सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच, आज ईरान में लगभग पूरी इंटरनेट ब्लैकआउट ने Bitcoin माइनिंग के लिए एक चुपचाप लेकिन अहम सवाल खड़ा किया है।
यह ब्लैकआउट Bitcoin के लिए कोई सिस्टमेटिक खतरा नहीं है। लेकिन यह एक नाजुक इंटरसेक्शन को उजागर करता है जो ज्यादातर निवेशक नजरअंदाज कर देते हैं: जियोपॉलिटिक्स, एनर्जी पॉलिसी और हैशपावर कंसेंट्रेशन।
ईरान की Bitcoin माइनिंग इंडस्ट्री पर बड़ा खतरा
ईरान में अधिकारियों ने जैसे-जैसे देशभर में प्रदर्शन तेज हुए, इंटरनेट एक्सेस को कड़ा कर दिया। मॉनिटरिंग ग्रुप्स ने बताया कि खासकर मोबाइल नेटवर्क्स पर लगभग पूरी तरह इंटरनेट बंद कर दिया गया।
पहली नजर में ये एक पॉलिटिकल स्टोरी लग सकती है। लेकिन ईरान कभी एक अहम (अब डोमिनेंट नहीं) Bitcoin माइनिंग हब रह चुका है। यही कड़ी इस ब्लैकआउट को ईरान की सीमाओं से आगे भी जरूरी बना देती है।
ईरान का योगदान ग्लोबल Bitcoin हैशरेट में कम सिंगल-डिजिट प्रतिशत के आसपास है। 2021 के पीक से ये काफी गिर चुका है, लेकिन अब भी इतना है कि इसका असर पड़ सकता है।
सस्ती, सब्सिडी वाली एनर्जी ने ईरान को माइनिंग के लिए आकर्षक बना दिया। सैंक्शन्स की वजह से इंडस्ट्री का बड़ा हिस्सा अंडरग्राउंड चला गया। बार-बार की कार्रवाई की वजह से कई ऑपरेशन्स इनफॉर्मल या सेमी-लीगल रह गए।
जरूरी बात ये है कि ईरान Bitcoin के लिए क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है। अब नेटवर्क किसी एक देश पर निर्भर नहीं करता। लेकिन ईरान का योगदान अब भी कम नहीं है।
Internet blackout से क्या Bitcoin माइनिंग रुक जाती है
सीधे तौर पर असर नहीं पड़ता। ज्यादातर इंडस्ट्रियल माइनिंग फॉर्म्स स्टेबल एनर्जी और कभी-कभी मिलती कनेक्टिविटी पर निर्भर करते हैं, हाई-बैंडविड्थ इंटरनेट की जरूरत नहीं होती।
हर दस मिनट में ब्लॉक्स ग्लोबली ट्रांसफर होते हैं, और माइनर्स लिमिटेड एक्सेस के बावजूद भी काम कर सकते हैं।
लेकिन, लंबा या अनस्टेबल कनेक्शन होने पर परेशानी बढ़ती है:
- पूल कोऑर्डिनेशन मुश्किल हो जाता है
- फर्मवेयर अपडेट्स और पेमेन्ट्स लेट हो सकते हैं
- छोटे या गैरकानूनी माइनर्स को ज्यादा डाउनटाइम का रिस्क होता है
सिंपल भाषा में कहें, तो इस ब्लैकआउट से ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ जाती है, माइनिंग रातों-रात बंद नहीं होती।
अगर ईरान में पूरी तरह से आउटेज हो भी जाता है, तो भी इससे ग्लोबल हैशरेट का 5% से भी कम हिस्सा निकलेगा। Bitcoin की डिफिकल्टी अपने आप एडजस्ट हो जाती है। पूरी नेटवर्क इस झटके को आसानी से संभाल लेता है।
हालांकि, अगर अशांति बढ़ती है और एनर्जी रेशनिंग फिर से शुरू होती है, तो ईरान आधारित माइनर्स को लंबी अवधि के शटडाउन का सामना करना पड़ सकता है। इससे हैशपावर थोड़ी टाइट हो जाएगी, लेकिन चेन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि Bitcoin ने चीन के 2021 माइनिंग बैन को झेला था, जिससे 40% से ज्यादा हैशरेट हट गई थी। ईरान की स्थिति इस मुकाबले बहुत छोटी है।
Iran के संकट से Bitcoin को फायदा या नुक़सान?
इसके असर दोनों तरफ होते हैं।
एक तरफ, जियोपॉलिटिकल अस्थिरता Bitcoin के डिसेंट्रलाइजेशन के नैरेटिव को मजबूत करती है। कोई भी स्टेट पूरी नेटवर्क को बंद नहीं कर सकता। हैशपावर ट्रांसफर होती रहती है। सिस्टम खुद को एडॉप्ट करता है।
दूसरी तरफ, बार-बार की क्राइसिस एक असली रिस्क दिखाती है। हैशपावर सस्ती एनर्जी को फॉलो करती है, जो अक्सर राजनीतिक रूप से कमजोर क्षेत्रों में होती है। इसके चलते बॉर्डर पर वोलैटिलिटी आ जाती है।
मार्केट के लिए, ईरान का ब्लैकआउट स्ट्रक्चरल कम और सिंबॉलिक ज्यादा है। यह लचीलापन दर्शाता है, कमजोरी नहीं।
असली स्टोरी सिर्फ ईरान नहीं है। असली बात है ग्लोबल माइनिंग का रिपोजिशनिंग।
जैसे-जैसे राजनीतिक रूप से रिस्की रीजन माइनिंग में आते-जाते रहते हैं, हैशपावर रेग्युलेटेड और एनर्जी-रिच जूरिस्डिक्शन की ओर शिफ्ट होता जा रहा है। ईरान की भूमिका कम होती जा रही है, बढ़ नहीं रही।
यह ब्लैकआउट लोकल माइनर्स को डिस्टर्ब कर सकता है। लेकिन Bitcoin को कोई थ्रेट नहीं है। लेकिन यह इनवेस्टर्स को याद दिलाता है कि असली लॉन्ग-टर्म रिस्क एनर्जी पॉलिसी, जियोपॉलिटिक्स और माइनर्स की एडॉप्शन कैपेसिटी में है।