Ripple के 2026 के ग्लोबल सर्वे में 1,000 से ज्यादा फाइनेंस लीडर्स ने हिस्सा लिया, जिसमें 72% लोगों ने माना कि प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए फाइनेंस लीडर्स को डिजिटल एसेट सॉल्यूशन देने ही होंगे।
इस सर्वे में बैंक, एसेट मैनेजर्स, फिनटेक्स और कॉर्पोरेट्स शामिल थे। उनकी राय से ये दिखता है कि अब stablecoin, टोकनाइजेशन और भरोसेमंद इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर्स की जरूरत को लेकर सहमति बढ़ रही है।
Stablecoins और Tokenization से Institutional डिमांड बढ़ी
इस सर्वे में डिजिटल एसेट्स के जिन इस्तेमालों की बात हुई, उनमें stablecoin ने सबसे ज्यादा सपोर्ट पाया। 74% उत्तरदाताओं ने कहा कि stablecoin “कैश-फ्लो एफिशिएंसी को बढ़ाते हैं और वर्किंग कैपिटल को अनलॉक करते हैं,” यानी सिर्फ पेमेंट तक सीमित नहीं रहते।
यह ट्रेंड ग्लोबल मार्केट के फिलहाल के रुझानों के साथ मेल खाता है। stablecoin का मार्केट कैप मार्च की शुरुआत में $300 बिलियन के पार पहुंच गया, जो फाइनेंशियल इकोसिस्टम में एडॉप्शन बढ़ने का संकेत है।
लेटेस्ट न्यूज़ के लिए हमें X पर फॉलो करें और तुरंत सभी अपडेट पाएं
टोकनाइजेशन में इंटरेस्ट भी तेजी से बढ़ रहा है। इस रिपोर्ट में बताया गया कि ज्यादातर बैंक और एसेट मैनेजर्स अपनी स्ट्रैटेजी के लिए पार्टनर ढूंढ रहे हैं। टोकनाइजेशन पार्टनर चुनते वक्त 89% ने डिजिटल एसेट की कस्टडी और स्टोरेज को सबसे ऊंची प्राथमिकता दी।
“यहाँ मेन बात यह है कि फाइनेंस लीडर्स उन क्रिप्टो कंपनियों से और ज्यादा की उम्मीद रखते हैं जो ये सॉल्यूशन ऑफर करती हैं — वे ऐसा टेक स्टैक चाहते हैं जो उनकी सभी डिजिटल एसेट जरूरतें पूरी कर सके और ऐसा भरोसेमंद पार्टनर जिसके साथ अभी और फ्यूचर में स्ट्रैटेजी के साथ चल सकें,” ऐसा Ripple ने लिखा।
बैंकों की 82% राय थी कि टोकन लाइफ साइकल मैनेजमेंट सबसे जरूरी है, जबकि एसेट मैनेजर्स के लिए 80% ने प्राइमरी डिस्ट्रीब्यूशन को प्राथमिकता दी।
सर्वे में यह सामने आया कि ज्यादातर इंस्टिट्यूशन्स अपनी डिजिटल एसेट जरूरतों के लिए सिंगल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर को पसंद करते हैं। आधे से ज्यादा फिनटेक्स और फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन्स वन-स्टॉप सॉल्यूशन को तरजीह देते हैं। कॉरपोरेट्स में यह संख्या 71% थी।
सुरक्षा (security) पार्टनर चुनने का सबसे बड़ा क्राइटेरिया बनकर उभरा। 97% उत्तरदाताओं ने ISO और SOC II जैसी सर्टिफिकेशन को महत्वपूर्ण या बहुत महत्वपूर्ण बताया।
इंटीग्रेशन के बाद का रिस्पॉन्सिव टेक्निकल सपोर्ट 88% के साथ दूसरे नंबर पर रहा, जबकि इंडस्ट्री-स्पेसिफिक एक्सपीरियंस (80%) और फाइनेंशियल मजबूती (79%) भी अहम फैक्टर रहे।
“सिर्फ अलग-अलग क्षमताओं के अलावा, इंटीग्रेशन भी मायने रखता है। पार्टनर की पसंद को लेकर जवाबदेह लोगों की चिंता डिजिटल एसेट्स पर केंद्रित है, जैसे: रेग्युलेटरी स्पष्टता (40%), सुरक्षा और सेफकीपिंग (37%), कंप्लायंस जरूरतें (30%), और प्राइस वोलैटिलिटी (29%),” रिपोर्ट में कहा गया।
हमारे YouTube चैनल को सब्सक्राइब करें और लीडर्स व जर्नलिस्ट्स से एक्सपर्ट इनसाइट्स पाएं