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रूस–यूक्रेन सीज़फायर का क्रिप्टो मार्केट्स पर क्या असर हो सकता है

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Mohammad Shahid

15 दिसंबर 2025 22:22 UTC
  • 15 दिसंबर को Ukraine-Russia सीज़फायर बातचीत में प्रगति, Western लीडर्स ने security guarantees और monitoring frameworks पर चर्चा की
  • एक भरोसेमंद सीज़फायर से क्रिप्टो में शॉर्ट-टर्म risk-on मूव आ सकता है, जिससे Bitcoin और हाई-बीटा altcoins ऊपर जा सकते हैं
  • लगातार मुनाफा तभी टिकेगा जब geopolitical risk कम होने से energy प्राइस, मंदी का दबाव और ग्लोबल yields घटें

Russia–Ukraine युद्ध को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक कोशिशों में सोमवार को साफ़ तेजी देखने को मिली, जब US, यूक्रेन और यूरोप के अफसरों ने संभावित सीजफ़ायर और युद्ध के बाद की सिक्योरिटी फ्रेमवर्क की नींव रखी।

ये घटनाएं संघर्ष शुरू होने के बाद से कूटनीति की सबसे बड़ी तरक्की में गिनी जा रही हैं। ये पॉजिटिव संकेत पहले ही इन्वेस्टर्स को ग्लोबल मार्केट्स, जिसमें क्रिप्टोकरेंसी भी शामिल है, में जियोपोलिटिकल रिस्क दोबारा सोचने पर मजबूर कर रहे हैं।

क्रिप्टोकरेंसी मार्केट, जो हाल ही में ग्लोबल रिस्क-ऑफ़ मोमेंट्स के कारण काफ़ी गिरावट देख चुका है, के लिए एक सीजफ़ायर सेंटिमेंट बदल सकता है, लेकिन इसमें कुछ बड़े कैविएट्स भी मौजूद हैं।

Russian-Ukraine सीजफायर के लिए डिप्लोमैटिक मोमेंटम तेज

यूक्रेन के नेगोसिएटर्स, US और यूरोप के ज़रूरी सहयोगी इस हफ़्ते बर्लिन में मिले और उन्होंने टेंशन खत्म करने व दोबारा संघर्ष से बचाव को लेकर गहन बातचीत की।

बातचीत में शामिल अफसरों ने कहा कि बातचीत में काफ़ी तरक्की हुई है और प्रपोज़्ड फ्रेमवर्क के ज्यादातर हिस्सों पर सहमति बन गई है।

US अधिकारियों ने कन्फर्म किया कि वॉशिंगटन यूक्रेन को मीनिंगफुल सिक्योरिटी गारंटी देने के लिए सपोर्ट करेगा, जो एक पीस अरेंजमेंट का हिस्सा रहेगा। ये Kyiv की लंबे समय से चल रही सुरक्षा की मांग को कवर करता है ताकि भविष्य में किसी भी हमले से सुरक्षा मिल सके।

बातचीत से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अब लगभग 90% फ्रेमवर्क पर सहमति बन चुकी है।

बचे हुए मतभेद खासकर पूर्वी यूक्रेन, खासकर डोनेट्स्क क्षेत्र में, क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर हैं।

यूरोपीयन लीडर्स ने इस कूटनीतिक प्रयास को मजबूत करते हुए यूरोप की अगुआई में एक मल्टीनेशनल फोर्स भेजने की योजना को समर्थन दिया है, जो सीजफ़ायर स्थिर रहने पर यूक्रेन को स्थिर करने में मदद करेगी। इसके साथ ही US का समर्थित मॉनिटरिंग और वेरीफिकेशन मैकेनिज्म लागू होगा, जिससे सीज़फ़ायर के पालन पर नजर रखी जाएगी और उल्लंघन पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

