपेंशन की नींव है, कोई रूकावट नहीं।” उन्होंने ये भी कहा कि Europe में MiCAR, UK में FCA रजिस्ट्रेशन और Dubai में VARA approval हासिल करना उनके प्लानिंग का एक हिस्सा था ताकि “हम हर रीजन में एक consistent ऑपरेशनल मॉडल बना सकें।”
यही रेग्युलेशन-फर्स्ट सोच institution level पर बड़ा विश्वास लेकर आई है। Sacheendran के अनुसार, “जल्दी और proactively compliance को फॉलो करने की वजह से institutions के बीच हमारी trust काफी मजबूत बनी है।”
Bitpanda ने शुरुआत से ही अपनी infrastructure को regulatory standards से आगे रखने पर focus किया, ताकि जब भी कोई नया मार्केट खुले तो कंपनी आगे बढ़ सके।
उनके शब्दों में, “हम जल्दी नए markets में स्केल कर सकते हैं क्योंकि हमारी infrastructure पहले से ही सबसे टॉप regulatory standards पर है।”
Middle East क्यों है अहम
Europe के अलावा अब Bitpanda MENA (Middle East and North Africa) region में बड़ा फोकस कर रहा है। Sacheendran ने कहा कि इस region की demographic और मार्केट की मजबूत बुनियाद है। उन्होंने कहा, “MENA में दुनिया के सबसे युवा और तेजी से बढ़ते investors हैं, और यहां digital assets की जबरदस्त डिमांड है।”
रेग्युलेटरी डेवलपमेंट भी यहां अहम साबित हो रहा है। Sacheendran के मुताबिक, “यहां का region खासतौर पर UAE, progressive regulatory frameworks बना रहा है,” जिससे ऐसा माहौल मिल रहा है जो compliant और sustainable मार्केट entry को सपोर्ट करता है।
इसी वजह से, Bitpanda की रीजनल स्ट्रेटेजी disruption नहीं, बल्कि collaboration पर आधारित है। “हमारी strategy यहां banks, institutions और regulators के साथ partnership करने पर है ताकि हम compliant तरीके से मार्केट में एंटर कर सकें,” उन्होंने बताया।
Sacheendran ने मार्केट्स के बीच एक अहम फर्क भी बताया। Europe में जहां रिटेल एडॉप्शन ज़्यादा है, वहीं MENA में institutions लीड कर रहे हैं। “Europe में रिटेल एडॉप्शन ड्राइव करता है, MENA में institutions आगे हैं, और हमारा मॉडल दोनों जगह बेहद सही बैठता है।”
एकीकृत इन्वेस्टमेंट अनुभव, केंद्र में क्रिप्टो
आज, Bitpanda सिर्फ क्रिप्टो ट्रेडिंग ही नहीं, बल्कि users को एक ही प्लेटफॉर्म पर stocks, ETFs, commodities और precious metals तक एक्सेस देता है। हालांकि, Sacheendran ने साफ किया कि expansion कंपनी की core पहचान से कभी भी समझौता नहीं करेगा।
उन्होंने कहा, diversification को “यूज़र डिमांड और लॉन्ग-टर्म relevance के साथ–साथ ऐसे assets पर फोकस करके किया जाता है, जो क्रिप्टो को रिप्लेस नहीं, बल्कि उसे complement करें।”
Sacheendran के अनुसार, सबसे बड़ा मकसद यही है कि “एक unified investment experience बनाना, जिसमें क्रिप्टो और ट्रेडिशनल एसेट्स दोनों साथ मिलें।” इसी अप्रोच से नए products डिजाइन और डिलीवर होते हैं। उन्होंने बताया, “हम उन asset classes को प्रायोरिटी देते हैं जिन्हें fractionally, 24×7 और पूरी transparency के साथ ऑफर किया जा सके।”
भले ही प्रोडक्ट की रेंज बढ़ रही है, फिर भी क्रिप्टो इस प्लेटफॉर्म के दिल में बना हुआ है। Sacheendran ने कहा, “क्रिप्टो हमारी पहचान का केंद्रीय हिस्सा है और विविधता हमें एक मॉडर्न इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म के रूप में मजबूत बनाती है।”
Institutions के लिए Infrastructure Layer तैयार करना
