कॉपर प्राइस मंगलवार को $6.80 प्रति पाउंड के करीब पहुंच गया, जो सितंबर के अपने रिकॉर्ड से लगभग 2% कम है। अमेरिका में एक और रेट हाइक की आशंका कम होने और चिली में नई माइनिंग रुकावटों ने यह तेजी दिखाई है।
लंदन मेटल एक्सचेंज, जो एक प्रमुख ग्लोबल मेटल्स मार्केट है, उसमें कॉपर प्राइस 0.5% बढ़कर करीब $6.63 प्रति पाउंड हो गया। यह प्राइस 2026 की शुरुआत से लगभग 17% ज्यादा है, जो दिखाता है कि इस साल यह मेटल कितनी तेजी से बढ़ा है।
Fed हाइक की आशंका घटी, रेट को लेकर बाज़ार में बदला माहौल
Federal Reserve (Fed) ने सितंबर में 25 बेसिस पॉइंट्स तक रेट्स बढ़ाए, जो 2023 के बाद उनकी पहली हाइक थी। इस फैसले ने टारगेट रेंज को 3.75%–4.00% तक पहुंचा दिया।
अब ट्रेडर्स को इस महीने एक और बढ़ोतरी की संभावना कम लग रही है। FedWatch डेटा के मुताबिक, 28 अक्टूबर की Fed मीटिंग में रेट्स होल्ड होने की संभावना 80.6% है।
अगर पॉलिसी में पॉज रहता है तो इससे इंडस्ट्रियल मेटल्स पर दबाव कम होगा, क्योंकि उधारी की लागत बढ़ने पर ये मेटल्स अक्सर कमजोर हो जाते हैं। हालांकि, Cleveland Fed President Beth Hammack ने कहा कि 2026 के आखिर तक और हाइक मुमकिन है।
माइनिंग में रुकावट से कॉपर सप्लाई और टाइट
रविवार को चिली के Codelco की El Teniente माइन में एक कीचड़ का भूस्खलन हुआ, जिसमें दो कॉन्ट्रैक्टर वर्कर्स की मौत हो गई। Codelco ने ऑपरेशन को आंशिक रूप से रोक दिया और इसके लिए भारी बारिश को जिम्मेदार बताया।
El Teniente, Codelco की सबसे बड़ी माइन है, और Codelco दुनिया का सबसे बड़ा कॉपर प्रोड्यूसर है। इसी साइट पर जुलाई 2025 में भी छ: माइनर्स की मौत हो गई थी।
इसी दौरान, Escondida, जो दुनिया की सबसे बड़ी कॉपर माइन है, ने सितंबर में कुछ समय के लिए ऑपरेशन रोका था। Antofagasta की Centinela माइन के यूनियन ने कहा है कि उनकी स्ट्राइक नवंबर से प्रोडक्शन पर असर डालेगी।
इंडोनेशिया में, Freeport-McMoRan की Grasberg माइन सामान्य क्षमताके लगभग 67% पर ही चल रही है। पूरी रिकवरी 2027 के आखिर से पहले संभव नहीं मानी जा रही।
इस वजह से, Morgan Stanley को उम्मीद है कि इस साल करीब 600,000 टन कॉपर की डिफिसिट होगी। ऐसी कमी के कारण सितंबर में कॉपर के प्राइस में रिकॉर्ड तेजी आई।
लॉन्ग-टर्म डिमांड भी बुलिश सिचुएशन को मजबूत करती है। Coppernico Metals के CEO Ivan Bebek के मुताबिक, 2040 तक कॉपर की डिमांड 50% तक बढ़ सकती है।
Copper प्राइस फोरकास्ट
पिछले कुछ समय में कॉपर के प्राइस मूवमेंट से साफ है कि तेजी का ट्रेंड अभी जारी रह सकता है, जिसमें $7 प्रति पाउंड अगला बड़ा टारगेट बन रहा है।
जून के अंत से, हर बार जब कॉपर के प्राइस ऊपर जा रहे सपोर्ट लाइन की ओर गिरे, वह वापसी करते रहे हैं। पिछले 100 ट्रेडिंग दिनों का औसत प्राइस भी बड़ी गिरावट रोकने में मददगार रहा है।
दोनों इंडीकेटर्स अब $6.55 को एक अहम लेवल दिखा रहे हैं, जहां से फिर से खरीदार एक्टिव हो सकते हैं।
इधर, कॉपर दोबारा $6.70 के ऊपर आ गया है, जो इस साल की शुरुआत में किसी भी तरह से ब्रेक नहीं हो पा रहा था। अगली चुनौती सितंबर का रिकॉर्ड हाई $6.95 के आसपास है।
अगर कॉपर अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ता है, तो $7 अगला टारगेट हो सकता है, जो मौजूदा लेवल से करीब 3% की तेजी दिखाता है।
कॉपर के प्राइस नीचे क्यों जा सकते हैं?
हालांकि ट्रेंड पॉजिटिव है, लेकिन कुछ संकेत दिखा रहे हैं कि तेजी की रफ्तार कम हो रही है।
कॉपर का Relative Strength Index (RSI), जो खरीद और बिक्री की मोमेंटम दर्शाता है, करीब 55 है। इसका मतलब है कि अभी भी खरीदारों का पलड़ा भारी है, लेकिन अगस्त से मोमेंटम कमजोर पड़ा है।
चार्ट से यह भी सामने आया है कि कॉपर एक संकरा अपवर्ड रेंज में ट्रेड कर रहा है। ऐसे पैटर्न कई बार आने वाले प्राइस करेक्शन का संकेत देते हैं।
अगर प्राइस गिरते हैं, तो $6.55 पहला बड़ा सपोर्ट लेवल है जिस पर नजर रखनी चाहिए। अगर यह लेवल टूटता है, तो कॉपर $6.31 तक आ सकता है।
अगली अहम टेस्टिंग बुधवार, 14 अक्टूबर को होगी, जब US अपनी लेटेस्ट मंदी के आंकड़े जारी करेगा।
अगर उम्मीद से ज्यादा मंदी आती है, तो Federal Reserve पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव आ सकता है, जिससे कॉपर के प्राइस पर असर पड़ेगा। अगर मंदी कम आती है, तो इस डर में राहत मिल सकती है और कॉपर को अपना पिछला रिकॉर्ड चैलेंज करने में मदद मिलेगी।









