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यह नया ISO स्टैंडर्ड चुपचाप ग्लोबल फाइनेंस को बदल रहा है

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के द्वारा लिखा गया
Phil Haunhorst

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के द्वारा edit किया गया
Mohammad Shahid

31 मार्च 2026 16:58 UTC
  • SWIFT नवंबर 2026 से बिना स्ट्रक्चर्ड डेटा वाली पेमेंट्स रिजेक्ट करेगा
  • ISO 20022 अब पुराने formats की जगह structured, machine-readable data लेकर आया
  • अपग्रेड न करने वाले बैंकों को पेमेंट फेलियर और ज्यादा खर्च का रिस्क

ज्यादातर लोगों ने कभी ISO 20022 का नाम भी नहीं सुना होगा। यह एक ग्लोबल स्टैंडर्ड है, जिसका इस्तेमाल वित्तीय संस्थान पेमेंट की जानकारी एक-दूसरे तक भेजने के लिए करते हैं। पहली बार 2004 में पेश किया गया था और इसका उद्देश्य कई दशकों से बैंकिंग में चल रहे पुराने मेसेजिंग फॉर्मेट्स को रिप्लेस करना है।

पहले के सिस्टम्स में फ्री-टेक्स्ट फील्ड्स पर काफी निर्भरता थी। इसका मतलब था कि पेमेंट डिटेल्स को मैन्युअल तरीके से समझना पड़ता था, जिससे गलती और देरी की संभावना बढ़ जाती थी।

ISO 20022 इस परेशानी को सॉल्व करता है, क्योंकि इसमें स्ट्रक्चर्ड और मशीन-रीडेबल डेटा का इस्तेमाल होता है। हर जानकारी—जैसे नाम, एड्रेस और ट्रांजेक्शन डिटेल्स—एक फिक्स्ड फॉर्मेट में होती है। इससे सिस्टम्स खुद-ब-खुद पेमेंट्स प्रोसेस कर सकते हैं, जिससे एरर कम होते हैं और इंसानी दखल भी कम हो जाता है।

एक बदलाव जिससे सच में असर पड़ेगा

यह बदलाव पहले से ही शुरू हो चुका है। 22 नवंबर 2025 को SWIFT ने अपने पुराने MT पेमेंट मेसेजेज (जो 1970 के दशक से इस्तेमाल हो रहे थे) को रिटायर कर दिया।

हालांकि, ट्रांजिशन अभी पूरा नहीं हुआ है।

14 नवंबर 2026 से, SWIFT उन पेमेंट मेसेजेस को रिजेक्ट कर देगा जिनमें अब भी अनस्ट्रक्चर्ड एड्रेस डेटा होगा। यानी सभी बैंक्स को पूरी तरह से नए फॉर्मेट को अपनाना होगा, नहीं तो पेमेंट फेल होने का रिस्क रहेगा।

जो संस्थान देरी करेंगे, उन्हें इन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है:

  • ट्रांजेक्शन रिजेक्ट या डिले हो सकते हैं
  • मैन्युअल फिक्सेस की वजह से ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ सकती है
  • रेग्युलेटर्स की बढ़ी हुई निगरानी झेलनी पड़ सकती है

ग्लोबल पेमेंट्स में बड़ा बदलाव

ISO 20022 फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर में हो रहे एक बड़े बदलाव का हिस्सा है।

SWIFT जिस तरह डेटा को फॉर्मेट करता है, उससे संस्थान पेमेंट ज्यादा एफिशिएंटली प्रोसेस कर सकते हैं और नए मॉडर्न सिस्टम्स के साथ ज्यादा आसानी से इंटीग्रेट हो सकते हैं। इसमें ब्लॉकचेन-बेस्ड सेटलमेंट नेटवर्क्स जैसी नई टेक्नोलॉजी भी शामिल हैं, जो स्ट्रक्चर्ड और हाई-क्वालिटी डेटा पर ही निर्भर करती हैं।

अगर संस्थान ISO 20022 को सिर्फ एक न्यूनतम रेग्युलेटरी कंप्लायंस टास्क मानते हैं, तो वे बाकी संस्थानों से पीछे रह सकते हैं। वहीं जो संस्थान इस रिच डेटा का इस्तेमाल अपने ऑपरेशन्स को मॉडर्नाइज़ करने में करते हैं, वे एफिशिएंसी और स्केल में एडवांटेज पा सकते हैं।

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