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Silver शॉर्ट स्क्वीज: सिर्फ 14% फ्यूचर्स कवर हुए

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Oihyun Kim

29 जनवरी 2026 02:46 UTC
  • Silver ने बीते साल में 275% की जबरदस्त रैली दिखाई, $117 के पार ब्रेक किया, physical demand से warehouse में सप्लाई कम पड़ गई
  • Commercial traders के पास 231 मिलियन औंस का नेट शॉर्ट है, जो डिलीवरी के लिए उपलब्ध 108 मिलियन औंस से दोगुना है
  • मार्केट में लगातार बैकवर्डेशन के बीच longs की immediate delivery डिमांड के कारण फ्यूचर्स मार्च से जनवरी की तरफ रोल हो रहे हैं

Silver के फ्यूचर्स प्राइस 29 जनवरी को $117 के पार चले गए, जिससे बीते साल में 275% की ऐतिहासिक तेजी जारी रही। फिजिकल सप्लाई की जबरदस्त कमी इस उछाल को बढ़ा रही है। अब वेयरहाउस इन्वेंट्री सिर्फ 14% ओपन फ्यूचर्स पोजीशन्स को ही कवर कर पा रही है।

इन्वेंट्री की कमी, कॉमर्शियल शॉर्ट पोजीशन्स का बड़ा होना और कॉन्ट्रैक्ट रोल्स में असामान्य बैकवर्डेशन मिलकर क्लासिक शॉर्ट स्क्वीज को जन्म दे रहे हैं, जो रियल टाइम में होता दिख रहा है।

वेयरहाउस इन्वेंटरी पर दबाव

लेटेस्ट CME वेयरहाउस स्टॉक रिपोर्ट के अनुसार, 27 जनवरी तक COMEX-एप्रूव्ड डिपॉजिटरीज़ में टोटल सिल्वर होल्डिंग्स 411.7 मिलियन औंस रह गई है। इससे भी अहम बात है कि रजिस्टर्ड इन्वेंट्री—जो फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए तुरंत डिलीवरी के लिए उपलब्ध है—सिर्फ 107.7 मिलियन औंस तक गिर गई है।

रजिस्टर्ड स्टॉक्स में एक ही दिन में 4.7 मिलियन औंस की गिरावट आई। मेटल या तो वॉल्ट्स से निकाला गया या एलिजिबल स्टेटस में बदल दिया गया। एलिजिबल सिल्वर फ्यूचर्स डिलीवरी के लिए उपलब्ध नहीं होती।

152,020 कॉन्ट्रैक्ट्स (760 मिलियन औंस के बराबर) ओपन इंटरेस्ट के साथ, रजिस्टर्ड इन्वेंट्री सिर्फ 14.2% पेंडिंग पेपर क्लेम्स को ही कवर कर पा रही है। इसका मतलब है कि अगर थोड़ी सी फ्यूचर्स होल्डर्स ने फिजिकल डिलीवरी की डिमांड की, तो एक्सचेंज को जबरदस्त ऑपरेशनल प्रेशर झेलना पड़ सकता है।

Commercial शॉर्ट पोजिशन डिलीवेरेबल सप्लाई से ज्यादा

Commodity Futures Trading Commission (CFTC) Commitments of Traders रिपोर्ट के डेटा के अनुसार, 20 जनवरी को की गई सर्वे में शॉर्ट-साइड प्रेशर की गंभीरता सामने आई है।

कॉमर्शियल ट्रेडर्स—ज्यादातर बैंक और डीलर्स—90,112 कॉन्ट्रैक्ट्स शॉर्ट और सिर्फ 43,723 कॉन्ट्रैक्ट्स लॉन्ग रखते हैं। इनकी नेट शॉर्ट पोजीशन टोटल 46,389 कॉन्ट्रैक्ट्स यानि लगभग 231 मिलियन औंस की है।

यह नेट शॉर्ट पोजीशन डिलीवरी के लिए उपलब्ध 108 मिलियन औंस रजिस्टर्ड सिल्वर से भी दो गुना है। अगर लॉन्ग होल्डर्स फिजिकल सेटलमेंट के लिए आक्रामक हुए, तो शॉर्ट सेलर्स को मेटल जुटाने में मुश्किल होगी और प्राइस तेजी से बढ़ सकती है।

