एक यूज़र एक छोटा क्रिप्टो वॉलेट ओपन करता है, स्वैप बटन ढूंढता है लेकिन उसे नहीं पाता। फिर वो ऐप बंद कर देता है, कहीं और ट्रेड करता है और साथ में फी भी वहीं चली जाती है।
Yana Mar, Head of B2B and Partnerships, ChangeNOW ने Singapore में TOKEN2049 में उस मोमेंट को यूज़र एक्सपीरियंस और वॉलेट की रिटेंशन दोनों के लिए खराब बताया। यूज़र वॉलेट का कस्टमर तो रहता है, पर उस स्वैप की फी नहीं।
“कम्युनिटी खुद पे नहीं देती,” उन्होंने कहा।
जब यूज़र स्वैप करने के लिए जाता है, तो पैसा कहां जाता है?
Mar ने शुरुआत ये बताते हुए की कि यूज़र जो सिर्फ एसेट स्टोर करता है और जो ट्रांजैक्ट करता है, उनमें फर्क है। सिर्फ स्टोरेज करने से वॉलेट को कुछ नहीं मिलता।
“अगर यूज़र को स्वैप करनी है और ये फीचर वॉलेट में दिखता नहीं, तो वो कहीं और चला जाता है और फी भी वहीं चली जाती है,” उन्होंने कहा।
अगर वॉलेट अपने इकोसिस्टम से इनकम चाहती है, तो उसमें स्वैप, बाय और सेल फीचर, staking और ट्रेडिंग जैसी फैसिलिटीज जरूर होनी चाहिए। ये सभी टास्क ऐप के अंदर रखने से यूजर्स रुकते हैं और इन-ऐप एक्टिविटी बढ़ती है।
इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट दूसरी तरफ से प्रेशर बनाती है। Mar ने बताया कि छोटे वॉलेट्स के लिए ये बिल्ड और मेंटेन करना सबसे महंगा पड़ता है।
उनका एडवाइस छोटे टीम्स को यह है कि शुरुआत से सबकुछ बिल्ड करने की बजाय रेडीमेड सलूशंस जैसे fiat, swaps और staking को सीधे प्लग-इन करें।
जब बड़े वॉलेट्स सबकुछ देते हैं, तो छोटे वॉलेट्स कैसे जीत सकते हैं?
अभी के सबसे बड़े वॉलेट प्रोवाइडर्स stablecoin खऱ्चने से लेकर tokenized stock ट्रेडिंग तक सबकुछ ऑफर करते हैं, जिससे छोटे टीम्स के पास कम ऑप्शन रह जाते हैं। Mar का जवाब था – एक चीज पर फोकस करें।
“उन्हें कुछ स्पेसिफिक सोचना चाहिए, जैसे कोई खास ऑडियंस या खास रीजन,” Mar ने बताया।
उन्होंने पांच तरीके बताए जिनसे एक छोटा वॉलेट खुद को स्पेशल बना सकता है:
- एक खास क्षेत्र: किसी खास क्षेत्र में फोकस करने का मतलब है स्थानीय पेमेंट मेथड्स और लोकल सपोर्ट टीम जोड़ना।
- एक खास ऑडियंस: ऑडियंस फोकस Dreamster जैसा दिखता है, जो ChangeNOW Fast Track का पार्टिसिपेंट है और म्यूजिक फैन्स के लिए बना है। यूजर्स Digital Music Assets खरीदते हैं, इंडिविजुअल सॉन्ग्स में शेयर लेते हैं, और वॉलेट में ही उन्हें प्ले कर सकते हैं। किसी भी समय शेयर को बेच सकते हैं।
- एक खास वादा: एक पार्टनर ने अपनी पिच सिक्योरिटी के इर्द-गिर्द रखी है, जो Mar के मुताबिक मार्केट में बार-बार होने वाले हैक्स के चलते काफी अलग लगती है।
- स्पीड: एक छोटा टीम वह फीचर्स एक हफ्ते में लॉन्च कर सकती है, जिसके लिए बड़े वॉलेट को कई महीने या क्वार्टर लग सकते हैं।
- क्वालिटी: जैसे-जैसे प्रोडक्ट बड़ा होता है, यूजर एक्सपीरियंस पर असर पड़ सकता है, जिसे छोटी टीमें आसानी से मैनेज कर सकती हैं।
Zero-Fee Swaps: छोटे वॉलेट होल्डर्स को इनका पीछा क्यों नहीं करना चाहिए?
