Peter Steinberger, जो open-source AI असिस्टेंट ClawdBot के क्रिएटर हैं, ने पब्लिकली किसी भी तरह के क्रिप्टो से जुड़ाव से इंकार किया है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि स्कैमर्स ने उनकी ऑनलाइन पहचान का गलत इस्तेमाल कर फेक टोकन प्रोजेक्ट्स को प्रमोट किया।
यह कंट्रोवर्सी ClawdBot के Moltbot में रीब्रांड होने के बाद सामने आई। Steinberger के अनुसार, Anthropic की तरफ से ट्रेडमार्क को लेकर चिंताओं के कारण उन्हें नाम बदलना पड़ा, और बाद में इसी चीज़ का क्रिप्टो प्रमोटर्स ने गलत फायदा उठाया।
AI Founder ने कड़ा कदम उठाया, Crypto scammers ने की उनकी पहचान से छेड़छाड़
X (Twitter) पर पोस्ट्स की एक सीरीज में, Steinberger ने अपना स्टैंड बिल्कुल क्लियर किया और बताया कि वह कभी भी कोई कॉइन नहीं लाएंगे।
“कोई भी प्रोजेक्ट जो मुझे कॉइन ओनर के तौर पर दिखाता है, वो SCAM है। नहीं, मैं कोई भी फीस एक्सेप्ट नहीं करूंगा। आप प्रोजेक्ट को नुकसान पहुँचा रहे हैं,” उन्होंने लिखा।
Steinberger ने आगे कहा कि उन्होंने कभी कोई टोकन जारी नहीं किया है, वह किसी भी क्रिप्टो इनिशिएटिव का समर्थन नहीं करते और किसी भी हालत में डिप्लॉयमेंट या एंडोर्समेंट फीस नहीं लेंगे।
यह स्थिति ClawdBot की AI डेवलपर सर्कल में पॉपुलैरिटी से शुरू हुई थी। यह AI एजेंट हमेशा-ऑन रहने वाली अपनी शानदार कैपेबलिटी के लिए चर्चा में आया, जिससे इसके यूज़ और रिस्क्स दोनों पर बात होने लगी।
जैसे-जैसे प्रोजेक्ट बड़ा हुआ, Anthropic ने “ClawdBot” नाम को लेकर ट्रेडमार्क की चिंता जताई। इससे Steinberger को प्रोजेक्ट का नाम बदलकर Moltbot रखना पड़ा। यह नाम Lobster थीम वाले असिस्टेंट के “molting” यानी बदलाव को दिखाता है।
हालांकि, ये ट्रांजिशन स्मूथ नहीं रहा। Steinberger मानते हैं कि नाम बदलते समय हुई ऑपरेशनल गलतियों के कारण कुछ गलत लोग उनकी पुरानी आईडीज़ पर कब्जा कर गए।
Steinberger के अनुसार, क्रिप्टो स्कैमर्स ने जल्दी ही उनकी पुरानी X और GitHub अकाउंट्स को कब्जा लिया और उनका इस्तेमाल फर्जी मीम कॉइन टोकन स्कीम्स लॉन्च या प्रमोट करने के लिए किया, जिसमें झूठा दावा किया गया कि Steinberger शामिल हैं।
बाद में उन्होंने कन्फर्म भी किया कि उनका ओरिजिनल GitHub अकाउंट हैक हो चुका है और पब्लिकली मदद मांगी।
मीम कॉइन कल्चर और Open-Source AI की टकराहट में उत्पीड़न जारी
कई बार क्रिप्टो से खुद को दूर करने के बावजूद भी Steinberger ने बताया कि उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है। उन्होंने डिस्क्राइब किया कि क्रिप्टो प्रैक्टिशनर्स बार-बार मैसेज कर रहे हैं ताकि वह टोकन डिप्लॉयमेंट फीस “क्लेम” करें।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ लोग उनसे ये भी कह रहे हैं कि वे अपने नाम पर टोकन लॉन्च को स्वीकार करें, जबकि ऐसा करने से ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट को नुकसान पहुंच रहा है और यूज़र्स कन्फ्यूज हो रहे हैं।
