CoinGecko के नए डेटा के अनुसार, 2025 में क्रिप्टो मार्केट ने अभूतपूर्व प्रोजेक्ट फेल्योर की लहर देखी, जिसमें एक ही साल में 1.16 करोड़ (11.6 मिलियन) से ज्यादा टोकन फेल हो गए।
यह आंकड़ा 2021 से अब तक दर्ज सभी क्रिप्टोकरेन्सी फेल्योर का 86.3% है, जिससे 2025 टोकन सर्वाइवल के लिहाज से इंडस्ट्री का सबसे विनाशकारी साल बन गया है।
Token creation तेज़ी से बढ़ा, लेकिन टिकाऊपन गिरा, CoinGecko रिपोर्ट में खुलासा
CoinGecko की रिसर्च बताती है कि टोकन इकोनॉमी में बड़े स्तर पर स्ट्रक्चरल ब्रेकडाउन हुआ है, जहां प्रोजेक्ट्स की ताबड़तोड़ लॉन्चिंग, मीम कॉइन सैचूरेशन और हाई मार्केट टर्बुलेंस इसकी वजहें हैं।
कुल मिलाकर, GeckoTerminal पर ट्रैक हो रही 53.2% सभी क्रिप्टोकरेंसी अब इनएक्टिव हो चुकी हैं। इनमें से ज्यादातर फेल्योर पिछले दो सालों में हुए हैं।
2021 से 2025 के बीच, लिस्टेड क्रिप्टोकरेन्सी प्रोजेक्ट्स की संख्या 4,28,383 से बढ़कर करीब 2.02 करोड़ (20.2 मिलियन) पहुंच गई। इस तेज ग्रोथ से टोकन क्रिएशन टूल्स तक बढ़ती पहुंच तो दिखी, लेकिन मार्केट ओवरसैचूरेशन भी हो गया।
हर साल के फेल्योर डेटा से बदलाव की स्केल भी साफ दिखती है। 2021 में सिर्फ 2,584 टोकन फेल हुए थे। 2022 में ये संख्या बढ़कर 2,13,075 और 2023 में 2,45,049 हो गई।
2024 में हालात तेजी से बिगड़े, जब 13,82,010 टोकन क्रैश हो गए। लेकिन 2025 ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए, जब 1,15,64,909 टोकन फेल हो गए।
2024 और 2025 मिलाकर, 2021 के बाद से हुए कुल क्रिप्टो टोकन फेल्योर का 96% से ज्यादा हिस्सा इन्हीं दो सालों में देखा गया। यह दिखाता है कि हाल के मार्केट कंडीशंस ने टोकन सर्वाइवल को पूरी तरह बदल दिया है।
CoinGecko की मेथडोलॉजी ने उन्हीं क्रिप्टोकरेंसी को काउंट किया है, जिनमें कम से कम एक ट्रेड हुआ था और जो GeckoTerminal पर लिस्ट हो कर इनएक्टिव हुई थीं।
जिन टोकन में ट्रेडिंग एक्टिविटी जीरो रही, उन्हें डेटा से बाहर रखा गया। साथ ही, केवल ग्रेजुएटेड Pump.fun टोकन को शामिल किया गया, जिससे डेटासेट की क्रेडिबिलिटी मजबूत हुई।
Q4 2025 में meme coin saturation और “Crime Szn” की मुश्किलों के बीच ब्रेकिंग पॉइंट आया
साल के आखिरी महीनों में गिरावट बहुत तेज़ हो गई। सिर्फ Q4 2025 में ही 7.7 मिलियन टोकन फेल हो गए, जो पाँच सालों में दर्ज कुल गिरावट का 34.9% हिस्सा है।
यह तेज़ गिरावट 10 अक्टूबर की लिक्विडेशन कैस्केड के साथ हुई। इस दौरान 24 घंटे में $19 बिलियन के लीवरेज्ड पोज़िशन्स खत्म हो गए और यह क्रिप्टो इतिहास का सबसे बड़ा सिंगल-डे डीलीवरेजिंग इवेंट बन गया।
इस झटके ने कम ट्रेड वाले टोकन में कमज़ोरियों को उजागर कर दिया, जिनमें से कई:
- पर्याप्त लिक्विडिटी से दूर थे या
- चरम वॉलेटिलिटी में सर्वाइव करने के लिए मार्केट पार्टिसिपेंट्स की कमी थी।
CoinGecko ने नोट किया कि सर्वाइवल क्षमता में तेज़ गिरावट खासतौर पर मीम कॉइन सेक्टर में देखने को मिली, जो साल भर में तेज़ी से बढ़ा था।
ईज़ी-टू-यूज़ लॉन्चपैड्स का बढ़ना इस फेल्यर वेव का बड़ा कारण रहा। Pump.fun जैसे प्लेटफॉर्म्स ने टेक्निकल रुकावटों को काफी हद तक घटा दिया है, जिससे लगभग कोई भी मिनटों में नया टोकन लॉन्च कर सकता है।
इससे एक्सपेरिमेंटेशन तो डेमोक्रेटिक हो गई, लेकिन मार्केट में ऐसे प्रोजेक्ट्स की बाढ़ आ गई जिनमें लॉन्ग-टर्म वायबिलिटी नहीं है।