अपने कंज्यूमर प्लेटफॉर्म के अलावा, Bitpanda लगातार संस्थागत स्तर पर अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है, Bitpanda Technology Solutions (BTS) के ज़रिए। Sacheendran के अनुसार, “BTS अभी यूरोप और MENA में बैंकों, फिनटेक्स और नियोबैंकों के लिए डिजिटल एसेट सर्विसेज़ दे रहा है,” जिससे ये यूनिट रेग्युलेटेड मार्केट में एंट्री के लिए अहम बन गया है।
आगे की रणनीति में, BTS को और आगे बढ़ाने की प्लानिंग है। Sacheendran ने बताया, “अगला कदम कस्टडी, ट्रेडिंग, टोकनाईजेशन और सेटलमेंट को मॉड्यूलर इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ गहराई से जोड़ना है,” जिससे फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशंस बिना अपनी पूरी सिस्टम दोबारा बनाए, डिजिटल एसेट्स को अपना सकें।
यह बदलाव यूरोप में रेग्युलेटरी मूवमेंट के साथ अच्छी तरह से मेल खाता है। उन्होंने कहा, “जैसे ही बैंक MiCAR के तहत रेग्युलेटेड क्रिप्टो को अपनाएंगे, BTS उनकी डिफॉल्ट प्लग-एंड-प्ले सॉल्यूशन बनने के लिए तैयार है।”
इस महत्वाकांक्षा के पैमाने को समझाते हुए Sacheendran ने क्लाउड कंप्यूटिंग के शुरुआती दिनों से तुलना की और बताया कि BTS “एक जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर बन सकता है, जैसे क्लाउड प्रोवाइडर्स पूरी इंटरनेट को सपोर्ट करते हैं।”
Stablecoins और रेग्युलेटेड DeFi पर सभी की नजरें
Bitpanda के रोडमैप का सबसे फॉरवर्ड-लुकिंग हिस्सा स्टेबलकॉइन्स और डिसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस के क्रॉस पॉइंट पर है। SG-FORGE के पार्टनरशिप के जरिए कंपनी ने दिखाया है कि “रेग्युलेटेड यूरो स्टेबलकॉइन्स से बिल्कुल नए संस्थागत इस्तेमाल के मामले सामने आ सकते हैं।”
Sacheendran ने बताया, “स्टेबलकॉइन्स अभी तेज सेटलमेंट, क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स और ऑन-चेन फाइनेंस के लिए फाइनेंशियल रेल्स बन रहे हैं”, और “DeFi अब रेग्युलेटेड और संस्थागत मॉडल की तरफ बढ़ रहा है, जिसमें टोकनाइज्ड मनी मार्केट्स और ऑन-चेन कोलेट्रल शामिल हैं।”
इस संदर्भ में, Bitpanda का लक्ष्य है “रिटेल यूज़र्स और इंस्टिट्यूशंस दोनों को इन इनोवेशंस तक सुरक्षित और कंप्लायंट एक्सेस देना, जिससे ट्रेडिशनल फाइनेंस को ऑन-चेन इकोसिस्टम्स से जोड़ा जा सके।” Sacheendran ने बताया।
Bitpanda के लिए आगे क्या
आने वाले 18 से 24 महीनों में, Vishal Sacheendran ने ग्लोबल रेग्युलेटेड एक्सपansion और प्रोडक्ट डेप्थ पर फोकस किया हुआ एक रोडमैप शेयर किया। उन्होंने खासतौर पर “ऐसे रीजन में विस्तार” की बात कही, जहां क्लियर रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क हो, जैसे APAC, LATAM, और Middle East, जिससे कंप्लायंस Bitpanda के अगले ग्रोथ का की पॉइंट बन सके।
प्रोडक्ट साइड पर Sacheendran ने कहा, “नई प्रोडक्ट लाइनें आएंगी, जिसमें एडवांस्ड वेल्थ टूल्स, ज्यादा टोकनाइज्ड एसेट्स और स्टॉक्स व ETFs का और गहरा इंटीग्रेशन होगा।”
साथ ही, Bitpanda की प्लानिंग है कि Bitpanda Technology Solutions को “फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशंस के लिए ग्लोबल इन्फ्रास्ट्रक्चर लेयर” के रूप में स्केल किया जाए, जिसमें “फाइनेंस और टेक्नोलॉजी की स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स” डिजिटल एसेट्स के मेनस्ट्रीम एडॉप्शन को तेजी देंगी।
जैसे-जैसे डिजिटल-एसेट इंडस्ट्री अपने अगले फेज में जा रही है, Bitpanda की स्ट्रैटेजी ये इंडीकेट करती है कि जीत उन्हीं की होगी जो तेज़ नहीं, बल्कि स्ट्रक्चर, क्रेडिबिलिटी और लॉन्ग-टर्म विजन के साथ आगे बढ़ेंगे।