“वो लोग मेरी ऑनलाइन लाइफ को नरक बना देते हैं। मैं मुश्किल से अपना अकाउंट इस्तेमाल कर पाता हूँ। लगातार पिंग्स आते रहते हैं। वो हमारे Discord सर्वर में घुस जाते हैं, सर्वर के नियमों को इग्नोर करते हैं, मुझे Telegram पर स्पैम करते हैं, और मेरे अकाउंट के नामों पर कब्जा कर लेते हैं। वो मेरी ऑनलाइन लाइफ बहुत मुश्किल बना देते हैं। इस चीज़ के लिए कोई कॉइन बनाने का कोई मतलब नहीं है। मैं एक छोटी सी कमाई के लिए अपनी रेप्युटेशन नहीं गँवाऊँगा,” Steinberger ने BeInCrypto को दिए एक्सक्लूसिव बयान में कहा।
Steinberger की चेतावनी पर कम्युनिटी की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है। उनके पोस्ट्स पर लोग “फ्री पैसे” को लेकर मज़ाक भी कर रहे हैं और कुछ ने टोकन कल्चर से दूरी बनाने के उनके फैसले का मजबूती से समर्थन किया है।
इस घटना ने दिखा दिया है कि मीम कॉइन की स्पेक्युलेशन कितनी गहराई तक ऑनलाइन टेक कम्युनिटी में फैल चुकी है, चाहे क्रिएटर्स ने इस स्पेस में शामिल होने से साफ मना भी कर दिया हो।
Steinberger ने पहले भी “vibecoin” जैसी पैरोडी आइडिया के ज़रिए इस स्पेस का मजाक उड़ाया है, लेकिन उन्होंने साफ कहा है कि ClawdBot (जिसका नाम अब Moltbot है) कोई क्रिप्टो प्रोजेक्ट नहीं है और कभी भी नहीं होगा।
BeInCrypto ने Steinberger से पूछा कि क्या उनके Vibecoin रेफरेंस ने अनजाने में ClawdBot को क्रिप्टो जैसा दिखने का खतरा तो नहीं बढ़ा दिया।
“मुझे नहीं लगता कि उनमें से ज्यादा लोगों को पन समझ में आया। ऐसा लगता है कि वो सिर्फ 5 सेकंड के लिए इसे देख लेते हैं। आखिर ये किस डेमोग्राफिक के लोग हैं? बच्चे?” Steinberger ने जवाब दिया।
खास बात ये भी है कि कुछ यूज़र्स ने ये बताया है कि उनको डोमेन बदलना पड़ा है ताकि वो गलत इरादों वाले लोगों के टारगेट में न आएं।
Steinberger ने इस कदम का समर्थन किया है, क्योंकि यूज़र्स के लिए लगातार बढ़ती समस्याएं आ रही थीं।
Array VC की Shruti Gandhi ने बताया कि उन्होंने Clawdbot इस्तेमाल करने के बाद वीकेंड में 7,922 बार अटैक झेला।
Viral AI टूल्स पर बढ़ा सिक्योरिटी रिस्क, अनचाहा ध्यान खींच रहे
प्रोजेक्ट की अचानक पॉपुलैरिटी के कारण इसके सिक्योरिटी इम्प्लीकेशन्स पर भी चर्चा शुरू हो गई है। ब्राउज़र डिवेलपर Brave ने पब्लिक गाइडेंस जारी करके वॉर्न किया है कि ClawdBot जैसे हमेशा ऑन रहने वाले AI एजेंट्स, अगर सही से कंफिगर न हों तो, काफी रिस्क पैदा कर सकते हैं।
इसी वजह से, ब्राउज़र ने यूज़र्स को सलाह दी है कि बोट को अलग (isolated) मशीन पर चलाएं, अकाउंट एक्सेस लिमिट करें और उसे डायरेक्ट इंटरनेट पर एक्सपोज़ करने से बचें।
“…ऐसे टूल्स के लिए कोई ‘परफेक्टली सिक्योर’ सेटअप नहीं है,” Brave ने ज़ोर दिया।
Steinberger के लिए, यह घटना ओपन-सोर्स AI डेवलपर्स को मिलने वाले रिस्क को दिखाती है, खासकर जब प्रोजेक्ट्स वायरल हो जाते हैं। जो सिर्फ एक टेक्निकल रीब्रांड के तौर पर शुरू हुआ था, अब वह आइडेंटिटी हाईजैकिंग, स्पेक्युलेटिव एक्सेस और AI इनोवेशन व क्रिप्टो हाइप के बढ़ते ओवरलैप और फ्रिक्शन का मामला बन गया है।