दावोस, स्विट्ज़रलैंड में चल रही वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) एनुअल मीटिंग के लगभग चार दिन बाद, क्रिप्टो की सबसे मजबूत और लगातार थीम real world asset (RWA) की टोकनाइजेशन रही है।
यह इवेंट सोमवार, 19 जनवरी 2026 से शुरू हुआ और शुक्रवार, 23 जनवरी तक जारी रहेगा, जिसमें Binance के फाउंडर और पूर्व CEO Changpeng Zhao (CZ) भी शामिल हैं।
Davos 2026 में क्रिप्टो की सबसे बड़ी थीम बनी Tokenization
WEF से जुड़ी पब्लिकेशंस लगातार 2026 को डिजिटल एसेट्स के लिए “इन्फ्लेक्शन पॉइंट” बता रही हैं। उनका मानना है कि ब्लॉकचेन पायलट प्रोग्राम्स से आगे बढ़कर अब लाइव प्रोडक्शन में पहुंच चुका है।
फाइनेंशियल सिस्टम में डिजिटल एसेट्स की जगह को लेकर पुरानी बहसों पर लौटने के बजाय, Davos 2026 में फोकस इस बात पर रहा कि इन्हें कैसे इंटीग्रेट किया जा रहा है।
अब चर्चा आइडियोलॉजी और speculation से हटकर इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्केलेबिलिटी और इंटरप्राइज-ग्रेड deployment पर पहुंच गई है।
इस नजरिए से, टोकनाइजेशन को उस mechanism के रूप में देखा जा रहा है जिससे ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी धीरे-धीरे TradFi सिस्टम में शामिल हो रहा है।
यह बदलाव हाई-लेवल पैनल्स में साफ नजर आया, जैसे कि सेशन “Is Tokenization the Future?” और “Where Are We on Stablecoins?”
इन डिस्कशंस में Ripple CEO Brad Garlinghouse और Coinbase CEO Brian Armstrong जैसी बड़ी हस्तियां शामिल थीं। इसके अलावा European Central Bank के अधिकारी और प्रमुख फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन्स के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
पैनलिस्ट्स ने टोकनाइजेशन की खासियत को हाईलाइट किया कि कैसे पारंपरिक रूप से नॉन-लिक्विड एसेट्स (equities, bonds, funds, और real estate) को ऑन-चेन ट्रेडेबल बनाया जा सकता है। इसका मकसद फ्रैक्शनल ओनरशिप को बढ़ावा देना, liquidity बढ़ाना और cross-border settlement की friction कम करना है।
BlackRock, BNY Mellon, और Euroclear जैसी संस्थाएं अब बड़े पैमाने पर टोकनाइज्ड प्रोडक्ट्स लॉन्च कर रही हैं। इससे बैंकों और ब्लॉकचेन के बीच convergence का ट्रेंड दिखता है।
2025 में मिला रेग्युलेटरी क्लैरिटी, खासकर US और यूरोप के हिस्सों में, इस ट्रांजिशन का बड़ा कारण बताया गया।
Stablecoins ने भी एक जरूरी भूमिका निभाई, TradFi और DeFi सिस्टम्स के बीच कनेक्टिव टिशू के तौर पर। इन्हें अक्सर पहला असली यूनिवर्सल ब्लॉकचेन use case कहा जाता है। stablecoins को पेमेंट्स, ट्रेजरी मैनेजमेंट और ऑन-चेन settlement के लिए बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के तौर पर देखा जा रहा है।
अब ग्लोबल फ्रेमवर्क्स क्लियर हो रहे हैं, जिसमें US GENIUS Act जैसी रेफरेंस शामिल हैं। stablecoins को अब मौजूदा फाइनेंशियल सिस्टम के लिए कंप्लीमेंटरी के रूप में देखा जा रहा है, न कि disruptive के रूप में।
Tokenization अब पायलट प्रोजेक्ट्स से निकलकर ट्रिलियन्स-स्केल की फाइनेंशियल इन्फ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा
