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युवा अमेरिकन, Baby Boomers के मुकाबले 5 गुना ज्यादा क्रिप्टो पर भरोसा करते हैं, OKX सर्वे में खुलासा

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Kamina Bashir

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Harsh Notariya

21 जनवरी 2026 14:00 UTC
  • Gen Z और Millennials को क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स पर Boomers से लगभग पाँच गुना ज्यादा भरोसा
  • युवा यूज़र्स में बढ़ा भरोसा, क्रिप्टो ट्रेडिंग बढ़ाने का प्लान
  • Boomers को banks और रेग्युलेशन पसंद, युवा मानते हैं crypto है फाइनेंस का future

एक नए OKX सर्वे के अनुसार, अमेरिका के युवा, खासकर Gen Z और Millennials, क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स पर पुराने जेनरेशन यानी Baby Boomers की तुलना में पांच गुना ज्यादा भरोसा करते हैं।

जनवरी 2026 में किए गए इस सर्वे में 1,000 अमेरिकी लोगों से राय ली गई थी। इसमें देखा गया कि डिजिटल एसेट्स और पारंपरिक फाइनेंस को लेकर अलग-अलग जेनरेशन की सोच में गैप और गहरा हो रहा है।

OKX के सर्वे में सामने आया कि Gen Z के 40% और Millennials के 41% लोगों ने क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स पर हाई ट्रस्ट जताया, यानी 10 में से 6 या उससे ज्यादा स्कोर दिए। इसके मुकाबले सिर्फ 9% Boomers ने ही इतनी कॉन्फिडेंस दिखाई।

Different Generations' Trust in Crypto Platforms
अलग-अलग जेनरेशन का क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स पर ट्रस्ट। स्रोत: OKX

यह फर्क और ज़्यादा समझ आता है जब इसे पारंपरिक बैंकों पर ट्रस्ट से तुलना करते हैं। करीब 74% Boomers पारंपरिक फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशंस को हाई ट्रस्ट स्कोर देते हैं, यानी क्रिप्टो की तुलना में आठ गुना ज्यादा भरोसा। 

युवाओं में बैंकों को लेकर शक और ज्यादा है। Gen Z के 22% और Millennials के 21% लोगों ने पारंपरिक बैंकों पर लो ट्रस्ट बताया।

“युवाओं के लिए पारंपरिक फाइनेंशियल सिस्टम उनके मां-बाप की जेनरेशन की चीज़ लगती है। Gen Z और यंग Millennials ने डिजिटल वर्ल्ड में बचपन बिताया है। उनके लिए डिजिटल एसेट इकोसिस्टम में कम्फर्टेबल होना नेचुरल है,” Haider Rafique, Global Managing Partner, OKX ने BeInCrypto को बताया।

डेटा से साफ है कि युवा लोगों का कॉन्फिडेंस सिर्फ ज्यादा नहीं, बल्कि लगातार बढ़ भी रहा है। जनवरी 2025 की तुलना में, 36% Gen Z और 34% Millennial ने माना कि बीते साल में उनका ट्रस्ट क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स में बढ़ा है। 

Boomers के बीच यह सेंटिमेंट ज्यादा पॉजिटिव नहीं था। सिर्फ 6% ने ही ट्रस्ट बढ़ने की बात कही। वहीं, 49% Boomers ने बताया कि उनका ट्रस्ट वैसा ही बना हुआ है।

आखिर ये भरोसा किस वजह से आ रहा है? क्या ये खुद के एक्सपीरियंस से बन रहा है या सोशल मीडिया, दोस्तों और कंटेंट क्रिएटर्स जैसी कम्युनिटी का असर है? Rafique ने कहा कि दोनों वजहें मायने रखती हैं, लेकिन युवा यूजर्स के लिए इसका इम्पैक्ट अलग तरह से होता है।

उन्होंने बताया कि युवाओं के लिए सोशल मीडिया इनफॉर्मेशन का नैचुरल एंट्री पॉइंट है — जैसे कस्टमर सपोर्ट, यूजर एक्सपीरियंस या फिर क्रेडिबिलिटी चेक करना हो। जब कोई प्रॉब्लम आती है, या कुछ नया जानना हो, या ऑनलाइन ट्रस्टेड वॉयस को देखना हो, तो वे सबसे पहले सोशल प्लेटफॉर्म्स की ओर ही जाते हैं।

“सच्चा विश्वास तभी बनता है जब खुद अनुभव किया जाए। Gen Z के व्यवहार में ये बड़ा बदलाव है – ये लोग हर चीज़ को खुद बार-बार इस्तेमाल करके ही भरोसा करते हैं। खासकर डिजिटल एसेट्स में, लॉयल्टी हर एक स्मूद ट्रांजैक्शन के साथ ही बनती है,” उन्होंने जोड़ा।

