हाल ही में हुई OKX सर्वे के अनुसार, सेंट्रलाइज़्ड प्लेटफॉर्म्स ट्रेडिंग एक्टिविटी में अभी भी डोमिनेट कर रहे हैं, जिसमें 52% प्रतिभागी सिर्फ इन्हीं का इस्तेमाल करते हैं।
खास बात यह है कि रिसर्च में यह सामने आया कि क्रिप्टो का अगला फेज ना पूरी तरह सेंट्रलाइज़्ड होगा और ना पूरी तरह डिसेंट्रलाइज़्ड। इसे ऐसे इन्फ्रास्ट्रक्चर पर डेवलप किया जाएगा जिसमें दोनों की पॉजिटिव क्वालिटीज़ शामिल होंगी।
OKX को US क्रिप्टो यूज़र्स में CeDeFi की डिमांड तेजी से बढ़ती दिखी
OKX ने 1,000 एक्टिव यूएस ट्रेडर्स से यह जानने के लिए सर्वे किया कि मार्केट पार्टिसिपेंट्स ऑन-चेन ट्रेडिंग को कैसे अपनाते हैं और किस तरह की कंडीशंस बड़े पैमाने पर पार्टिसिपेशन को बढ़ा सकती हैं। जहां आधे से ज्यादा लोगों ने सिर्फ सेंट्रलाइज़्ड प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल किया, वहीं बाकी 48% ने सेंट्रलाइज़्ड और डिसेंट्रलाइज़्ड टूल्स दोनों यूज़ किए।
जब सीडीफाई मॉडल (सेंट्रलाइज़्ड एक्सचेंज + ऑन-चेन execution) पेश किया गया, तो 90% से ज्यादा यूज़र्स ने इस कॉन्सेप्ट को पॉजिटिव माना। साथ ही, एक तिहाई से ज्यादा लोग मानते हैं कि ऑन-चेन मार्केट्स में एंट्री के लिए सेंट्रलाइज़्ड एक्सचेंज ही प्राइमरी गेटवे रहेंगे।
“इन फाइंडिंग्स से पता चलता है कि यूजर्स सेंट्रलाइज़्ड प्लेटफॉर्म्स को छोड़ना नहीं चाहते। इसके बजाय, वे उम्मीद करते हैं कि ये प्लेटफॉर्म्स सीडीफाई जैसे टूल्स के साथ एडवांस होकर सेंट्रलाइज़्ड और डिसेंट्रलाइज़्ड मार्केट्स के बीच ब्रिज बनाएं,” OKX ने कहा।
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रिपोर्ट से यह भी पता चला कि यील्ड जेनेरेटिंग स्ट्रैटेजी on-chain एक्टिविटी में एंट्री के लिए “मीनिंगफुल एंट्री पॉइंट” हैं। 65% से ज्यादा लोग कभी-कभार स्टेबलकॉइन पर यील्ड कमाने के लिए ऑन-चेन टूल्स का यूज़ करते हैं, वहीं एक तिहाई से ज्यादा लोग रेगुलर ऐसा करते हैं।
सबसे कॉमन अप्रोचेज़ में शामिल हैं:
- स्टेबलकॉइन पूल्स में लिक्विडिटी प्रोवाइड करना सबसे पॉपुलर है, जिसमें लगभग 40% लोगों ने इंट्रेस्ट दिखाया।
- सेंट्रलाइज़्ड प्लेटफॉर्म्स पर स्टेबलकॉइन staking करना, लगभग 36% लोगों ने चुना।
- डिसेंट्रलाइज़्ड फाइनेंस (DeFi) प्रोटोकॉल्स के जरिए लेंडिंग करना भी हर पांच में से एक यूज़र को अट्रैक्ट करता है।
“यील्ड एक्टिविटी से पता चलता है कि जब opportunity क्लियर हो और risk मेनेज किया जा सके, तो यूज़र्स ऑन-चेन में भी इन्वॉल्व होना पसंद करते हैं। यह एक्टिविटी सेंट्रलाइज़्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर और डिसेंट्रलाइज़्ड मार्केट्स के बीच एक ब्रिज का काम करती है,” रिपोर्ट में लिखा गया।
क्रिप्टो ट्रेडर्स कौन से काम ऑटोमेट करना चाहते हैं
कस्टडी और कंट्रोल के मामले में, 51% उत्तरदाताओं का कहना है कि वे ट्रेडिंग के अधिकांश हिस्से को खुद मैनेज करना चाहते हैं, जिसमें execution के लिए कुछ automation भी शामिल हो। वहीं, 38% लोग पूरी तरह से व्यक्तिगत जिम्मेदारी लेना पसंद करते हैं।
सिर्फ 8% लोग execution को डेलीगेट करते हुए रणनीतिक (strategic) फैसले खुद लेना चाहते हैं, और केवल 2% ही ऐसे हैं जो न्यूनतम भागीदारी के साथ सहज हैं।
Automation की डिमांड भी बढ़ रही है, यूजर्स इसके लिए काफी openness दिखा रहे हैं। सर्वे में जवाब देने वालों को बेस्ट-प्राइस रूटिंग (24%), scam detection (21%), और ट्रेड execution टाइमिंग optimization (16%) जैसे फीचर्स में सबसे ज्यादा दिलचस्पी है।
“डेटा बताता है कि automation को बड़े स्तर पर तब एक्सेप्ट किया जाता है जब यह performance बढ़ाए, risk को कम करे, और ऑन-चेन एक्सपीरियंस को आसान बनाए,” OKX ने लिखा।
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ऑन-चेन रुकावटों में Security और Scam का डर सबसे ज्यादा
OKX ने यह भी पाया कि सिक्योरिटी को लेकर चिंता एडॉप्शन के लिए एक बड़ा रोडब्लॉक बनी हुई है। लगभग 29% उत्तरदाताओं ने scams और सिक्योरिटी रिस्क्स को ऑन-चेन पार्टिसिपेशन में सबसे बड़ी अड़चन बताया।
वहीं, 22% ने अनप्रेडिक्टेबल फीस और प्राइसिंग को मुद्दा बताया। लगभग आधे यूजर्स को उम्मीद है कि प्लेटफार्म्स एक्टिव होकर scams रोकने में मदद करें।
अन्य चुनौतियों में मल्टीपल वॉलेट्स को हैंडल करना, चेन के बीच एसेट्स ब्रिज करना और अनजाना इंटरफेस शामिल हैं। इन सभी वजहों से ट्रेडर्स को लगता है कि ऑन-चेन ट्रेडिंग ऑपरेशनल लेवल पर काफी डिमांडिंग है, चाहे वे अनुभवी क्यों न हों।
“एक्टिव ट्रेडर्स ऑन-चेन एक्सेस में काफी रुचि दिखा रहे हैं, बशर्ते इसमें सुरक्षा, बेहतर execution और आसान वर्कफ्लो शामिल हों। ऐसे प्लेटफार्म्स, जो सेंट्रलाइज्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ ऑन-चेन execution को जोड़ते हैं, वो मौजूदा यूजर एक्सपेक्टेशंस से मेल खाते हैं,” रिपोर्ट में कहा गया।
कुल मिलाकर, सर्वे में यह संकेत मिला है कि क्रिप्टो मार्केट का अगला स्टेज फ्रैगमेंटेशन के बजाय ज्यादा integration से आगे बढ़ेगा।