President Donald Trump ने 26 मार्च को कहा कि वह अगले 10 दिन के लिए Iran के energy infrastructure पर हमले रोक रहे हैं। नई डेडलाइन 6 अप्रैल तय की गई है, क्योंकि बातचीत जारी है। पहली नजर में यह राहत जैसा लग सकता है, लेकिन markets ने इसे इस नजरिए से नहीं देखा।
इसके बजाय, बॉन्ड मार्केट में तेज रिएक्शन देखने को मिला। US 10-year Treasury yield बढ़कर करीब 4.42% पहुंच गई, जिससे निवेशक आने वाले दिनों में ज्यादा inflation और सख्त financial conditions की उम्मीद कर रहे हैं।
यह बदलाव, सिर्फ़ हमले रोकने की हेडलाइन से ज्यादा मायने रखता है। इसका मतलब है कि पूरी economy में पैसे उधार लेना और भी महंगा हो रहा है।
आम अमेरिकियों के लिए असली असर यहीं से शुरू होता है।
ऊपर जाती Treasury yields जल्दी ही mortgage rates, कार लोन और क्रेडिट कार्ड की लागत बढ़ा देती हैं। Mortgage rates पहले ही हाल के उच्चतम स्तरों की तरफ बढ़ चुकी हैं, जिससे लोगों के लिए घर खरीदना या refinance करना और भी मुश्किल हो गया है।
साथ ही, Iran युद्ध की वजह से oil prices में तेजी बनी हुई है, जिससे पेट्रोल, ट्रांसपोर्ट और जरूरी सामान महंगा हो रहा है।
सरल तरीके से कहें तो, आम लोग दोनों तरफ से दबाव में आ गए हैं। जहां जीवन यापन की लागत बढ़ रही है, वहीं लोन लेना भी महंगा होता जा रहा है।
Federal Reserve अब मुश्किल स्थिति में है। एनर्जी से जुड़े inflation risk की वजह से rate कटने की संभावना कम होती जा रही है, जबकि growth भी स्लो हो रही है।
Markets ने पहले से ही rate cut की उम्मीदें घटानी शुरू कर दी हैं, जिससे financial conditions और भी टाइट हो गई हैं।
इस दबाव का असर पहले ही stocks में दिख रहा है।
S&P 500 ने सिर्फ एक दिन में ही सैकड़ों अरब $ वैल्यू खत्म कर दी, जबकि टेक-heavy indices और भी तेज़ी से गिरे हैं। हाई इंटरेस्ट रेट्स की वजह से कंपनियों के valuations गिर जाते हैं और businesses के लिए investment और growth मुश्किल हो जाती है।
क्रिप्टोकरेन्सी मार्केट भी इससे अछूता नहीं है। Bitcoin और दूसरे बड़े टोकन्स, broader risk assets की तरह ही मूव कर रहे हैं। जब yields बढ़ती हैं और liquidity टाइट होती है, तो इन्वेस्टर्स सबसे पहले volatile assets से दूरी बनाते हैं।
Trump का ये pause शायद escalation को थोड़ी देर के लिए टाल सकता है, लेकिन इससे market confidence वापस नहीं आया है।
अभी के लिए, मार्केट्स का संदेश साफ है। युद्ध का रिस्क अब युद्ध के मैदान से हटकर इकोनॉमी पर आ गया है, और इसका असर आम अमेरिकियों पर जल्दी महसूस हो सकता है।