जनवरी में एक एड्रेस पॉइजनिंग इंसिडेंट में एक यूजर के अपनी ट्रांजैक्शन हिस्ट्री से नकली मिलता-जुलता एड्रेस कॉपी करने के बाद लगभग $12.2 मिलियन का नुकसान हो गया।
यह मामला दिसंबर में हुई एक और बड़ी घटना के बाद सामने आया, जिसमें इसी तरह की तरकीब से करीब $50 मिलियन चोरी हो गए थे।
अब समय आ गया है कि हम इसे रोकें, क्या आप नहीं मानते?
Trust Wallet भी इससे सहमत है। कंपनी ने Address Poisoning Protection नाम की एक नई फीचर लॉन्च की है, जो ट्रांजैक्शन भेजने से पहले क्रिप्टो जगत की सबसे आम सोशल इंजीनियरिंग स्कैम्स में से एक को पहचानने के लिए बनाई गई है।
चलिए इसके बारे में बात करते हैं।
वो स्कैम जो आपकी keys नहीं चुराता
एड्रेस पॉइजनिंग एक सिंपल लेकिन प्रभावशाली अटैक है।
हमलावर बहुत ही कम वैल्यू वाली ट्रांजैक्शन एक ऐसे एड्रेस से वॉलेट में भेजते हैं, जो पीड़ित द्वारा पहले इस्तेमाल किए गए एड्रेस से काफी मिलता-जुलता होता है। यह फेक एड्रेस यूजर की ट्रांजैक्शन हिस्ट्री में दिखने लगता है।
बाद में, जब यूजर फंड्स ट्रांसफर करते समय अपनी हिस्ट्री या क्लिपबोर्ड से एड्रेस कॉपी करता है, तो गलती से वह हमलावर के एड्रेस को ही चुन सकता है।
यह अटैक प्राइवेट कीज चुराने के लिए किसी मॉलवेयर या फिशिंग पर निर्भर नहीं करता। यह पूरी तरह विजुअल सिमिलैरिटी और यूजर की रोजमर्रा की आदतों पर आधारित है।
फंड्स भेजने से पहले Lookalike एड्रेस पता करें
Trust Wallet का नया प्रोटेक्शन फीचर खासतौर पर तब एक्टिवेट होता है जब यूजर डेस्टिनेशन एड्रेस डालता या पेस्ट करता है।
जब कोई एड्रेस सेंड फील्ड में कॉपी किया जाता है, वॉलेट तुरंत उस एड्रेस को न जाने-पहचाने पॉइजनिंग पैटर्न्स और संदिग्ध मिलते-जुलते एड्रेस से मिलाता है। अगर सिस्टम को कोई एड्रेस यूजर की पहले की ट्रांजैक्शन के एड्रेस जैसा लगता है, तो वॉलेट यूजर को वार्निंग देता है।
यह फीचर एड्रेस की साइड-बाय-साइड तुलना भी दिखाता है और साफ तौर पर बताता है कि दोनों में फर्क कहां है। इससे यूजर ट्रांजैक्शन साइन करने से पहले आसानी से चेक कर सकते हैं कि डेस्टिनेशन एड्रेस सही है या नहीं।
ये चेक्स ऑटोमेटिकली सपोर्टेड चेन पर चलते हैं और नॉर्मल सेंड प्रोसेस के अंदर ही काम करते हैं। इसके लिए यूजर को कोई अलग से सिक्योरिटी सेटिंग एक्टिवेट करने की जरूरत नहीं होती।
सिर्फ static scam lists से आगे बढ़ें
कई वॉलेट्स पहले से ही ब्लॉकलिस्ट पर निर्भर रहते हैं, जिसमें मालिशियस एड्रेस शामिल होते हैं। चुनौती ये है कि पॉयजनिंग अटैक्स में अक्सर ऐसे नए एड्रेस शामिल होते हैं, जिन्हें अभी तक फ्लैग नहीं किया गया है।
Trust Wallet का तरीका रियल-टाइम इंटेलिजेंस फीड्स का इस्तेमाल करता है, और सिर्फ स्टैटिक डेटाबेस पर निर्भर नहीं रहता। ये सिस्टम HashDit और Binance Security से सिक्योरिटी डेटा, साथ ही Trust Wallet के अपने मॉनिटरिंग टूल्स को जोड़ता है।
