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Litecoin के फाउंडर ने चेताया, Quantum अटैक का पहला टारगेट Satoshi के Bitcoins हो सकते हैं

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Kamina Bashir

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Harsh Notariya

13 मार्च 2026 11:38 UTC
  • Satoshi के शुरुआती wallets में P2PK ट्रांजैक्शन स्क्रिप्ट का इस्तेमाल, इन्हें quantum attackers का खास टारगेट बनाता है
  • अगर creator की मौत हो गई है, तो कोई भी उन कॉइन्स को संभावित quantum-safe wallets में ट्रांसफर नहीं कर सकता
  • Charlie Lee ने कहा Bitcoin में Sathoshi के stack को लेकर फिलॉसॉफिकल बहस

Litecoin (LTC) के फाउंडर Charlie Lee ने चेतावनी दी है कि Satoshi Nakamoto के अनुमानित 1.1 मिलियन Bitcoins (BTC) क्वांटम-कंप्यूटिंग अटैक्स के लिए असुरक्षित हैं।

यह चेतावनी Bitcoin की डिसेंट्रलाइज्ड कम्युनिटी के लिए एक बड़ी गवर्नेंस दुविधा खड़ी करती है। अगर Satoshi अब जीवित नहीं हैं या उनसे संपर्क संभव नहीं है, तो इन कॉइन्स को सुरक्षित जगह ट्रांसफर करना नामुमकिन हो जाएगा, और अगर इन्हें फ्रीज कर दिया जाता है, तो इससे Bitcoin के मूल सिद्धांतों से समझौता होगा।

Satoshi के Bitcoins क्यों “कम सुरक्षित” हैं

BeInCrypto को दिए इंटरव्यू में Lee ने बताया कि भले ही थ्योरी में क्वांटम कंप्यूटिंग मौजूदा एन्क्रिप्शन मेथड्स को क्रैक कर सके, लेकिन तकनीक अभी इतनी एडवांस नहीं हुई है। फिर भी, उन्होंने जोर दिया कि यह खतरा सिर्फ क्रिप्टोकरेन्सी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह Global फाइनेंस, कम्युनिकेशन जैसे बड़े सेक्टर्स की सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर को भी कमजोर कर सकता है।

क्रिप्टो के लिए, जोखिम और भी ज्यादा है। अगर क्वांटम कंप्यूटर वॉलेट की एन्क्रिप्शन तोड़ दें, तो कोई भी किसी और के फंड्स तक पहुंच सकता है और उन्हें खर्च कर सकता है। इससे पूरे क्रिप्टो इकोसिस्टम की नींव ही खत्म हो जाएगी। हालांकि, सभी वॉलेट्स एक जैसी रिस्क में नहीं हैं।

“वे 1 मिलियन Bitcoins जो Satoshi के पास हैं। कोई नहीं जानता Satoshi कौन हैं …ये कॉइन्स अच्छे से सुरक्षित नहीं हैं। quantum अटैक्स के मामले में ये आज की कॉइन्स के मुकाबले कम सुरक्षित हैं,” Lee ने BeInCrypto से कहा। “अगर quantum अटैक हुआ, तो ये कॉइन्स सबसे पहले हैक हो सकते हैं।”

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यह कमजोरी ट्रांजेक्शन फॉर्मेट के कारण है। Bitcoin के शुरुआती दिनों (2009–2010) में ज्यादातर ट्रांजेक्शन Pay-to-Public-Key (P2PK) स्क्रिप्ट्स से किए जाते थे, न कि बाद में आए Pay-to-Public-Key-Hash (P2PKH) फार्मेट से।

  • P2PK: ट्रांजेक्शन आउटपुट में डायरेक्ट पब्लिक की होती है।
  • P2PKH: आउटपुट में पब्लिक की की हैश होती है, जिससे असली की तब तक छुपी रहती है जब तक कॉइन्स खर्च नहीं होते।

Satoshi के एड्रेस मुख्य रूप से पुराने फॉर्मेट का उपयोग करते हैं, जिससे वे संभावित क्वांटम अटैक्स के लिए वल्नरेबल हैं। ARK Invest और Unchained द्वारा इस हफ्ते पब्लिश एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 6.9 मिलियन Bitcoins भविष्य में क्वांटम अटैक्स के खतरे में हैं। इनमें से करीब 1.7 मिलियन ऐसे एड्रेस फॉर्मेट (P2PK) में हैं, जिनके खो जाने की संभावना है।

गवर्नेंस की मुश्किलें

Lee ने उस गहराई से जुड़े मुद्दे को उजागर किया जो केवल एन्क्रिप्शन से कहीं आगे जाता है। भले ही Bitcoin कम्युनिटी quantum-safe वॉलेट्स को सफलतापूर्वक डेवलप और डिप्लॉय कर दे, सवाल फिर भी बना रहेगा कि Satoshi के कॉइन्स का क्या किया जाए।

