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यूरोप के नए क्रिप्टो नियमों से प्रैक्टिकल बदलाव क्या होंगे

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Danijela Tomić

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Shilpa Lama

09 जनवरी 2026 04:08 UTC

यूरोप की क्रिप्टोकरेन्सी इंडस्ट्री अब उन नियमों का वास्तविक असर महसूस करने लगी है, जो अभी तक सिर्फ कागजों पर थे। European Union (EU) का Markets in Crypto-Assets (MiCA) फ्रेमवर्क, जो अपने तरह का पहला है, अब सदस्य देशों में लागू हो रहा है।

यह कदम उन पिछले वर्षों की तेज ग्रोथ और कुछ गिनी-चुनी असफलताओं के बाद आया है, जिसने स्पष्ट नियमों और मजबूत सुरक्षा की जरूरत को दिखाया। अब MiCA लागू होने के साथ, क्रिप्टो एसेट्स यूरोप के ज्यादातर हिस्सों में अब लीगल ग्रे ज़ोन में नहीं हैं, बल्कि तय और अनुमानित नियमों के तहत आ गए हैं।

इंवेस्टर्स के लिए MiCA ज्यादा सुरक्षा और पारदर्शिता देने के लिए है। वहीं क्रिप्टो प्रोजेक्ट्स, exchanges और startups के लिए यह बताता है कि डिजिटल एसेट्स को कैसे जारी, मैनेज और मार्केट में लाया जाए। 

MiCA की पहुँच काफी वाइड है। यह ज्यादा तर उन क्रिप्टो-एसेट्स पर लागू होता है, जो पहले से ही EU के Markets in Financial Instruments Directive (MiFID II) जैसे परंपरागत फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स के नियमों के तहत नहीं आते। आसान भाषा में कहें तो, ऐसे टोकन जो सिक्योरिटी जैसे नहीं दिखते या एक्ट नहीं करते, उन पर MiCA लागू होता है।

MiCA के तहत Stablecoins को खास तवज्जो दी गई है। उनके इश्यूअर्स से अपेक्षा की जाती है कि वे जितनी संपत्ति का दावा करते हैं, उतनी होल्ड भी करें, यूजर्स के लिए टोकन रिडीम करना आसान रखें और फाइनेंशियल नियमों का पालन करें ताकि अचानक ब्रेकडाउन का रिस्क कम हो। 

अब Compliance क्यों हो गया है ज्यादा जरूरी

जहां MiCA की सीमा खत्म होती है, वहां MiFID II लागू हो सकता है। सीधे शब्दों में, अगर कोई एक्टिविटी ट्रेडिशनल फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट जैसी है, तो कंपनियों को MiFID II का ऑथरिटी लेना पड़ सकता है और उन्हें वही नियम मानने होंगे जो ट्रेडिशनल फाइनेंस में हैं। 

जैसे-जैसे ये नियम लागू हो रहे हैं, कांप्लायंस अब एक प्रैक्टिकल तरीका बनता जा रहा है, जिससे भरोसेमंद प्लेटफॉर्म्स को पहचाना जा सके। इस संदर्भ में, Kraken जैसे सेंट्रलाइज्ड एक्सचेंज (जो MiCA और MiFID II दोनों के तहत जरूरी जगहों पर रेग्युलेटेड हैं) को अब यूरोप के रेग्युलेटेड फाइनेंशियल इन्फ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा माना जा रहा है, न कि हाशिये पर काम करने वाले आउटसाइडर्स के तौर पर।

कुल मिलाकर, यूरोप के ये नए नियम उन असफलताओं के चांस को कम करने के लिए बनाए गए हैं, जिनका पिछले यूजर्स को भारी नुकसान हुआ था। ये यह भी बताते हैं कि “सीरियस” क्रिप्टो इन्फ्रास्ट्रक्चर कैसा दिखना चाहिए— जैसे कस्टमर एसेट्स को कैसे सुरक्षित रखा जाए, प्लेटफॉर्म्स कैसे रिपोर्ट करें, गवर्न करें और रिस्क मैनेज करें। इस क्लैरिटी के कारण बैंक, एसेट मैनेजर्स और दूसरी संस्थाएं (जो डिफाइंड कांप्लायंस फ्रेमवर्क मांगती हैं) भी मार्केट में ज्यादा भरोसे के साथ पर्टिसिपेट कर पा रही हैं।

ये safeguards असल में क्या बदलते हैं

MiCA यह तय करता है कि क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स को रोजमर्रा के काम में किन बेसिक ग्राउंड रूल्स का पालन करना होगा। इसमें शामिल है— प्लेटफॉर्म कैसे ऑपरेट होता है, इसकी जानकारी पब्लिकली बताना, कस्टमर के फंड्स को कंपनी के पैसों से अलग रखना, और यह यकीनी बनाना कि यूजर्स के लिए पर्याप्त सुरक्षा मौजूद हो अगर कोई परेशानी आए।

MiCA के तहत, यूजर्स की कॉइन्स एक्सचेंज के अपने पैसों के साथ मिक्स नहीं होतीं, और इंडिपेंडेंट चेक्स के जरिए यह वेरिफाई किया जाता है कि कस्टमर की holdings पूरी तरह अकाउंटेड हैं। सोच सीधी है— अगर कोई प्लेटफॉर्म मुसीबत में पड़ता है, तो यूजर्स को अपने एसेट्स की चिंता न करनी पड़े।

Kraken की MiCA-रेग्युलेटेड कस्टडी एंटिटी यूरोप में इस बात की बढ़िया मिसाल है कि ये नियम असल में कैसे फॉलो होते हैं। इन नियमों को फॉलो करके, ट्रेडिशनल फाइनेंस के फैमिलियर सेफगार्ड्स अब क्रिप्टो में भी नजर आने लगे हैं— खासकर यह कि एसेट्स को कैसे स्टोर और सिक्योर किया जाए, जिससे मुश्किल वक्त में भी इकोसिस्टम मजबूत रहे।