इससे वॉलेट ऐसे पैटर्न पकड़ सकता है, जो इम्पर्सोनेशन की कोशिशें इंडिकेट करते हैं, न कि सिर्फ उन एड्रेस को ब्लॉक करता है जिन्हें पहले से रिपोर्ट किया गया है।
ये प्रोटेक्शन ट्रांजैक्शन साइन होने से पहले ट्रिगर हो जाता है, जो जरूरी है क्योंकि ब्लॉकचेन ट्रांसफर एक बार कंफर्म होने के बाद रिवर्स नहीं हो सकते।
Trust Wallet को मिली एक और खासियत
Address Poisoning Protection, Trust Wallet द्वारा पिछले कई सालों में बनाए गए सिक्योरिटी फ्रेमवर्क को और मजबूत बनाता है।
2023 में कंपनी ने Security Scanner लॉन्च किया था, जो ट्रांजैक्शंस को अप्रूव करने से पहले एनालाइज करता है। यह टूल ट्रांजैक्शन पैलोड की जांच करता है, जिससे फिशिंग कांट्रैक्ट्स, मालिशियस dApps, संदिग्ध टोकन अप्रूवल्स और अन्य हाई-रिस्क ऐक्टिविटी का पता चलता है।
लॉन्च के बाद से Security Scanner ने भारी नुकसान रोकने में मदद की है। Trust Wallet कहता है कि इस सिस्टम ने $458 मिलियन से ज्यादा की रकम को मालिशियस कांट्रैक्ट्स तक पहुंचने से रोका है, $2 मिलियन से ज्यादा चोरी हुए फंड्स रिकवर करवाए हैं, और सिर्फ 2025 में $191 मिलियन की स्कैम होने वाली ट्रांजैक्शन रोक दी गई हैं।
नया पॉयजनिंग प्रोटेक्शन फीचर ट्रांजैक्शन प्रोसेस के बिलकुल अलग स्टेज को टारगेट करता है।
Security Scanner यह जांचता है कि यूजर क्या साइन कर रहा है और ट्रांजैक्शन पैलोड में रिस्की बिहेवियर पकड़ता है। Address Poisoning Protection ये देखता है कि यूजर फंड्स किसको भेज रहा है, और ट्रांजैक्शन बनने से पहले ही इम्पर्सोनेशन अटैम्प्ट्स पकड़ता है।
ये दोनों सिस्टम्स मिलकर एक लेयरड डिफेंस मॉडल बनाते हैं, जो टेक्निकल एक्सप्लॉइट्स और ह्यूमन-टार्गेटेड स्कैम्स दोनों को पकड़ने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
यूज़र्स को आसान अटैक्स से कैसे बचाएं
आजकल के कई सक्सेसफुल अटैक्स अब स्मार्ट कांट्रैक्ट्स को हैक करने या क्रिप्टोग्राफी को ब्रेक करने पर निर्भर नहीं करते। अब ये यूजर बिहेवियर को टारगेट करने लगे हैं।
Address poisoning इसी कैटेगरी में आता है। ये ऐसे रेगुलर हैबिट्स का फायदा उठाता है जैसे ट्रांजैक्शन हिस्ट्री से एड्रेस कॉपी करना या पहचान में आने वाले स्ट्रिंग्स को सही मान लेना।
जो टूल्स ये पैटर्न्स जल्दी डिटेक्ट करते हैं, वे लॉस की बढ़ती कैटेगरी को रोकने में मदद कर सकते हैं।
Trust Wallet का लेटेस्ट अपडेट यही नया सिक्योरिटी प्रायोरिटी दिखाता है। आज यूजर्स को प्रोटेक्ट करना अब उन छोटी-छोटी ट्रिक्स को पहचानने तक बढ़ गया है, जिनका इस्तेमाल अटैकर रोजमर्रा के वॉलेट बिहेवियर को एक्सप्लॉइट करने में करते हैं।