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Vitalik Buterin ने EU के ‘No-Space’ डिजिटल रूल्स की आलोचना की

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Mohammad Shahid

26 दिसंबर 2025 19:31 UTC
  • Vitalik Buterin ने चेतावनी दी, EU का Digital Services Act विवादित आइडियाज के लिए जगह छोड़ने के बजाय इंटरनेट को बहुत ही सैनीटाइज़्ड बना सकता है
  • उन्होंने कहा कि रेग्युलेटर्स को नुकसानदायक कंटेंट के algorithmic amplification को लिमिट करना चाहिए, न कि इसे पूरी तरह मिटाने की कोशिश करनी चाहिए
  • डिबेट से privacy coins की narrative appeal बढ़ सकती है, जबकि EU रेग्युलेटरी एक्सेस अब भी सीमित है

Vitalik Buterin ने चेतावनी दी है कि European Union की रेग्युलेटरी अप्रोच, जो Digital Services Act के तहत है, ऑनलाइन कंट्रोवर्शियल स्पीच या प्रोडक्ट्स के लिए “कोई जगह नहीं छोड़ना” चाहती है, इससे pluralism कमजोर हो सकता है।

Ethereum के को-फाउंडर ने X पर एक डिटेल्ड पोस्ट में कहा कि एक फ्री सोसाइटी को उन आइडियाज को खत्म करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, जो उसे नुकसानदायक लगती हैं। उनकी राय में रेग्युलेटर्स को ऐसा कॉन्टेंट एल्गोरिदमिकली amplify होने और पब्लिक डिस्कोर्स पर डोमिनेट करने से रोकने पर फोकस करना चाहिए।

EU की “No-Space” अप्रोच का मतलब

Digital Services Act पूरे ऑनलाइन इकोसिस्टम पर लागू होता है। कोई भी सर्विस, जो EU यूज़र्स तक पहुंचती है, इस लॉ के दायरे में आती है, चाहे उसका साइज या लोकेशन कुछ भी हो। इसकी जिम्मेदारियां उसकी रीच और रिस्क के हिसाब से बढ़ती जाती हैं, लेकिन कोई भी प्लेटफॉर्म रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क से बाहर नहीं है।

इस डिजाइन का मकसद लीगल और टेक्निकल लूपहोल्स बंद करना है, जिनकी वजह से पहले प्लेटफॉर्म्स जिम्मेदारी से बच सकते थे।

क्रिटिक्स इसे “नो-स्पेस” अप्रोच कहते हैं, यानी डिजिटल गेप्स न रहें जहां नुकसानदायक कंटेंट बिना जवाबदेही के बच सके।

इसका मकसद ब्लैंकेट सेंसरशिप नहीं है। DSA का फोकस रिस्क असेसमेंट, ट्रांसपेरेंसी और प्लेटफॉर्म डिजाइन चॉइसेज पर है, जो कंटेंट के फैलने को प्रभावित करती हैं।

Buterin का कहना है कि सोशल प्लेटफॉर्म्स की असली कमी ये नहीं है कि फ्रिंज व्यूज मौजूद हैं, बल्कि ये है कि एल्गोरिदम्स अक्सर इन्हें बड़े पैमाने पर पुश कर देते हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि zero-tolerance वाली सोच से ओवररीच, कॉन्फ्लिक्ट और टेक्नोक्रेटिक enforcement पर बढ़ती dependency आ सकती है।

Buterin ने आगाह किया कि नापसंद आइडियाज को हटाने के लिए रोगाणु मान लेना एंटी-प्लूरलिस्टिक सोच दिखाता है। उनका कहना है कि ओपन सोसाइटी में असहमति होना स्वाभाविक है, और ऐसे कंट्रोवर्शियल व्यूज को पूरी तरह हटाने की कोशिश अकसर surveillance और enforcement पावर बढ़ा देती है।

उन्होंने यूज़र एम्पावरमेंट, ट्रांसपेरेंसी और कंपटीशन को ज़रूरी बताया। उनकी राय में प्लेटफॉर्म्स को नुकसानदायक कंटेंट को रीवार्ड देने वाले इंसेंटिव्स को कम करना चाहिए, बजाय इसे पूरी तरह से खत्म करने की कोशिश के।

Privacy Coins के लिए बुलिश संकेत?

इस डिबेट ने privacy coins जैसे Monero और Zcash पर भी ध्यान आकर्षित किया है।

जैसे-जैसे रेग्युलेटर्स प्लेटफॉर्म्स को बिहेवियर मॉनिटर करने और ज्यादा डेटा रखने के लिए पुश कर रहे हैं, यूज़र्स को ये एहसास हो रहा है कि बढ़ती निगरानी से उनका डेटा अधिक एक्सपोज हो सकता है।

इस वजह से ट्रेसेबिलिटी कम करने के लिए बने फाइनेंशियल टूल्स की बातें और मजबूत हो रही हैं।

मार्केट कैप के हिसाब से टॉप प्राइवेसी कॉइन्स। स्रोत: CoinGecko

हालांकि, इसका असर एक जैसा नहीं है। जहां प्राइवेसी कॉइन्स के लिए सोचने वाले लोगों की सपोर्ट बढ़ रही है, वहीं रेग्युलेटेड EU मार्केट्स में इनकी एक्सेस अब भी लिमिटेड है। एक्सचेंजेज़ लगातार इन्हें लिमिट या डीलिस्ट कर रहे हैं ताकि कंप्लायंस रिस्क को मैनेज किया जा सके।

सिंपल भाषा में अगर कहें, तो यूरोप का ये तरीका दिखाता है कि प्राइवेसी क्यों जरूरी है, हालांकि इससे ये भी साफ होता है कि प्राइवेसी-फोकस्ड टूल्स कहां काम कर सकते हैं, इसमें काफी मुश्किलें हैं।

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