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Quantum Computing से क्रिप्टो की पहली survival test, सिर्फ कुछ chains ही कर रही तैयारी

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के द्वारा लिखा और edit किया गया
Lockridge Okoth

27 जनवरी 2026 07:22 UTC
  • Coinbase, Ethereum और Optimism पोस्ट-क्वांटम अपग्रेड्स की प्लानिंग में एक्टिव, वहीं Bitcoin की डिसेंट्रलाइज्ड गवर्नेंस के कारण coordination धीमा
  • इंस्टिट्यूशनल investors अब capital allocation decisions में quantum risk को ध्यान में रख रहे हैं, adaptable chains को दे रहे हैं तरजीह
  • अगले दस साल में पता चलेगा क्या crypto networks असली खतरे से पहले quantum-resistant security पर शिफ्ट हो पाएंगे

Quantum computing अब कोई दूर की थ्योरी नहीं रह गई है। इसने क्रिप्टो इंडस्ट्री के इंफ्रास्ट्रक्चर के प्लानिंग को अगले दशकों तक के लिए आकार देना शुरू कर दिया है।

Coinbase, Ethereum और Ethereum Layer 2 नेटवर्क Optimism, सभी पब्लिकली अपना टाइमलाइन, गवर्नेंस फ्रेमवर्क और माइग्रेशन स्ट्रैटेजी बता रहे हैं ताकि वे पोस्ट-क्वांटम फ्यूचर के लिए तैयार हो सकें। यह Bitcoin के साथ एक बड़ा फर्क दिखाता है, जो अभी भी अपने डिसेंट्रलाइज्ड कोऑर्डिनेशन मॉडल से बंधा हुआ है।

Quantum Countdown शुरू, कौन सा Blockchain बचेगा भविष्य के अटैक से

Coinbase CEO Brian Armstrong ने quantum computing और ब्लॉकचेन सिक्योरिटी के लिए एक इंडिपेंडेंट एडवाइजरी बोर्ड के गठन की घोषणा की है।

इस बोर्ड में क्रिप्टोग्राफी, consensus और quantum computing के लीडिंग रिसर्चर जुड़े हैं, जिनमें Stanford के Dan Boneh, UT Austin के Scott Aaronson, Ethereum Foundation के Justin Drake और EigenLayer के Sreeram Kannan शामिल हैं।

“भविष्य के खतरों के लिए तैयारी करना, चाहे वह कई सालों बाद ही क्यों न आएं, हमारी इंडस्ट्री के लिए बेहद जरूरी है,” Armstrong ने समझाते हुए कहा। इससे साफ है कि Coinbase क्वांटम सिक्योरिटी को एक रणनीतिक ज़रूरत मानता है, सिर्फ एक कयास के तौर पर नहीं।

Ethereum ने Quantum Resistance को एक इंजीनियरिंग और माइग्रेशन चैलेंज के रूप में देखा है। इसका इकोसिस्टम पोस्ट-क्वांटम सिक्योरिटी को एक ठोस प्रॉब्लम मानता है, जिसे टाइमलाइन, हार्ड फोर्क और अकाउंट एब्स्ट्रैक्शन के जरिए सॉल्व किया जा सकता है।

नेटवर्क का पोस्ट-क्वांटम रोडमैप 2036 तक Superchain में ECDSA-बेस्ड Externally Owned Accounts (EOAs) को हटाने का 10 साल का प्लान शामिल करता है।

इस प्लान के तहत, EOAs पोस्ट-क्वांटम स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट अकाउंट्स को की मैनेजमेंट डेलीगेट करेंगे, जिससे यूजर्स को अपने पुराने एड्रेस या बैलेंस छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी, और माइग्रेशन स्मूथली हो जाएगा।

Ethereum यह साफ कह चुका है कि PQ-safe consensus गैर-मोलभाव योग्य है, और पहले ही प्रोटोकॉल व वेलिडेटर दोनों लेवल पर अपग्रेड्स को कोऑर्डिनेट कर रहा है।

Optimism, जो OP Stack पर चलता है, भी वही रास्ता अपना रहा है और तैयारी, कोऑर्डिनेशन और अपग्रेडेबिलिटी पर जोर दे रहा है।

“बड़े स्केल के quantum computers अभी नहीं आए हैं—लेकिन अगर वे आ गए और हम तैयार नहीं हुए, तो Ethereum और Superchain की कोर क्रिप्टोग्राफी रिस्क में आ सकती है,” ऐसा नेटवर्क ने अपने अनाउंसमेंट में बताया।

OP Stack इस तरह डिजाइन किया गया है कि पोस्ट-क्वांटम सिग्नेचर स्कीम्स को प्लग-इन किया जा सके, जिससे हार्ड फोर्क के ज़रिए सिक्योरिटी मिलेगी, न कि किसी जल्दबाजी या हेरोइक्स के जरिए।

Post-quantum coordination चैलेंज पर Bitcoin को लेकर Institutional Capital की प्रतिक्रिया

इंस्टीट्यूसनल इनवेस्टमेंट कम्युनिटी इन घटनाक्रमों पर पहले से ही प्रतिक्रिया दे रही है। BeInCrypto ने पहले रिपोर्ट किया था कि Jefferies के स्ट्रेटेजिस्ट Christopher Wood ने अपने फ्लैगशिप पोर्टफोलियो से 10% Bitcoin allocation कम किया। वो अब अपना कैपिटल Gold और माइनिंग equities में ट्रांसफर कर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि Quantum computing, Bitcoin के ECDSA keys को compromise कर सकता है।

Bitcoin का डिसेंट्रलाइज्ड गवर्नेंस अपग्रेड्स को जटिल बनाता है, यानी Ethereum या Coinbase की तरह कोई सेंट्रल बॉडी नहीं है जो quantum-resistant ट्रांजिशन को कोऑर्डिनेट कर सके।

इस कारण, अब Bitcoin पर लॉन्ग-हॉरिजन existential risk आ गया है, जहां एलोकेशन डिसीजन अब probability के बजाय preparedness को दर्शाने लगे हैं।

अब सवाल सिर्फ “क्रिप्टो बनाम legacy finance” का नहीं है। यह adaptability की परीक्षा है, जिसमें वे चेन आगे रहेंगी जो quantum threats के लिए proactive प्लानिंग करती हैं, जबकि कुछ डिसेंट्रलाइज्ड कोऑर्डिनेशन और धीमे consensus process में बंधी होती हैं।

Coinbase, Ethereum और Optimism इंडस्ट्री का रोडमैप सेट कर रहे हैं, जबकि Bitcoin को कोऑर्डिनेशन की परीक्षा से गुजरना पड़ रहा है। इस परीक्षा का हल आने वाले दशकों तक कैपिटल फ्लो और सिक्योरिटी स्ट्रक्चर को निर्धारित कर सकता है।

जैसे-जैसे quantum computing की capabilities तेज हो रही हैं, वक्त कम होता जा रहा है। अगला दशक यह तय करेगा कि क्रिप्टो post-quantum भविष्य के लिए खुद को एडजस्ट कर पाएगा या दुनिया के सबसे कीमती डिजिटल एसेट्स को जोखिम में छोड़ देगा।

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