यूनाइटेड किंगडम ने सभी क्रिप्टोकरेन्सी डोनेशंस पर पॉलिटिकल पार्टियों और अन्य रेग्युलेटेड संस्थाओं के लिए बैन लगा दिया है। सरकार का कहना है कि ट्रेस न होने वाले डिजिटल एसेट फंडिंग से खतरा है।
इसके अलावा, सरकार ओवरसीज इलेक्टर्स (UK इलेक्टोरल रजिस्टर पर रजिस्टर्ड विदेश में रहने वाले ब्रिटिश नागरिकों) के लिए पॉलिटिकल डोनेशंस पर सालाना £100,000 की लिमिट भी ला रही है। इसका मकसद यूके पॉलिटिक्स में विदेशी फंड्स के प्रवेश का रिस्क कम करना है।
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इन कदमों का फैसला इंडिपेंडेंट Rycroft Review के बाद लिया गया, जिसमें देश की पॉलिटिकल और इलेक्टोरल सिस्टम में विदेशी फाइनेंशियल इंटरफेरेंस की जांच की गई थी। दिसंबर 2025 में सेक्रेटरी ऑफ स्टेट Steve Reed ने इस रिव्यू को कमीशन किया था। पूर्व पर्मानेंट सेक्रेटरी Philip Rycroft ने इसका नेतृत्व किया।
“क्रिप्टोकरेन्सी डोनेशंस पर बैन बेहद जरूरी है। अब UK इस बढ़ते खतरे को खत्म करने में वर्ल्ड-लीडर बनेगा, और हम उन दुश्मन विदेशी स्टेट्स और दुसरे लोगों को रोकेंगे जो UK को कमजोर करने या नफरत फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। यह हमारा देशभक्ति का कर्तव्य है कि हम ब्रिटिश लोगों के अपने मनपसंद गवर्नमेंट चुनने के अधिकार की रक्षा करें,” सेक्रेटरी Reed ने कहा।
रिव्यू में निष्कर्ष निकला कि क्रिप्टोकरेन्सी का असली ओनरशिप पता करना मुश्किल है। इससे ये रिस्क बढ़ता है कि गलत इरादे रखने वाले डिजिटल एसेट्स के जरिए विदेशी या गुप्त डोनेशन दे सकते हैं।
सरकार इन बदलावों को Representation of the People Bill में संसोधन के रूप में लागू करेगी, जो रेट्रोस्पेक्टिव होंगे। जब कानून पास हो जाएगा तो पॉलिटिकल पार्टियों और रेग्युलेटेड संस्थाओं को किसी भी नॉन-कम्प्लाएंट डोनेशन को 30 दिनों के अंदर वापस करना होगा।
क्रिप्टो डोनेशन बैन तब तक लागू रहेगा, जब तक संसद और इलेक्टोरल कमिशन यह नहीं मान लेते कि रेग्युलेशन इतना मजबूत है कि “इस तरह के डोनेशन में कॉन्फिडेंस और ट्रांसपेरेंसी” बनी रहे।
यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब UK में क्रिप्टो का पॉलिटिकल इन्फ्लुएंस बढ़ रहा है। इंडस्ट्री लीडर्स ने हाल ही में BeInCrypto को बताया कि UK में क्रिप्टो वोटर्स का एक नया ब्लॉक उभर रहा है। इससे चुनाव के दौरान पॉलिटिकल पार्टियों पर डिजिटल एसेट पॉलिसी को गंभीरता से लेने का दबाव बढ़ सकता है।
“हमारे पास क्रिप्टो वोटर जैसा एक सेगमेंट है, और हमें पूरा भरोसा है कि ये आने वाले समय में और बड़ा मुद्दा बनेगा,” Adriana Ennab, UK डायरेक्टर, Stand With Crypto ने कहा।
अब UK में क्रिप्टो होल्डर्स की संख्या लाखों में है और एडवोकेसी ग्रुप्स का कहना है कि सख्ती से ओवरसीज में एक्टिविटी शिफ्ट होने का रिस्क है। ऐसे में यह बैन देश की नेशनल सिक्योरिटी प्राथमिकताओं और क्रिप्टोकरेन्सी सेक्टर के बढ़ते पॉलिटिकल इम्पैक्ट के बीच सीधी टकराव जैसी स्थिति बना रहा है।
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