US Securities and Exchange Commission (SEC) एक ऐसा प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जो United States में कॉरपोरेट रिपोर्टिंग को काफी हद तक बदल सकता है।
रेग्युलेटर प्लान कर रहा है कि कंपनियों पर हर तिमाही में कमाई (earnings) रिपोर्ट करने की पुरानी बाध्यता हटाकर सिर्फ साल में दो बार रिजल्ट्स डिस्क्लोज़ (disclose) करने की सुविधा दी जाए।
अगर ये बदलाव लागू हो जाता है, तो यह पिछले कई दशकों की सबसे बड़ी रिपोर्टिंग रिफॉर्म्स (reforms) में से एक होगा। यह प्रस्ताव अप्रैल में औपचारिक रूप से पब्लिश होने की उम्मीद है।
ये कदम रेग्युलेटरी कॉस्ट्स (regulatory costs) को कम कर सकता है और और कंपनियों को पब्लिक मार्केट्स में लिस्ट होने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। तिमाही रिपोर्टिंग के नियमों का पालन करना कंपनियों को हर साल अरबों $ खर्च करने पड़ते हैं।
रेग्युलेटर्स और बिजनेस ग्रुप्स का यह भी कहना है कि यह बदलाव कंपनी के एग्जीक्यूटिव्स को शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट्स की तुलना में लॉन्ग-टर्म स्ट्रेटेजी पर फोकस करने में मदद कर सकता है।
हालांकि, इस रेग्युलेशन से जुड़े कई संभावित रिस्क भी हैं। कम रिपोर्टिंग से ट्रांसपेरेंसी (transparency) कमजोर हो सकती है। रिटेल इन्वेस्टर्स और एनालिस्ट्स कंपनी के प्रदर्शन की निगरानी और फाइनेंशल रिस्क्स पकड़ने के लिए तिमाही रिपोर्ट्स पर निर्भर रहते हैं।
साथ ही, यह प्रस्ताव केवल इक्विटीज तक सीमित नहीं रहेगा। कम रिपोर्टिंग फ्रीक्वेंसी से कंपनी की बुनियादी जानकारियों को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है, जिससे स्टॉक्स मार्केट्स में वोलैटिलिटी (volatility) भी बढ़ सकती है।
साथ ही, ऐसा कोई भी पॉलिसी बदलाव जो कैपिटल मार्केट्स को बदलता है, वह इन्वेस्टर्स की रिस्क-लेने की प्रवृत्ति (risk appetite) को भी प्रभावित कर सकता है।
इक्विटी मार्केट में ट्रांसपेरेंसी और लिक्विडिटी में बड़े बदलाव Bitcoin और Ethereum जैसे डिजिटल एसेट मार्केट्स तक भी असर डाल सकते हैं।
फिलहाल, यह प्रस्ताव समीक्षा में है और अभी यह स्पष्ट नहीं है कि SEC इस रूल में बदलाव को इस साल फाइनलाइज करेगा या नहीं।