फंड्स के फ्लो पर नज़र

EU अब क्रिप्टो ट्रांजेक्शंस को ट्रैक करने के नियम और सख्त कर रहा है, खासकर मनी लॉन्ड्रिंग (AML) और टेरर फाइनेंसिंग (CTF) को रोकने के लिए। अब क्रिप्टो पर भी Travel Rule लागू कर दी गई है, जिसकी वजह से फंड भेजने और प्राप्त करने वाले का बेसिक इंफॉर्मेशन ट्रांसफर से पहले शेयर करना होगा। ये वही तरीका है जैसा बैंक वायर ट्रांसफर में इस्तेमाल होता है।

साथ ही, EU एक नया Anti-Money Laundering Authority (AMLA) बना रहा है, जो सभी मेंबर स्टेट्स में इनफोर्समेंट पर नज़र रखेगा और स्टैंडर्ड्स को एक जैसा बनाए रखेगा।

रोजमर्रा के इस्तेमाल में, इसका मतलब है कि यूज़र्स को कुछ एक्स्ट्रा प्रॉम्प्ट्स दिख सकते हैं। Kraken जैसे प्लेटफॉर्म पर EU और UK के कस्टमर्स से पूछा जा सकता है कि ट्रांसफर दूसरे exchange को जा रहा है या सेल्फ-होस्टेड वॉलेट में, और कुछ ट्रांजेक्शंस के लिए भेजने वाले या रिसीवर की बेसिक जानकारी देनी होगी। ये एक स्टेप बढ़ा देता है, लेकिन ये दिखाता है कि रेग्युलेशन असली यूज़र एक्सपीरियंस में कैसे नज़र आ रहा है।

टुकड़ों से एक मार्केट की ओर

MiCA पूरे यूरोप के लिए एक साझा लाइसेंसिंग मॉडल भी लाता है। क्रिप्टो exchanges को अब भी किसी नेशनल रेग्युलेटर से अप्रूवल लेना पड़ेगा, लेकिन अप्रूवल मिलते ही यह लाइसेंस पूरे EU और EEA देशों में इस्तेमाल किया जा सकेगा, सिर्फ एक मार्केट तक सीमित नहीं रहेगा।

असल में, इससे यूरोप का बंटा हुआ क्रिप्टो मार्केट एक जगह आने लगता है। एंट्री के लिए हाईयर बैरियर्स हैं, और हर exchange ये क्राइटेरिया पूरी नहीं कर पाएगा। लेकिन जो प्लेटफॉर्म ये रूल्स फॉलो कर सकते हैं, उनके लिए भरोसे और पूरे रीजन में स्केल पर ऑपरेट करने का मौका मिलेगा।

आम यूरोपियन क्रिप्टो यूज़र्स के लिए, ये बदलाव ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म चुनते समय कॉन्फिडेंस बढ़ा सकता है। MiCA के कंज़्यूमर प्रोटेक्शन और ओवरसाइट से, यूज़र्स को पता है कि किसी EU-अप्रूव्ड exchange को हर देश में वही बेसिक रूल्स फॉलो करने होते हैं। ये साझा स्टैंडर्ड्स ट्रस्ट बनाते हैं कि प्लेटफॉर्म हर जगह एक जैसी गाइडलाइंस पर चल रहा है।

Kraken शुरुआती मेजर exchanges में से एक था, जिसने 2025 के मध्य में Central Bank of Ireland के जरिए MiCA लाइसेंस सुरक्षित किया। जल्दी अप्रूवल मिलने से Kraken को यूरोप में एक ही रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क के तहत अपनी सर्विसेज स्केल करने का मौका मिला, जिससे यूरोपियन यूज़र्स को ये भी पता चला कि ये प्लेटफॉर्म किस स्टैंडर्ड के तहत ऑपरेट कर रहा है।

EU और US रेग्युलेशन में फर्क

European Union और United States ने क्रिप्टो रेग्युलेशन के मामले में अलग रास्ते अपनाए हैं। यूरोप ने शुरू से क्लियर रूल्स सेट करने पर फोकस किया, जबकि US ने ज्यादातर enforcement actions और कोर्ट केसों के जरिए तय किया कि क्या अलाउड है और क्या नहीं।

असल में, इसका मतलब है कि यूरोपियन कंपनियों को साफ गाइडेंस मिली, जबकि बहुत सी US कंपनियों को बाद में रूल्स समझने पड़े।

US अब एक ज्यादा स्ट्रक्चर्ड अप्रोच की तरफ बढ़ने लगा है, खासकर stablecoins के लिए, लेकिन उसका फ्रेमवर्क अभी बन रहा है। फिलहाल, यूरोप के rules-first मॉडल से ज्यादा क्लैरिटी और कंसिस्टेंसी मिल रही है।

इनवेस्टर्स और मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए अब regulation सिर्फ बैकग्राउंड मुद्दा नहीं रहा। ये एक्टिवली डिसाइड करता है कि क्रिप्टो कहां ग्रो कर सकता है, कौनसे प्लेटफॉर्म्स स्केल कर सकते हैं और आगे चलकर ट्रस्ट कैसा दिखेगा। जैसे-जैसे यूरोप के रूल्स प्रैक्टिकल होते जा रहे हैं, मार्केट ऐसे फेज़ में जा रहा है जहां क्लैरिटी, कंसिस्टेंसी और अकाउंटेबिलिटी इनोवेशन जितनी जरूरी है।

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