यूक्रेन के अंदर पब्लिक ओपिनियन अभी भी बातचीत में एक चैलेंज बना हुआ है। Reuters द्वारा दिए गए पोल के मुताबिक़, ज़्यादातर यूक्रेनियन ने मुख्य क्षेत्रीय समझौते या मिलिट्री कैपेबिलिटी पर पाबंदी को सिरे से खारिज किया है, जब तक उन्हें मजबूत और लागू किए जा सकने वाले सुरक्षा वादों का भरोसा न मिले।

बातचीत के बावजूद फाइटिंग जारी

डिप्लोमेसी की तरक्की के बावजूद, सैन्य ऑपरेशन रुके नहीं हैं। सोमवार को, यूक्रेनी सेना ने कैस्पियन सागर में रूसी ऑयल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर और लॉन्ग-रेंज ड्रोन स्ट्राइक की, जिससे लगातार तीसरी बार मेन प्रोडक्शन प्लेटफॉर्म की सप्लाई बाधित हुई।

ये हमले दर्शाते हैं कि Kyiv, रूस की एनर्जी से होने वाली कमाई पर इकॉनमिक प्रेशर डालने की रणनीति अपना रहा है, जब तक कि बातचीत कोई ठोस नतीजा नहीं निकलती।

यूक्रेन ने ये भी दावा किया है कि उसने नोवोरोसिस्क पोर्ट में रूस की Kilo-क्लास सबमरीन पर अंडरवॉटर ड्रोन से हमला किया।

अगर इसकी पुष्टि हो जाती है, तो यह यूक्रेन की असिमिट्रिक नेवल क्षमता में बढ़ती ताकत को दिखाता है। लेकिन फिलहाल स्वतंत्र रूप से इस दावे की तस्दीक़ सीमित है और रूसी अफसरों ने नुकसान के दावे से इनकार किया है।

1. Safe-haven की डिमांड घटी, Risk Appetite बढ़ा

एक विश्वसनीय सीज़फायर ग्लोबल मार्केट में सबसे बड़े जोखिम कारकों में से एक को हटा सकता है। मार्केट्स में, जहाँ रिस्क सेंटिमेंट एक बड़ा ड्राइवर होता है, ऐसी डी-एस्कलेशन इन तरीकों से असर डाल सकती है:

  • रिस्क एसेट्स को बढ़ावा मिलेगा, जिससे US Treasuries और US $ जैसी ट्रेडिशनल सेफ हेवन की डिमांड कम हो सकती है।
  • Bitcoin और मेजर altcoins जैसी एसेट्स को सपोर्ट मिलेगा, क्योंकि इन्वेस्टर्स वापिस हाई-बेटा इनवेस्टमेंट्स की ओर शिफ्ट हो सकते हैं।
  • इम्प्लाइड वोलाटिलिटी इक्विटी और डिजिटल एसेट मार्केट्स में कम हो सकती है।

इसका मेकेनिज्म सीधा है: जब जियोपॉलिटिकल रिस्क कम हो जाएगी, तो वे फंड्स जो सेफ्टी के लिए निकाले गए थे, वो फिर से रिस्क एसेट्स में निवेश हो सकते हैं, जिससे Bitcoin प्राइस और Ethereum प्राइस ऊपर जा सकते हैं। जब रिस्क लेने का सेंटिमेंट बढ़ेगा, तो altcoins को भी फायदा मिलेगा, जो अक्सर रिलीफ रैली में ज्यादा अच्छा परफॉर्म करते हैं।

Polymarket पर Russia-Ukraine सीज़फायर के चांस 2026 की शुरुआत तक बढ़े हैं। स्रोत: Polymarket

2. Energy और मंदी की कहानी

अगर सीज़फायर लम्बे समय तक रहता है तो इसका असर कमोडिटी मार्केट्स पर भी पड़ेगा, खासकर एनर्जी प्राइस पर दबाव कम हो सकता है। ग्लोबल एनर्जी प्राइस कम या स्टेबल होने से निम्नलिखित फायदे हो सकते हैं:

  • यूरोप और अन्य जगहों पर मंदी की उम्मीदों को शांत कर सकता है।
  • सेंट्रल बैंक्स पर रेग्युलेशन सख्त रखने का प्रेशर कम होगा।
  • लिक्विडिटी कंडीशन्स में और आसानी आ सकती है, जो पारंपरिक रूप से रिस्क एसेट्स जैसे क्रिप्टोकरेन्सीज की हाई वैल्यूएशन में मदद करता है।

हालांकि, ये असर सीधे या तुरंत नहीं आते। ये इस बात पर निर्भर करता है कि मार्केट्स कितनी जल्दी एनर्जी मार्केट्स और सेंट्रल बैंक की पॉलिसीज में स्ट्रक्चरल बदलावों को महसूस करते हैं।

क्रिप्टो रिकवरी में कौनसी बातें रुकावट बन सकती हैं

हालांकि सीज़फायर जियोपॉलिटिकल रिस्क कम कर सकता है, यह उन मैक्रो हेडविंड्स को पूरी तरह संतुलित नहीं कर सकता जो पिछले कुछ महीनों में क्रिप्टो मार्केट्स को प्रभावित कर रहे थे:

  • लगातार चल रही सेंट्रल बैंक की अनिश्चितता: अगर Bank of Japan टाइटनिंग जारी रखता है और US के डेटा से मंदी बनी रहने का संकेत मिलता है, तो मार्केट में लिक्विडिटी सीमित रह सकती है, जिससे रिस्क एसेट्स में अपवर्ड मूवमेंट कम हो सकता है।
  • डेरिवेटिव मार्केट की पोजिशनिंग: लीवरेज पहले भी क्रिप्टोकरेन्सी गिरावट का बड़ा कारण रहा है। अगर मार्केट में रिलीफ रैली आती है, तो यह फ्रेश पोजिशनिंग और हाई फंडिंग रेट्स का कारण बन सकती है, जो मैक्रो फैक्टर्स के चलते फिर से रिवर्स भी हो सकती है।
  • लिक्विडिटी कंडीशंस: सीज़फायर पॉजिटिव न्यूज़ है, लेकिन लगातार एसेट प्राइस रैली के लिए भरपूर लिक्विडिटी जरूरी है। अगर फाइनेंशियल कंडीशंस के आसान होने को लेकर क्लियर सिग्नल नहीं मिलते, तो क्रिप्टो एसेट्स में सिर्फ ट्रांज़िएंट रिलीफ मूव्स ही दिख सकते हैं।
2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला करने पर Bitcoin में डिप आया था। स्रोत: Reuters

सीज़फायर पॉजिटिव है, पर काफी नहीं

Russia और Ukraine के बीच सीज़फायर होने से जियोपॉलिटिक्स में एक बड़ी बदलाव आएगा और इससे रिस्क एसेट्स, जिसमें क्रिप्टोकरेन्सी भी शामिल है, को शुरुआती सपोर्ट मिलेगा।

लेकिन क्रिप्टो मार्केट्स पर इसका असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि ये सीज़फायर लिक्विडिटी कंडीशंस, सेंट्रल बैंक की पॉलिसी उम्मीदों और ग्लोबल रिस्क अपीटाइट से कैसे इंटरसेक्ट होता है।

शॉर्ट-टर्म में क्रिप्टो में अच्छी रिलीफ रैली देखने को मिल सकती है, जो सेंटिमेंट और रिस्क रिएलोकेशन से प्रेरित होगी।

मीडियम टर्म में ट्रेंड इस पर डिपेंड करेगा कि सीज़फायर से सच में मंदी और लिक्विडिटी प्रेशर कम होते हैं या नहीं — क्योंकि ये दोनों ही हाल के महीनों में डिजिटल एसेट्स को सबसे ज़्यादा अफेक्ट करने वाले मैक्रो फैक्टर्स रहे हैं।

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