आधे Gen Z और Millennials को क्रिप्टो का भविष्य नजर आता है

ये बढ़ता कॉन्फिडेंस अब एक्शन में भी दिख रहा है। इस साल, 40% Gen Z और 36% Millennial अपनी क्रिप्टो ट्रेडिंग एक्टिविटी बढ़ाने का प्लान बना रहे हैं। वहीं सिर्फ 11% Boomers का यही कहना है – यानी यंग जनरेशन अपने सीनियर्स से करीब चार गुना ज्यादा बुलिश है।

हर जेनरेशन का ट्रस्ट क्या कारणों से बना है – इसमें भी फर्क दिखता है। Gen Z, Millennials, और Gen X के लिए प्लेटफार्म सिक्योरिटी सबसे जरूरी वजह है, जिसे क्रमशः 59%, 50% और 54% ने महत्व दिया।

वहीं Boomers में रेग्युलेशन और लीगल प्रोटेक्शन सबसे अहम है, 65% ने इसे अपनी सबसे बड़ी चिंता माना है।

क्रिप्टो को लेकर यंग यूज़र्स में जो शंकाएं हैं, उनमें सबसे बड़ी रुकावट इसकी जटिलता है – ये बात Rafique ने कही।

“Gen Z फिनटेक ऐप्स के साथ बड़ी हुई है जहां सब कुछ आसान लगता है। क्रिप्टो अकसर ऐसा महसूस कराता है जैसे किसी को पावर टूल्स पकड़ा दिए और कह दिया – खुद देख लो। नेविगेशन कन्फ्यूजिंग है, छुपे हुए कॉस्ट हैं, और सब जगह जार्गन। यहां तक कि छोटी सी गलती भी असली पैसे का नुकसान करवा सकती है,” उन्होंने कहा।

इसी दौरान जेनरेशन गैप लॉन्ग-टर्म फाइनेंस की सोच में भी साफ दिखता है। 52% Gen Z और 50% Millennials मानते हैं कि क्रिप्टो आगे चलकर ट्रेडिशनल फाइनेंस को टक्कर देगा या उससे आगे निकल जाएगा।

Boomers में सिर्फ 28% ही ऐसी सोच रखते हैं। इसके अलावा, 71% को पूरा भरोसा है कि आने वाले सालों तक बैंक ही फाइनेंशियल सिस्टम की रीढ़ बने रहेंगे।

“युवा पीढ़ियां क्रिप्टो को ज्यादा अवसरों तक पहुंचने का रास्ता मानती हैं और ट्रेडिशनल वेल्थ बनाने में जो सीमाएं हैं, उसके खिलाफ एक हेज समझती हैं,” रिपोर्ट में कहा गया।

क्रिप्टो की उपयोगिता पर भी पीढ़ियों के विचार अलग हैं। करीब आधे Boomers ने कहा कि क्रिप्टो ट्रेडिशनल फाइनेंस से बेहतर कोई समस्या हल नहीं करता। वहीं Gen Z में सिर्फ 6% ने इससे सहमति जताई। रिपोर्ट के मुताबिक,

“युवा यूजर्स लगातार प्रैक्टिकल फायदों को गिनाते हैं जो एक डिजिटल-फर्स्ट वर्ल्ड के लिए काफी मायने रखते हैं – जैसे असली 24/7 एक्सेस, बॉर्डरलेस ट्रांसफर और ऐसी फ्लेक्सिबिलिटी जो पुराने सिस्टम से कभी मिल ही नहीं सकती। इन्हीं वजहों से एडॉप्शन बढ़ा है और युवाओं में सशक्तिकरण की फीलिंग आई है, क्योंकि वे इंस्टेंट और हमेशा चालू रहने वाले फाइनेंशियल टूल्स की उम्मीद के साथ बड़े हुए हैं।”

डाटा से पता चलता है कि युवा यूजर्स क्रिप्टो को सिक्योर, इनोवेटिव और फ्यूचर के लिए जरूरी मानने लगे हैं। वहीं पुराने लोग डिजिटल एसेट्स को रिस्क और अनिश्चितता से जोड़ते हैं।

असल में ये ट्रस्ट गैप किसी बंदिश जैसा नहीं, बल्कि दिखाता है कि क्रिप्टो का मोमेंटम किस दिशा में है। एडॉप्शन और ग्रोथ उन्हीं जेनरेशन से आएगी, जिसे इस टेक्नोलॉजी पर सबसे ज्यादा भरोसा है।

“याद है जब Facebook को समझना बुजुर्गों के लिए मुश्किल था? अब पूरी प्लेटफॉर्म ही Boomers से भरी है। डिजिटल एसेट इकोनॉमी में भी ऐसा ही pattern देखने को मिलेगा,” Rafique ने कहा।

कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट साफ तौर पर बताती है कि वित्तीय भरोसे में जेनेरेशन शिफ्ट हो रही है। जैसे-जैसे युवा यूज़र digital प्लेटफॉर्म्स और hands-on experience के ज़रिए ज्यादा कॉन्फिडेंट हो रहे हैं, वैसे-वैसे वो क्रिप्टो एडॉप्शन की दिशा तय कर रहे हैं। दूसरी तरफ, बड़ी उम्र के लोग अभी भी पारंपरिक बैंकिंग model से जुड़े हुए हैं।

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