एक कम-ज्ञात DeFi यील्ड टोकन ने क्रिसमस डे पर मार्केट्स को चौंका दिया, जब ज्यादातर क्रिप्टो एसेट्स ने शांति से ट्रेडिंग की। Beefy Finance का BIFI टोकन 24 घंटों में 200% से ज्यादा बढ़ गया, मार्केट डेटा के अनुसार एक समय के लिए $400 के लेवल को छू गया, फिर थोड़ी देर बाद ठंडा पड़ गया।
इस तेजी ने BIFI को 25 दिसंबर को पूरे क्रिप्टो मार्केट के टॉप गेनर्स में शामिल कर दिया, जबकि प्रोटोकॉल या इकोसिस्टम में कोई बड़ी घोषणा नहीं हुई थी।
BIFI Token क्या है
BIFI Beefy Finance का गवर्नेंस और रेवेन्यू-शेयरिंग टोकन है, जो DeFi के सबसे पुराने यील्ड एग्रीगेटर्स में से एक है।
Beefy ऑटोमेटेड “वॉल्ट्स” अलग-अलग ब्लॉकचेन पर ऑपरेट करता है, जो लिक्विडिटी पूल्स और स्टेकिंग स्ट्रैटेजीज़ से रिवॉर्ड्स को कंपाउंड करता है। यूज़र्स फंड्स पर अपनी कस्टडी बनाए रखते हैं और कभी भी विदड्रॉ कर सकते हैं।
कई DeFi टोकन के मुकाबले BIFI में सिर्फ 80,000 टोकन की हार्ड-कैप्ड सप्लाई है, जिसमें कोई मिंट या बर्न मैकेनिज़्म नहीं है। सभी टोकन पहले से ही सर्क्युलेशन में हैं।
BIFI को स्टेक करने वाले होल्डर वॉल्ट फीस से जनरेट होने वाली प्रोटोकॉल रेवेन्यू का हिस्सा पाते हैं और DAO गवर्नेंस में भाग ले सकते हैं। इस डिज़ाइन की वजह से BIFI यील्ड-लिंक्ड गवर्नेंस एसेट है, सिर्फ यूसफुलिटी टोकन नहीं।
Christmas Day पर BIFI में जबरदस्त उछाल क्यों आया
यह रैली नए फंडामेंटल्स की वजह से नहीं, बल्कि मार्केट स्ट्रक्चर की वजह से आई।
सबसे पहले, BIFI की अल्ट्रा-लो सप्लाई ने क्लासिक सप्लाई शॉक पैदा किया। सिर्फ 80,000 टोकन मार्केट में होने से हल्की खरीदारी भी प्राइस को तेजी से ऊपर ले जा सकती है।
क्रिसमस डे पर, डिमांड इतनी तेज़ थी कि पतले ऑर्डर बुक्स में भारी दबाव आ गया।
दूसरी बात, इस टोकन ने लम्बे समय से साइडवेज़ ट्रेडिंग के बाद ब्रेकआउट किया। जैसे ही BIFI ने महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस लेवल्स को पार किया, मोमेंटम ट्रेडर्स और एल्गोरिदमिक स्कैनर इसमें शामिल हो गए, जिससे प्राइस मूवमेंट तेज़ हो गई।
इसी दौरान, BIFI का 24-घंटे का ट्रेडिंग वॉल्यूम थोड़े समय के लिए उसके मार्केट कैप से भी ज्यादा हो गया, जो कि आर्गेनिक असेम्पलेशन के बजाय इंटेंस शॉर्ट-टर्म स्पेक्युलेशन का संकेत है। इस असंतुलन ने वोलैटिलिटी को और ज़्यादा बढ़ा दिया।
आखिर में, यह रैली फिर से DeFi यील्ड नैरेटिव्स में रोटेशन के साथ देखी गई। जब दिसंबर के आखिर में मीम कॉइन्स का क्रेज़ कम हुआ, तब ट्रेडर्स ने रेवेन्यू जेनेरेट करने वाले प्रोटोकॉल्स में एक्सपोज़र लेना शुरू किया।
Beefy, अपनी मल्टीचैन प्रेजेंस और वर्षों से चल रहे ऑपरेशन्स के साथ, इसी कैटेगरी में आता है।
सबसे जरूरी बात ये है कि क्रिसमस की ये तेजी अचानक से Beefy की रेवेन्यू, वॉल्ट परफॉर्मेंस या गवर्नेंस स्ट्रक्चर में बदलाव के कारण नहीं थी।
बल्कि, उसने दिखाया है कि जहां लिक्विडिटी कम होती है, वहां DeFi गवर्नेंस टोकन में एक्सट्रीम प्राइस स्विंग्स देखी जा सकती है जब मार्केट में मोमेंटम बढ़ने लगता है।
BIFI की स्ट्रक्चर उसे डिमांड स्पाइक्स के लिए सेंसिटिव बनाती है, लेकिन यही मैकेनिज्म उल्टा भी काम कर सकता है। जब स्पेक्युलेटिव फ्लोज़ कम हो जाएं, तो तेज़ करेक्शन का जोखिम हमेशा रहता है।