अगर Satoshi अब नहीं हैं या मौजूद नहीं हैं, तो वह कॉइन्स उस स्थिति में आ जाएंगे जिसे Lee ने “एक फ्री-फॉर-ऑल” करार दिया है – यानी जो भी सबसे ताकतवर quantum कंप्यूटर बनाएगा, वह इन्हें इस्तेमाल कर सकता है। उन्होंने कहा कि इससे एक “डरावनी स्थिति” बन सकती है जिसमें एक मिलियन Bitcoins ओपन मार्केट में डंप किए जा सकते हैं।

“क्या हम Bitcoin को इसमें बदलने जा रहे हैं कि कोई भी उस ऐड्रेस से खर्च न कर पाए? या हम कॉइन्स को ट्रांसफर करेंगे? या फिर यूं ही छोड़े देंगे?” Lee ने कहा। “अगर ये पूरी तरह से डिसेंट्रलाइज्ड है, तो किसी को भी उन कॉइन्स को छूना नहीं चाहिए।”

यह दार्शनिक तनाव पहले ही Bitcoin कम्युनिटी के बीच बहस को जन्म दे रहा है। हाल ही में, CryptoQuant के CEO Ki Young Ju ने इस चर्चा को X पर फिर से जिंदा किया, जिसमें उन्होंने नोट किया कि Quantum-resistant अपग्रेड के साथ Bitcoin को एक कठिन trade-off का सामना करना पड़ सकता है।

उनके अनुसार, इसका मतलब Satoshi Nakamoto से जुड़े BTC को फ्रीज करना पड़ सकता है, साथ ही लाखों ऐसे कॉइन्स जो पुराने वॉलेट्स में हैं।

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वहीं, Bitwise Asset Management के European Head of Research André Dragosch का मानना है कि नेटवर्क को किसी पर भी जबरन अपग्रेड लागू नहीं करना चाहिए।

Quantum खतरा दूर, लेकिन बहस अभी शुरू

फिलहाल quantum हार्डवेयर इस काबिल नहीं है कि वो Bitcoin की क्रिप्टोग्राफी को ब्रेक कर सके। ARK Invest की रिपोर्ट के मुताबिक, Bitcoin की Elliptic Curve Cryptography (ECC) को क्रैक करने के लिए कम से कम 2,330 logical qubits और करोड़ों से अरबों quantum gates चाहिए होंगे, जो आज के सौ-qubit सिस्टम्स से बहुत आगे की बात है।

हालाँकि, इंस्टीट्यूशनल वर्ल्ड इसमें रिस्क को पहले से ही शामिल कर रहा है। Jefferies के strategist Christopher Wood ने इस साल की शुरुआत में quantum से जुड़ी चिंताओं के कारण flagship पोर्टफोलियो से 10% Bitcoin अलोकेशन हटा दी थी।

Shark Tank के investor Kevin O’Leary ने हाल ही में बताया कि संस्थान भी quantum रिस्क की वजह से अपनी Bitcoin exposure को लिमिट कर रहे हैं। यानी, जबकि इनडायरेक्ट इम्पैक्ट साफ दिख रहा है, कंसेंसस तक पहुंचना इतना आसान नहीं है।

“वो लोग केवल बदलाव के लिए बदलाव नहीं चाहते। अगर हम quantum safe बना रहे हैं, तो ये वही होना चाहिए, जिस पर सभी सहमत हों कि ये जरूरी है,” Lee ने BeInCrypto से शेयर किया।

उन्होंने बताया कि Litecoin, एक छोटा नेटवर्क होने के चलते, नई चीजें अपनाने के लिए ज्यादा ओपन है।

“शायद हम जल्दी आगे बढ़ेंगे और नए फीचर्स Bitcoin से पहले ट्राई करेंगे। अगर कोई चीज़ Litecoin पर काम करती है, तो वो Bitcoin पर भी चलेगी, क्योंकि दोनों कॉइन्स काफी मिलते-जुलते हैं।”

अभी Satoshi के वॉलेट्स में 1.1 मिलियन BTC पिछले दस सालों से एक्टिव नहीं हुए हैं। लेकिन जल्द ही एक ऐसा फैसला लिया जा सकता है जिससे Bitcoin की पहचान तय होगी: क्या इन कॉइन्स को डिसेंट्रलाइजेशन की कीमत पर प्रोटेक्ट किया जाए, या फिर अपने सिद्धांतों पर अड़े रहकर ये कॉइन्स हमेशा के लिए गंवा दिए जाएं।

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