इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) का कहना है कि टैरिफ्स ट्रेड गैप्स को सही तरीके से दूर नहीं करते। इनका असर बहुत कम और अनियमित रहता है।
इस बीच, ग्लोबल करंट अकाउंट असंतुलन फिर से बढ़ रहे हैं। यह देशों के बीच बढ़ती आर्थिक तनाव की तरफ इशारा करता है। क्रिप्टो के लिए, ये बातें मायने रखती हैं। जब ट्रेड टेंशन बढ़ती है और पॉलिसी टूल्स कमजोर पड़ते हैं, तब कैपिटल अक्सर Bitcoin जैसे अल्टरनेटिव एसेट्स की ओर शिफ्ट हो जाता है।
IMF की प्रमुख बातें
एक नई पॉलिसी पेपर में, IMF के रिसर्चर्स Pierre-Olivier Gourinchas और Christian Mumssen ने ग्लोबल असंतुलन के कारणों का विश्लेषण किया है।
इनका निष्कर्ष साफ है: पारंपरिक मैक्रोइकोनॉमिक पॉलिसियां ही करंट अकाउंट असंतुलन को एड्रेस करने के लिए मुख्य साधन बनी रहती हैं। वहीं दूसरी ओर, टैरिफ्स और इंडस्ट्रियल पॉलिसी का असर बहुत सीमित और अक्सर उल्टा साबित होता है।
IMF के मुताबिक, टैरिफ्स करंट अकाउंट में सुधार सिर्फ दुर्लभ परिस्थितियों में, वो भी जब ये टेंपरेरी हों, करते हैं। लेकिन ज्यादातर टैरिफ्स को हमेशा के लिए लगाया जाता है या फिर इससे पलटवार होता है।
इसका नतीजा यह होता है कि लोग अपनी सेविंग व्यवहार में बदलाव नहीं करते और करंट अकाउंट में खास फर्क नहीं पड़ता।
पेपर में चेतावनी दी गई है कि “असंतुलन बढ़ने पर अक्सर फाइनेंशियल क्राइसेस या अचानक पूंजी बहाव (capital flows) पलटने जैसे हालात बनते हैं।”
मजेदार तथ्य: IMF ने नोट किया है कि टैरिफ्स बढ़ाने से करंट अकाउंट पोजीशन पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, लेकिन सभी क्षेत्रों में आउटपुट में गिरावट आती है। यानी सभी का नुकसान!
क्रिप्टो के लिए क्यों जरूरी है?
IMF का विश्लेषण स्ट्रक्चरल अस्थिरता की तस्वीर दिखाता है। इसी वजह से कुछ खास क्रिप्टो-रिलेवेंट डाइनैमिक्स उभरते हैं:
- $ प्रेशर: US में भारी फिस्कल घाटा और कंज्यूमर खर्च जारी है। कमजोर फिस्कल पोजीशन लॉन्ग-टर्म में $ पर भरोसे को कम कर सकती है, जिससे Bitcoin जैसी वैल्यू स्टोर की डिमांड बढ़ सकती है।
- स्टेबलकॉइन डिमांड: जब ग्लोबल ट्रेड टेंशन और बैकग्राउंड में असंतुलन बना रहता है, तब बिजनेस क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन के लिए stablecoin का इस्तेमाल बढ़ा सकते हैं। USD-पेग्ड stablecoin से $ एक्सपोजर तो मिलता है, लेकिन बैंकिंग सिस्टम पर डिपेंडेंस नहीं रहती।
- सेफ हेवन नैरेटिव: IMF ने सीधे-सीधे फाइनेंशियल क्राइसिस की चेतावनी दी है। इतिहास गवाह है कि ऐसी चेतावनियों के बाद इन्वेस्टर्स अक्सर ऐसे एसेट्स की तरफ भागते हैं, जो दूसरे एसेट्स से जुड़े नहीं होते।
आउटलुक
IMF ने “सिंक्न्रोनाइज़्ड एडजस्टमेंट” यानि देशों के मिलकर कदम बढ़ाने की सलाह दी है। लेकिन ऐसा कोऑर्डिनेशन अब तक हासिल नहीं हो पाया है। जब मिलजुल कर एक्शन नहीं होता, तब मार्केट पार्टिसिपेंट्स अपने-अपने तरीके से हल ढूंढते हैं।
IMF की चेतावनी साफ है: वैश्विक असंतुलन बढ़ रहे हैं, टैरिफ्स इन्हें नहीं सुधार पाएंगे, और अगर अव्यवस्थित तरीके से सुधार हुआ तो यह “बेहद महँगा” साबित हो सकता है।
क्रिप्टो मार्केट्स के लिए, यह मैक्रो बैकड्रॉप रिस्क और मौके दोनों लाता है। जब ट्रेडिशनल पॉलिसी टूल्स असर दिखाने में फेल रहते हैं, ऐसे में क्रिप्टो के एक विकल्प फाइनेंशियल लेयर के तौर पर मजबूत होने की वजह मिलती है।