पाकिस्तान द्वारा ट्रंप की ईरान डेडलाइन बढ़ाने के अनुरोध को लेकर ऑनलाइन विरोध की नई लहर बन रही है, जहां यूजर्स यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह कदम सच में स्वतंत्र था या नहीं।
चर्चा का केंद्र प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif की X पर की गई पोस्ट का एडिट इतिहास है। इसमें पुराने वर्शन के बाद एक और “ड्राफ्ट” वर्शन दिख रहा है, जिसमें दो हफ्ते की डेडलाइन बढ़ाने और Strait of Hormuz को फिर से खोलने की बात साफ-साफ लिखी है।
कुछ यूजर्स का कहना है कि इससे बैकग्राउंड में कुछ coordinate होने का इशारा मिलता है। थ्योरी सीधी है: अगर US डेडलाइन बढ़ाने को मान जाता है, तो उसे पाकिस्तान के अनुरोध के जवाब के रूप में दिखाकर Washington पर दबाव में झुकने का आभास नहीं होने दिया जाएगा।
लेकिन इस दावे को सपोर्ट करने के लिए कोई सबूत नहीं है। ना ही White House और ना ही पाकिस्तानी अधिकारियों ने किसी भी coordinate messaging strategy को लेकर कुछ कहा है।
फिर भी, टाइमिंग को लेकर शक बढ़ा है। यह पोस्ट ट्रंप की डेडलाइन से कुछ घंटे पहले आई — जब मोलभाव तेज हो चुका था और मार्केट की प्रतिक्रिया काफी तेज थी।
ऐसे अनिश्चित जियोपॉलिटिकल समय में, narratives जल्दी बनते हैं। फिलहाल, यह मामला सिर्फ अटकलों पर चल रहा है, न कि किसी पुष्टि पर।