Backwardation और Backward Rolls मार्केट में तनाव का संकेत

silver मार्केट में अक्टूबर की शुरुआत से ही बैकवर्डेशन चल रहा है, यानी स्पॉट प्राइस फ्यूचर्स प्राइस से ऊपर है। यह प्राइसिंग बताता है कि फिजिकल डिमांड अभी सप्लाई पर भारी पड़ रही है—और आमतौर पर मार्केट में यह कंडीशन ज्यादा दिन तक टिकती नहीं है।

एनालिस्ट्स ने देखा है कि फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स मार्च से जनवरी या फरवरी से जनवरी तक रोल किए जा रहे हैं। यह असामान्य पैटर्न दिखाता है कि लॉन्ग होल्डर्स भविष्य की डिलीवरी का इंतजार करना नहीं चाहते।

सिर्फ जनवरी में, 9,608 कॉन्ट्रैक्ट्स यानी 48 मिलियन औंस फिजिकल डिलीवरी के लिए इश्यू किए जा चुके हैं, जो मौजूदा रजिस्टर्ड इन्वेंट्री का लगभग 45% है।

Solar इंडस्ट्री पर दबाव महसूस

सिल्वर की सप्लाई की समस्या लगातार बढ़ती इंडस्ट्रियल डिमांड के कारण और भी गंभीर हो गई है। अब सिल्वर कुल सोलर पैनल प्रोडक्शन कॉस्ट का 29% हिस्सा बन गया है, जो पिछले साल 14% था और 2023 में सिर्फ 3.4% था।

इस जबरदस्त बढ़ोतरी के कारण सिल्वर फोटovoltaic मैन्युफैक्चरिंग में सबसे बड़ा कॉस्ट फैक्टर बन चुका है, जो अब एल्युमिनियम, ग्लास और सिलिकॉन को भी पीछे छोड़ चुका है। चीन की बड़ी कंपनियां जैसे Trina Solar और Jinko Solar, निवेशकों को 2025 और 2026 में संभावित नेट लॉस को लेकर पहले ही चेतावनी दे चुकी हैं।

इसी के चलते Longi Green Energy ने घोषणा की है कि वह 2026 की दूसरी तिमाही से कॉपर-बेस्ड सोलर सेल्स का मैस प्रोडक्शन शुरू करेगी। हालांकि, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तरह की सब्स्टीट्यूशन प्रक्रिया में आम तौर पर कई साल लग जाते हैं। इसलिए फिलहाल फिजिकल सिल्वर की डिमांड मजबूत बनी रहेगी।

Gold की तुलना में स्थिर रहा

इसके उलट, गोल्ड में ऐसी कोई समस्या देखने को नहीं मिल रही है। COMEX गोल्ड वेयरहाउस स्टॉक्स 35.9 मिलियन आउंस हैं, जिसमें से 18.8 मिलियन रजिस्टर्ड हैं। ओपन इंटरेस्ट 528,004 कॉन्ट्रेक्ट्स (52.8 मिलियन आउंस) को देखते हुए, कवरज रेश्यो 35.7% है—जो सिल्वर के मुकाबले दोगुना है।

गोल्ड फ्यूचर्स अभी भी कंटैंगो में ट्रेड कर रहे हैं, यानी सामान्य मार्केट कंडीशन में फ्यूचर प्राइस स्पॉट प्राइस से ऊपर है। डेली इन्वेंटरी मूवमेंट भी बहुत कम रही है।

आगे क्या हो सकता है

सिल्वर मार्केट में स्ट्रक्चरल डेफिसिट—जो कि Silver Institute के अनुसार लगातार पांचवें साल जारी है—अभी भी ग्राउंड-स्टॉक (above-ground) को तेजी से घटा रहा है। लेस रेट्स ऊँचे हैं और ग्लोबल मार्केट्स में फिजिकल प्रीमियम्स भी बढ़ रहे हैं, जिससे आगे सिल्वर की प्राइस में बढ़ोतरी की संभावनाएं बनी हुई हैं।

हालांकि, ट्रेडर्स को यह ध्यान रखना चाहिए कि इतनी ज्यादा एक्सटेंडेड मार्केट में अगर प्रॉफिट-बुकिंग तेज हुई या एक्सचेंज ने पोजीशन लिमिट या मार्जिन बढ़ा दिया तो शार्प करेक्शन (तीव्र गिरावट) भी आ सकता है।

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