DWF Labs के एग्जीक्यूटिव Andrei Grachev ने इस माहौल को क्राइम सीजन बताया और फाउंडर्स और इन्वेस्टर्स दोनों पर सिस्टमेटिक दबाव की ओर इशारा किया।
उनकी बातें क्रिप्टो मार्केट्स में चल रही कंसोलिडेशन को दिखाती हैं, जहां पूंजी तेज़ी से Bitcoin, एस्टैब्लिश्ड असेट्स और शॉर्ट-टर्म स्पेक्युलेटिव ट्रेड्स की तरफ शिफ्ट हो रही है। इससे नए प्रोजेक्ट्स के लिए सस्टेनेबल लिक्विडिटी खींचना मुश्किल हो गया है।
2025 में फेल्यर्स की बढ़ी हुई संख्या से टोकन क्रिएशन प्रैक्टिस की लॉन्ग-टर्म सेहत पर चिंता और बढ़ गई है।
क्रिप्टो मार्केट में इनोवेशन बहुत जरूरी है, लेकिन डेटा दिखाता है कि मार्केट की नए प्रोजेक्ट्स को एब्जॉर्ब करने की कैपेसिटी अब काफी ज़्यादा ओवरस्ट्रेच हो चुकी है।
जब लाखों टोकन गायब हो रहे हैं, तब रिटेल का भरोसा भी लगातार गिर रहा है। इससे लिक्विडिटी कम हो जाती है और भविष्य में किसी भी लॉन्च के लिए स्तर और ऊँचा हो जाता है।
Token फेल्यर साइकल 2026 तक बढ़ सकता है क्यों
इधर, 2025 में क्रिप्टो में आयी गिरावट के कारण अब भी वैसी ही बने हुए हैं। टोकन क्रिएशन अब भी फ्रीक्शनलेस है, रिटेल लिक्विडिटी बँटी हुई है और मार्केट का फोकस अब भी Bitcoin, ब्लू-चिप असेट्स और शॉर्ट-टर्म ट्रेड्स पर ही ज़्यादा है।
CoinGecko के डेटा के मुताबिक, टोकन की सप्लाई मार्केट की क्षमता से कहीं तेज़ी से बढ़ रही है। 2025 के अंत तक लगभग 20.2 मिलियन प्रोजेक्ट्स लिस्ट हो चुके होंगे। ऐसे में अगर लॉन्चपैड-ड्रिवन इश्यूअंस की प्रक्रिया थोड़ी भी जारी रहती है, तो 2026 में फेल्योर रेट और बढ़ सकती है। यह खासतौर पर सच है अगर डिमांड और लिक्विडिटी रिकवर नहीं हो पाती।
मार्केट में स्ट्रेस ईवेंट्स भी एक बड़ी वल्नरेबिलिटी बने हुए हैं। 10 अक्टूबर को हुए लिक्विडेशन कैस्केड में 24 घंटे के अंदर $19 बिलियन लीवरेज्ड पोजीशन साफ हो गई थीं। इससे यह साफ हो गया है कि कैसे सिस्टम में अचानक आया शॉक कम ट्रेड होने वाली एसेट्स में तुरंत फैल सकता है।
जिन टोकन्स के पास डीप लिक्विडिटी या कमिटेड यूज़र बेस नहीं था, वे सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए। इससे लगता है कि आगे भी ऐसी वोलैटिलिटी एपिसोड्स से और बड़े पैमाने पर फेल्योर हो सकते हैं।
DWF Labs के मैनेजिंग पार्टनर Andrei Grachev ने चेतावनी दी है कि मौजूदा माहौल नए प्रोजेक्ट्स के लिए स्ट्रक्चरल रूप से अनुकूल नहीं है और उन्होंने इसे क्रिप्टो मार्केट्स में चल रही “लिक्विडिटी वॉर्स” बताया।
जैसे-जैसे रिटेल कैपिटल कम होता जा रहा है और कॉम्पिटिशन तेज़ हो रहा है, नए टोकन्स के लिए सर्वाइव करना और मुश्किल होता जा रहा है। अगर लॉन्च इंसेंटिव्स, डिस्क्लोज़र स्टैंडर्ड्स या इन्वेस्टर एजुकेशन में बदलाव नहीं होते, तो मार्केट को वही पुराना चक्र फिर से देखने को मिल सकता है: तेज़ इश्यूअंस, छोटी अवधि की स्पेकुलेशन और अंत में तेजी से गिरावट।
इंडस्ट्री के कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सेल-ऑफ़ वीक प्रोजेक्ट्स को हटाकर क्रिप्टो को मजबूती दे सकता है, लेकिन डेटा दिखाता है कि यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
अगर टोकन क्रिएशन लिक्विडिटी ग्रोथ से आगे बढ़ती रही, तो 2026 में लॉन्च कम हो सकते हैं, लेकिन फेल्योर की संख्या जरूरी नहीं कि घटे।