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PwC ने 2026 में क्रिप्टो को बदल रहे 6 ग्लोबल रेग्युलेटरी ट्रेंड्स बताए

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Kamina Bashir

23 जनवरी 2026 11:30 UTC
  • PwC का कहना है कि क्रिप्टो रेग्युलेशन ग्लोबल लेवल पर एक जैसा होता जा रहा है, अब फोकस क्लैरिटी से हटकर enforcement पर
  • कंपनी ने ग्लोबल enforcement, tokenization और oversight में अहम बदलाव बताए
  • इन्फ्रास्ट्रक्चर और एडॉप्शन जैसी नॉन-रेग्युलेटरी ताकतें भी क्रिप्टो लैंडस्केप को आकार देती हैं

अकाउंटिंग फर्म PricewaterhouseCoopers (PwC) के मुताबिक, अब रेग्युलेटरी क्लेरिटी क्रिप्टो इकोसिस्टम के विकास की मुख्य बाधा नहीं रह गई है।

फर्म की लेटेस्ट रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्लोबल क्रिप्टो रेग्युलेशन अब ज्यादा अलाइनमेंट की ओर बढ़ रही है और 2026 के लिए 6 बड़े ट्रेंड्स पहचाने गए हैं।

पहला मुख्य ट्रेंड stablecoins से जुड़ा है। PwC ने हाइलाइट किया है कि इंडस्ट्री का फोकस framework बनाने से आगे निकलकर अब उन्हें लागू करने पर है। रेग्युलेटर्स reserves, redemption rights, governance और disclosures को लेकर सख्त rules लागू कर रहे हैं।

कुछ रीजन में, अथॉरिटी तेजी से होने वाले ऑउटफ्लो के रिस्क को कम करने के लिए holding limits भी लागू कर रही हैं।

“Central banks systemic stablecoins और payment systems के बीच interoperability की टेस्टिंग शुरू करेंगे,” रिपोर्ट में लिखा गया है।

दूसरा, रिपोर्ट में tokenized money के इर्द-गिर्द बढ़ती मोमेंटम को हाइलाइट किया गया है। Tokenized bank deposits, tokenized cash equivalents और wholesale central bank digital currencies अब pilot programs से आगे निकलकर बड़े deployment की ओर बढ़ रहे हैं।

PwC के अनुसार, policymakers cross-border settlement systems को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो tokenized assets और interoperable national payment networks को जोड़ते हैं।

कुल मिलाकर, real world asset (RWA) tokenization 2026 में एक मजबूत थीम के रूप में उभरकर सामने आई है, और इंडस्ट्री participants ने काफी ग्रोथ होने का अनुमान लगाया है। यह ट्रेंड World Economic Forum (WEF) की वार्षिक मीटिंग, Davos, Switzerland में भी साफ नजर आया, जहां RWA टोकनाइजेशन crypto संबंधी चर्चाओं में सबसे consistent और प्रमुख थीम रहा।

तीसरा, PwC के अनुसार, consumer protection भी एक बड़ा रेग्युलेटरी फोकस बन गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, लाइसेंसशुदा कंपनियों को अब मार्केटिंग प्रैक्टिसेस, प्रोडक्ट suitability और कस्टमर outcomes को लेकर और अधिक सख्त नियमों का पालन करना होगा।

“Financial-promotion और product-governance obligations को अब क्रिप्टो लाइसेंसिंग में इंटीग्रेट किया जा रहा है। Licensed firms को fair-value outcomes, ट्रांसपेरेंट मार्केटिंग, appropriateness testing और कस्टमर redress mechanisms दिखाना जरूरी होगा,” PwC ने कहा।

चौथा, इंस्टीट्यूशनल लेवल पर भी इस्तेमाल के मामलों में विस्तार हो रहा है क्योंकि रेग्युलेटर्स अब ज्यादा साफ कर रहे हैं कि डिजिटल एसेट्स किस तरह से एलिजिबल collateral के तौर पर मंजूर किए जा सकते हैं, जैसे UMR के तहत।

जब तक ये एसेट्स liquidity, valuation, custody, operational resilience और legal enforceability की जरूरतें पूरी करते हैं, approval मिलना अब और ज्यादा आसान हो रहा है। इससे इंस्टीट्यूशनल लेवल पर टोकनाइज्ड और चुनिंदा क्रिप्टो एसेट्स का collateral और derivatives मार्केट्स में इस्तेमाल बढ़ेगा।

पांचवां, रिपोर्ट में crypto intermediaries के लिए भी कड़े standards के संकेत दिए गए हैं। PwC के अनुसार,

“क्रिप्टो एक्सचेंज, कस्टोडियन और स्टेबलकॉइन इश्यूअर को अब पूरी तरह से prudential और ऑपरेशनल resilience नियमों के दायरे में लाया जा रहा है। सुपरवाइजर्स, कैपिटल, सेग्रेगेशन, liquidity और recovery प्लानिंग पर ऐसी requirements लागू कर रहे हैं जो financial market infrastructure standard के बराबर हैं।”

आखिर में, PwC ने कहा कि डिसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस को अब पारंपरिक मार्केट्स की तरह ही जांचा जा रहा है। रेग्युलेटर्स अब मार्केट इंटीग्रिटी, transparency, surveillance और कन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट से जुड़ी उम्मीदों को सेंट्रलाइज्ड और ऑन-चेन ट्रेडिंग दोनों पर लागू कर रहे हैं, जिससे ग्लोबल conduct norms की ओर कंवर्जेंस क्लियर दिख रही है।

रेग्युलेशन से आगे कौन सी ताकतें क्रिप्टो को प्रभावित कर रही हैं

रेग्युलेटरी ट्रेंड्स के अलावा, रिपोर्ट ने उन नॉन-रेग्युलेटरी कारणों की भी ओर ध्यान दिलाया है, जो अभी के क्रिप्टो मार्केट को प्रभावित कर रहे हैं:

  • क्रिप्टो रोजमर्रा की फाइनेंस का हिस्सा बन रहा है: अब यह तेजी से stablecoins, tokenized cash और ऑन-चेन पेमेंट्स के जरिए पैसे को ट्रांसफर और सैटल करने के लिए यूज़ हो रहा है।
  • इंस्टिट्यूशनल पार्टिसिपेशन reversibility को पार कर चुका है: बड़े financial institutions और corporates अब digital assets को अपने कोर सिस्टम्स और operations में इंटीग्रेट कर रहे हैं।
  • इन्फ्रास्ट्रक्चर mature और specialized हो रहा है: इंडस्ट्री अब modular सर्विसेस की ओर जा रही है, जिसमें security, reliability और interoperability के लिए हाई स्टैंडर्ड्स अपनाए जा रहे हैं।
  • लोकल रियलिटी एडॉप्शन को shape करती है: ग्लोबल नेटवर्क्स होने के बावजूद, क्रिप्टो का यूज अलग-अलग रीजन में अलग-अलग होता है, जो वहां की इकोनॉमिक जरूरतों और फाइनेंशियल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर डिपेंड करता है।

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