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2026 में टोकनाइज्ड कॉपर की डिमांड तेज़ी से बढ़ सकती है, ये संकेत

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Nhat Hoang

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Oihyun Kim

30 जनवरी 2026 12:51 UTC
  • कॉपर की डिमांड तेज़ी से बढ़ रही, सप्लाई जल्द पीक पर आकर गिर सकती है
  • AI ग्रोथ, डेटा सेंटर्स, EVs और डिफेंस सिस्टम्स बढ़ा रहे कॉपर की कमी
  • शुरुआती टोकनाइज़्ड कॉपर एसेट्स में क्रिप्टो मार्केट की बढ़ती दिलचस्पी

जैसे ही गोल्ड और सिल्वर लगातार नए रिकॉर्ड हाई छू रहे हैं, वैसे ही छोटे-कैप मेटल्स जैसे कॉपर में भी कैपिटल इनफ्लो देखने को मिल रहा है। ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी एक ब्रिज की तरह काम कर सकती है, जिससे यह कैपिटल टोकनाइजेशन के जरिए क्रिप्टो मार्केट में आ सके।

कई इंडिकेटर्स ये दिखाते हैं कि कॉपर सिल्वर जैसी रैली में प्रवेश कर सकता है, और टोकनाइज्ड कॉपर में 2026 में जबरदस्त ग्रोथ देखी जा सकती है।

आने वाले 15 सालों में Copper की डिमांड तेज़ी से बढ़ सकती है

Toto Finance, जो कि एक इंस्टीट्यूशनल कमोडिटी टोकनाइजेशन प्लेटफॉर्म है, का अनुमान है कि ग्लोबल कॉपर डिमांड 2040 तक करीब 42 मिलियन टन तक पहुँच सकती है। वहीं, सप्लाई 2030 तक अपने पीक पर रहेगी, उसके बाद गिरावट आ सकती है।

कॉपर डिमांड बनाम सप्लाई (2025–2040)। स्रोत: Toto Finance
कॉपर डिमांड बनाम सप्लाई (2025–2040)। स्रोत: Toto Finance

Toto Finance के “कॉपर डिमांड बनाम सप्लाई (2025–2040)” चार्ट के अनुसार, डिमांड 2040 तक लगातार बढ़कर लगभग 40 मिलियन टन तक पहुँच जाती है। वहीं, सप्लाई 2030 में लगभग 28–30 मिलियन टन के आस-पास पीक पर पहुँचकर तेजी से गिरती है। इससे डिमांड- सप्लाई गैप और भी बढ़ जाता है।

यह कोई अस्थायी साइकल नहीं है। यह एक स्ट्रक्चरल इम्बैलेंस है, जिससे कॉपर एक स्ट्रैटजिक रिसोर्स बन जाता है। Toto Finance का मानना है कि टोकनाइजेशन कॉपर तक पहुंचने, ओनरशिप और लिक्विडिटी बढ़ाने का नया तरीका बनेगा। इससे कॉपर एक डिजिटल एसेट बन जाएगा, जिसे आसानी से ट्रेड किया जा सकता है।

“यह कोई साइकल नहीं है, बल्कि एक स्ट्रक्चरल गैप है। जैसे-जैसे कॉपर स्ट्रैटजिक होता जाएगा, टोकनाइजेशन ही एक्सेस, ओनरशिप और लिक्विडिटी के डेवेलपमेंट का तरीका होगा,” Toto Finance ने अंदाजा लगाया।

कई एनालिस्ट्स मानते हैं कि कॉपर की कमी अब ऑफिशियली शुरू हो गई है और आने वाले समय में ये प्रॉब्लम और बड़ी हो सकती है। Mike Investing का कहना है कि अगले 18 सालों में जितना कॉपर माइन किया जाएगा, वो पिछले 10,000 सालों में निकाले गए कॉपर के बराबर होगा। उनका कहना है कि आने वाले 14 महीनों में कॉपर की प्राइस 2–5 गुना तक बढ़ सकती है।

AI और Grid Expansion बड़े कारण हैं

कॉपर की डिमांड बढ़ने की सबसे बड़ी वजह AI बूम और ग्लोबल पावर ग्रिड्स का विस्तार है। Katusa Research कहता है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रिफिकेशन से कॉपर की डिमांड और कमी दोनों बढ़ेंगी।

केवल नए डेटा सेंटर्स से ही कॉपर की डिमांड 2035 तक लगभग 400,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक पहुँचने का अनुमान है। Electric vehicles को भी परंपरागत इंटरनल कंबस्शन इंजन कारों के मुकाबले तीन गुना ज्यादा कॉपर की जरूरत होती है।

मॉडर्न डिफेंस सिस्टम्स और ड्रोन भी इलेक्ट्रॉनिक्स की डिमांड को और बढ़ा रहे हैं, जिससे ग्लोबल सप्लाई खतरनाक रूप से कम स्तर पर पहुँच रही है।

नई माइनिंग प्रोजेक्ट्स को प्रोडक्शन स्टार्ट करने में 17 साल तक लग सकते हैं। इसी दौरान, ओरे क्वालिटी गिर रही है और बड़े माइन बंद हो रहे हैं। ये फैक्टर्स सप्लाई-डिमांड असंतुलन को और गहरा कर रहे हैं।

क्रिप्टो मार्केट में शुरुआती संकेत नजर आ रहे हैं

क्रिप्टो इन्वेस्टर्स का एक्सपोजर टोकनाइज्ड कॉपर और कॉपर से जुड़े real world asset (RWA) में अब भी लिमिटेड है। हालांकि, टोकनाइज्ड गोल्ड और सिल्वर की ट्रेडिंग डिमांड हाल ही में तेजी से बढ़ती नजर आई है।

कुछ शुरुआती इंडीकेटर्स दिखने लगे हैं। Ondo के टोकनाइज्ड Global X Copper Miners ETF (COPXON) की मार्केट कैपिटलाइजेशन जनवरी में बढ़ गई थी। COPXON ने अपनी पहली ही वीक में $3 मिलियन मार्केट कैप टच कर लिया।

Global X Copper Miners ETF (COPXON) मार्केट कैपिटलाइजेशन। स्रोत: Coingeko
Global X Copper Miners ETF (COPXON) मार्केट कैप। स्रोत: Coingeko

Remora Markets, जो Solana पर टोकनाइज्ड stocks की ट्रेडिंग के लिए एक प्लेटफार्म है, ने भी $110 मिलियन तक की रेवन्यू ग्रोथ रिपोर्ट की है। इसका मुख्य कारण टोकनाइज्ड NASDAQ stocks और मेटल्स से जुड़े assets की डिमांड में इजाफा है।

Copper rStock (CPERr) AUM समय के साथ। स्रोत: Dune
Copper rStock (CPERr) AUM समय के साथ। स्रोत: Dune

Remora मार्केट्स पर Copper rStock (CPERr) की कुल वैल्यू जनवरी के आखिरी हफ्ते में तेजी से बढ़ी। आंकड़े अभी भी छोटे हैं, लेकिन यह इस बात का शुरुआती संकेत हो सकता है कि क्रिप्टो निवेशक मेटल एसेट्स जैसे कॉपर में एक्सपोज़र लेना चाहते हैं।

टोकनाइजेशन भी एक ऐसा ट्रेंड है जिसे इंडस्ट्री लीडर्स 2026 में तेज़ी से बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं। इससे नई स्टार्टअप आइडियाज के मौके बन सकते हैं और ट्रेडर्स के लिए नए ऑप्शन खुल सकते हैं

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