Davos में WEF के दौरान साझा किए गए नए डेटा ने टोकनाइज़ेशन के अवसर के पैमाने को उजागर किया। टोकनाइज़्ड RWA में टोटल वैल्यू लॉक्ड (TVL) अब $21 बिलियन के पार पहुंच गई है। इसका मतलब है कि क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में एडॉप्शन बढ़ रहा है और अलग-अलग एसेट क्लास भी ऑन-चेन आ रहे हैं।
लॉन्ग-टर्म प्रोजेक्शंस से इस ट्रेंड की ताकत का पता चलता है। McKinsey का अनुमान है कि टोकनाइज़्ड एसेट मार्केट 2030 तक $2 ट्रिलियन से $4 ट्रिलियन तक जा सकता है। वहीं, Boston Consulting Group ने और भी आक्रामक अनुमान दर्शाते हुए इसे $16 ट्रिलियन तक पहुँचने की संभावना बताई है।
इंडस्ट्री लीडर्स ने Davos में असली दुनिया में हो रही तरक्की को दिखाया। Ripple के CEO Brad Garlinghouse ने कहा कि कंपनी ग्लोबल बैंकों के साथ मिलकर टोकनाइज़ेशन और DeFi के बीच गैप को कम करने पर काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि XRP Ledger पर टोकनाइज़ेशन वॉल्यूम एक साल में $19 ट्रिलियन से बढ़कर $33 ट्रिलियन हो गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कंपनी का फोकस स्पेक्युलेटिव यूस केस के बजाय संस्थागत (institutional) स्तर के रेल्स बनाने पर है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स भी इसी बात को दोहरा रहे हैं। SWIFT ने कहा है कि इंटरऑपरेबल टोकनाइज़्ड एसेट्स ग्लोबल ट्रेड को बहुत तेज़ कर सकते हैं, फंसी हुई लिक्विडिटी को खोल सकते हैं और पारंपरिक फाइनेंस (TradFi) को डिजिटल फाइनेंस से बड़े पैमाने पर जोड़ सकते हैं।
Coinbase के CEO Brian Armstrong ने कहा कि टोकनाइज़्ड इक्विटीज पारंपरिक मार्केट्स का भविष्य हैं। क्रिप्टो के इस एक्सेक्यूटिव ने इन्हें स्टॉक मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर का स्वाभाविक विकास बताया, न कि सिर्फ क्रिप्टो का कोई प्रयोग।
Incumbent markets ने टोकनाइजेशन को कोर फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में अपनाया
यह नजरिया अब फाइनेंस की पुरानी संस्थाओं में भी लोकप्रिय हो रहा है। New York Stock Exchange (NYSE) टोकनाइज़्ड सिक्योरिटीज और 24/7 ट्रेडिंग को एक्स्प्लोर कर रहा है, वो भी बिना रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क बदलें।
NYSE का मकसद मार्केट का ढांचा मॉडर्न करना है, न कि स्पेकुलेशन को बढ़ावा देना। इसी बीच, Davos में शेयर किए गए डेटा से पता चला कि 65% से ज़्यादा टोकनाइज़्ड एसेट्स, जिसमें fiat-backed stablecoin भी हैं, अभी Ethereum पर इश्यू किए जा रहे हैं। इससे साफ है कि Ethereum उभरती टोकनाइज़्ड इकोनॉमी का सेंटर बन गया है।
कुल मिलाकर, Davos 2026 ने दिखाया कि टोकनाइज़ेशन अब कोई भविष्य की बात नहीं रही। यह अब ग्लोबल फाइनेंस के लिए वो मुख्य तरीका बन रहा है, जिससे क्रिप्टो मार्केट्स से जुड़ा जा रहा है— यानी अब इसे एक मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर के तौर पर देखा जा रहा है जो कैपिटल मार्केट्स को चुपचाप नया आकार दे रहा है।