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Coinbase CEO ने China की CBDC पॉलिसी का बचाव किया — वजह क्या है

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Oihyun Kim

08 जनवरी 2026 02:19 UTC
  • Armstrong ने China के digital yuan के ब्याज भुगतान को बताया प्रतियोगी बढ़त, बोले US stablecoin नियमों में देरी से पिछड़ सकता है America
  • Chinese एनालिस्ट्स ने कहा डिजिटल युआन stablecoin नहीं है, ब्याज पेमेंट्स का मकसद कम एडॉप्शन को एड्रेस करना है, मजबूती नहीं
  • यह बयान तब आया जब US बैंकिंग ग्रुप्स ने GENIUS Act में yield-sharing loopholes बंद करने के लिए लॉबिंग तेज की

Coinbase के CEO Brian Armstrong ने US stablecoin पॉलिसी के लिए चीन के मॉडल को सराहा है। इस समय पर दिए गए उनके बयान से उनकी मंशा पर सवाल उठने लगे हैं।

Armstrong ने चीन के सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी पर दिए जा रहे ब्याज का समर्थन ऐसे समय किया है जब उनकी कंपनी एक अहम रेवेन्यू स्ट्रीम को बचाने के लिए अमेरिकी बैंकिंग लॉबी से मुकाबला कर रही है। पिछले जुलाई में पारित हुए GENIUS Act ने Coinbase जैसी प्लेटफॉर्म्स को stablecoin धारकों के साथ यील्ड शेयर करने की अनुमति दी थी — अब बैंकिंग ग्रुप्स इस प्रोविजन को खत्म करने का दबाव डाल रहे हैं।

Armstrong ने क्या कहा

Armstrong ने 8 जनवरी को X पर चीन के डिजिटल करेंसी मॉडल की तारीफ की। उन्होंने लिखा, “चीन अपने खुद के stablecoin पर ब्याज दे रहा है, क्योंकि इससे आम लोगों को फायदा मिलता है और वे इसे एक कॉम्पिटिटिव एडवांटेज मानते हैं।” साथ ही Armstrong ने जोड़ा, “मुझे लगता है कि US में हम अहम चीज़ें नजरअंदाज कर रहे हैं।”

उनका कहना है कि stablecoins पर रिवॉर्ड्स देना आम अमेरिकियों को लाभ पहुंचाएगा और इससे बैंक लेंडिंग पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि “मार्केट को दोनों चीजें करने दी जानी चाहिए।”

Chinese रेस्पॉन्स

चीन की तरफ से इस पर हैरानी जताई गई। क्रिप्टो एनालिस्ट Phyrex ने Armstrong की सोच में एक बड़ी गलती बताई : डिजिटल युआन कोई stablecoin नहीं है।

Phyrex के मुताबिक, ब्याज देना कॉम्पिटिटिव स्ट्रेंथ नहीं बल्कि लो एडॉप्शन का नतीजा है। चीन के WeChat Pay और Alipay जैसे मोबाइल पेमेंट प्लेटफॉर्म्स में जमा युआन पर ब्याज मिलता है, जबकि डिजिटल युआन पर ऐसा कुछ नहीं था, जिस वजह से यूज़र्स के पास स्विच करने का कोई कारण नहीं था। 1 जनवरी से शुरू हुई ब्याज की स्कीम कमर्शियल बैंक्स द्वारा सब्सिडाइज की जा रही है, न कि सेंट्रल बैंक द्वारा। और इसमें ब्याज दरें भी सामान्य डिपॉजिट की तुलना में कम हैं।

GENIUS Act की जंग

Armstrong के इस बयान के बीच US stablecoin रेगुलेशन को लेकर ज़बरदस्त लॉबिंग वॉर चल रही है।

जुलाई 2025 में पास हुए GENIUS Act के तहत stablecoin जारी करने वालों को सीधे धारकों को ब्याज देने पर रोक लगी है, लेकिन थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म्स जैसे एक्सचेंजेज को “रिवॉर्ड्स” प्रोग्राम के माध्यम से यील्ड शेयर करने की इजाजत दी गई है। यह समझौता Coinbase जैसे प्लेटफॉर्म्स के पक्ष में जाता है।

बैंकिंग इंडस्ट्री ने इसका जबरदस्त विरोध किया है। नवंबर में American Bankers Association और 52 स्टेट बैंकिंग असोसिएशन ने Treasury Department को चिट्ठी लिखकर रेग्युलेटर्स से इस “loophole” को बंद करने की मांग की। उनका कहना है कि अगर stablecoin प्लेटफॉर्म्स हाई-यील्ड रिवॉर्ड्स देंगे तो इससे बैंक डिपॉजिट्स का ऑउटफ्लो हो सकता है, जिससे $6.6 ट्रिलियन तक की लेंडिंग कैपेसिटी पर खतरा पैदा हो सकता है।

इस हफ्ते भी लॉबीइंग जारी रही। 7 जनवरी को, 200 से ज्यादा कम्युनिटी बैंक लीडर्स ने सेनेट को एक पत्र भेजा और सांसदों से GENIUS Act के इंटरेस्ट प्रोहिबिशन को जारीकर्ताओं की एफिलिएट्स और पार्टनर्स तक बढ़ाने की मांग की।

Armstrong ने 26 दिसंबर को जवाब दिया और GENIUS Act को फिर से खोलने की किसी भी कोशिश को “रेड लाइन” कहा। उन्होंने बैंकों की आलोचना की, जो Federal Reserve में रखे गए रिजर्व्स पर करीब 4% कमा रहे हैं, जबकि डिपॉजिटर्स को लगभग कुछ भी नहीं दे रहे। Armstrong ने बैंकों पर आरोप लगाया कि वे यील्ड रिस्ट्रिक्शन को सुरक्षा की चिंता जताकर “मेंटल जिम्नास्टिक्स” कर रहे हैं।

China Comparison की सीमाएं

Armstrong ने चीन का जिक्र करके एक कंपटीटिव नैरेटिव बनाने की कोशिश की है: अगर चीन ये कर सकता है, तो अमेरिका क्यों नहीं?

इस तुलना को लेकर कई सवाल उठते हैं। एक CBDC और एक प्राइवेट stablecoin दोनों अलग-अलग इंस्ट्रूमेंट्स हैं—डिजिटल युआन चीन के सेंट्रल बैंक द्वारा जारी लीगल टेंडर है, जबकि USDC और USDT प्राइवेट कंपनियों के dollar-पेग्ड टोकन हैं। जैसे कि Phyrex जैसे आलोचक मानते हैं कि डिजिटल युआन का इंटरेस्ट प्रोग्राम एडॉप्शन की चुनौतियां दिखाता है, न कि कोई कंपटीटिव स्ट्रेंथ।

लेकिन Armstrong की मुख्य बात—कि यील्ड-शेयरिंग का फायदा आम लोगों को मिलना चाहिए और इस पर रोक नहीं लगनी चाहिए—शायद फिर भी लोगों को समझ आए। आखिरकार, अमेरिका में बहस इस पर है कि प्राइवेट प्लेटफॉर्म्स को बैंकों के साथ डिपॉजिट्स के लिए कितना कॉम्पिटिशन करने की जगह मिलनी चाहिए।

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