अमेरिका के 65% से ज्यादा एक्टिव क्रिप्टो ट्रेडर्स ने स्टेबलकॉइन पर यील्ड कमाने के लिए ऑन-चेन टूल्स का इस्तेमाल किया है। OKX की ओर से 1,000 लोगों के सर्वे के मुताबिक, इसमें से एक चौथाई से ज्यादा अब ये काम नियमित रूप से करते हैं।
अनुभवी ट्रेडर्स के लिए स्टेबलकॉइन पर ऑन-चेन यील्ड कमाना अब चुपचाप रोज़मर्रा की फाइनेंशियल प्रैक्टिस बन गई है।
ये कौन हैं और ये कमाई कैसे करते हैं
करीब दो-तिहाई प्रतिभागी 2023 से पहले ट्रेडिंग शुरू कर चुके थे, यानी वह कई मार्केट साइकिल्स देख चुके हैं। उनके पसंदीदा ट्रेडिंग स्ट्रैटेजीज़ से साफ है कि उद्देश्य प्रैक्टिकल है, सिर्फ़ सट्टा लगाने के लिए नहीं।
स्टेबलकॉइन पूल्स को लिक्विडिटी देना सबसे पॉपुलर तरीका है, जिससे लगभग 40% लोगों की रुचि है। सेंट्रलाइज्ड प्लेटफॉर्म्स पर स्टेकिंग दूसरे नंबर पर है, जिसमें 36% से ज्यादा ने दिलचस्पी दिखाई। DeFi प्रोटोकॉल्स के जरिए लेंडिंग लगभग हर पांच में से एक यूजर को आकर्षित कर रही है।
इन डेटा को मिलाकर देखें तो स्टेबलकॉइन यील्ड, एक्टिव ट्रेडर्स के लिए हर रोज़ पोर्टफोलियो इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसा काम करने लगा है।
Traders को चाहिए कंट्रोल, लेकिन टूल्स अब तक तैयार नहीं
89% प्रतिभागियों ने कहा कि वे ज्यादातर अपनी ट्रेडिंग खुद मैनेज करना पसंद करते हैं। इनमें से 51% चाहते हैं कि कुछ ऑटोमेशन के साथ उन्हें सेल्फ-मैनेजमेंट मिले। अन्य 38% हर फैसले पर पूरी तरह खुद कंट्रोल रखना चाहते हैं। सिर्फ 2% ही अपनी सारी जिम्मेदारी प्लेटफॉर्म को सौंपने के लिए तैयार हैं।
हालांकि, ऑन-चेन एक्सपीरियंस अभी तक ऑटोनॉमी की इस जरूरत से मेल नहीं खाता है। 29% लोगों ने सिक्योरिटी रिस्क्स और स्कैम्स को सबसे बड़ा रुकावट बताया। 25% लोगों की परेशानी यह है कि वे कोई अपरिवर्तनीय (irreversible) गलती कर सकते हैं। इसके अलावा मल्टीपल वॉलेट्स और एप्लिकेशन को मैनेज करने में 23% लोगों को दिक्कत आती है।
सीड फ्रेज मैनेजमेंट, रॉंग-क्लिक फाइनलिटी और बिखरे हुए इंटरफेस सिर्फ साइड की शिकायतें नहीं हैं। ये सभी उन ट्रेडर्स के एडॉप्शन पर सीलिंग हैं, जो पहले से ही डीप ऑन-चेन एक्सपोज़र लेना चाहते हैं।
ट्रेडर्स डेलीगेशन लाइन कहाँ ड्रॉ करते हैं
जब पूछा गया कि वे कौन सा काम एक्सचेंज को सौंपना चाहेंगे, तो प्रतिभागियों ने बिलकुल स्पष्ट सीमा बनाई। 24% ने बेस्ट-प्राइस रूटिंग को सबसे ऊपर रखा, इसके बाद 21% ने स्कैम डिटेक्शन को प्राथमिकता दी। 16% प्रतिभागियों को एक्सीक्यूशन टाइमिंग ऑप्टिमाइजेशन में रुचि थी, और 12% ने क्रॉस-चेन ब्रिजिंग को चुना।
सिर्फ 1% प्रतिभागियों ने कहा कि वे कोई भी कार्य डेलीगेट करना पसंद नहीं करेंगे।
यह बंटवारा पूरे डेटा में एक जैसा दिखता है: ट्रेडर्स रणनीतिक फैसले अपने पास रखते हैं और प्लेटफॉर्म्स से उम्मीद करते हैं कि वे ऑपरेशनल रिस्क लें।
Traders को जिस Gateway का इंतजार है
90% प्रतिभागियों ने उस मॉडल को पॉजिटिव रिस्पॉन्स दिया जिसमें सेंट्रलाइज्ड एक्सचेंज इन्फ्रास्ट्रक्चर और ऑन-चेन एक्सीक्यूशन को मिलाया गया हो। जब इसमें क्लियर रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क शामिल होते हैं, तो ये अपील और भी बढ़ जाती है।
एक-तिहाई से ज्यादा मानते हैं कि सेंट्रलाइज्ड एक्सचेंजेस ऑन-चेन मार्केट्स में एंट्री के लिए उनका मेन गेटवे बनेंगे। सिर्फ 16% ने कहा कि वे सीधे अपने टर्म्स पर डीसेंट्रलाइज्ड प्रोटोकॉल्स को एक्सेस करेंगे।
एक्टिव ट्रेडर्स के बीच ऑन-चेन एक्सपोज़र की मांग पहले से ही बड़े पैमाने पर मौजूद है। वे ऐसी एक्सपीरियंस का इंतजार कर रहे हैं, जहां सेफ्टी उनके कंट्रोल के साथ मेल खाती हो।