कुछ बड़े वॉलेट्स ने अपने खुद के fee को कुछ stablecoin swaps पर लेना बंद कर दिया है, लेकिन छोटे वॉलेट्स के लिए ऐसा करना आसान नहीं है।
Mar का मानना है कि ऐसे ऑफर को ध्यान से देखना जरूरी है। यह सिर्फ लिमिटेड नेटवर्क्स और कुछ कॉइन्स तक सीमित होता है। सिर्फ वॉलेट की अपनी fee को हटाया गया है, नेटवर्क fee अब भी लागू रहती है, और cross-chain swaps इसमें शामिल नहीं हैं।
“यह बड़े वॉलेट की मेन रेवेन्यू स्ट्रीम नहीं है, इसलिए वे इसे अफोर्ड कर सकते हैं,” उन्होंने बताया।
छोटे वॉलेट को अपने यूजर्स को जोड़ने के लिए वही चीज ऑफर करने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय, वह अलग यूजर एक्सपीरियंस दे सकता है – जैसे cross-chain swaps, और वे assets जिनको बड़े वॉलेट सही से लिस्ट या रूट नहीं कर पाते।
उन्होंने ये भी सवाल उठाया कि लेबल ज्यादा मायने रखता है या असली रिजल्ट। यूजर के नजरिए से देखा जाए तो, जरूरत इस बात की है कि आपको वॉलेट में क्या मिलता है – न कि सिर्फ fee कितनी है।
“यूजर्स असल में इस बात की फिक्र करते हैं कि उनके वॉलेट में क्या आता है, न कि सिर्फ zero-fee टैग की,” उन्होंने जोड़ा।
ChangeNOW में, उन्होंने कहा, 98% swaps लगभग 0.5% slippage के अंदर लैंड होती हैं।
इन-वॉलेट सपोर्ट: इसे कैसे डेलीगेट करें?
जब वॉलेट बिल्ट-इन exchange सर्विसेस पर निर्भर करता है तो सपोर्ट एक की-फैक्टर बन जाता है। जैसे ही ये फीचर्स लाइव होते हैं, सवाल उठता है कि जब लेनदेन फेल हो जाए तो यूजर की प्रॉब्लम कौन संभाले?
Mar ने इस पर साफ लाइन खींची। ट्रांजैक्शन के इशू का हल निकालना exchange प्रोवाइडर की जिम्मेदारी है, क्योंकि अच्छा सर्विस देना उसकी ड्यूटी है। वहीं, वॉलेट यूजर के साथ रिलेशनशिप के लिए जिम्मेदार है।
ChangeNOW के केस में, पार्टनर ट्रांजैक्शन ID भेजता है और ChangeNOW पता लगाता है कि क्या हुआ। यह तब भी लागू होता है जब यूजर ने खुद गड़बड़ी की हो – जैसे गलत नेटवर्क, गलत कॉइन या बिना memo के डिपॉज़िट भेजना।
“यूज़र वॉलेट सपोर्ट टीम के पास आता है, वॉलेट की सपोर्ट टीम हमारे पास आती है, और हम समस्या सॉल्व करने में मदद करते हैं,” उन्होंने कहा।
पहले दिन से कमाई कैसे शुरू करें?
ChangeNOW ने मार्च में नए और शुरुआती स्टेज के वॉलेट्स के लिए अपना Free Fast Track प्रोग्राम लॉन्च किया था। Mar ने बताया कि यह वॉलेट दो मुख्य चीजों की तलाश में रहते हैं: ट्रैफिक और प्रॉफिट, और यह प्रोग्राम उन्हीं में मदद करता है।
इस प्रोग्राम में पार्टिसिपेंट ChangeNOW का एक्सचेंज API इंटिग्रेट करता है और जैसे ही लाइव होता है, स्वैप्स से कमाई शुरू हो जाती है। हर बार जब कोई यूज़र स्वैप करता है, पार्टनर को रेवेन्यू का हिस्सा मिलता है, जो 0.4% से शुरू होता है।
ChangeNOW इसमें मार्केटिंग सपोर्ट भी देता है, जैसे क्रॉस-प्रमोशन, प्रेस रिलीज, पॉडकास्ट और TOKEN2049 जैसे इवेंट्स में मौजूदगी।
“उन्हें सिर्फ ऑडियंस और इंगेजमेंट की जरूरत है जिससे प्रॉफिट मिले,” Mar ने कहा।
वॉलेट टीम्स को क्या बंद कर देना चाहिए और क्या करना चाहिए
Mar की पहली सलाह वॉलेट टीम्स के लिए थी कि सिक्योरिटी को हमेशा टॉप प्रायोरिटी में रखें। उन्होंने कहा कि पिछले छह महीनों में इंडस्ट्री को लगभग $1 बिलियन का नुकसान हैकिंग से हुआ है, और हैक व स्कैम का डर हमेशा से ही बड़े पैमाने पर एडॉप्शन में रुकावट रहा है।
उनका आंकड़ा हाल के कुछ रिपोर्ट्स की तुलना में थोड़ा कम है। PeckShield के डेटा के मुताबिक सिर्फ सितंबर में ही $766.49 मिलियन का नुकसान हुआ, जिसमें Bitget ब्रिच लगभग $387 मिलियन की हिस्सेदारी रखता है।
“ऐसा प्रोडक्ट देना जरूरी है जिस पर लोग ट्रस्ट कर सकें। आप इसे इग्नोर नहीं कर सकते,” उन्होंने कहा।
उनका दूसरा सुझाव था कि हमेशा नए फीचर्स और प्रोडक्ट्स जोड़ते रहना चाहिए, क्योंकि आजकल लगभग हर वॉलेट में buy, sell और staking की सुविधा है। भीड़ में अलग दिखने का तरीका है यूज़र्स की जरूरत सुनना, भले ही पहली नजर में कोई रिक्वेस्ट फिट न लगे।
इसका मतलब ये नहीं कि सब कुछ खुद से बनाएं। Mar ने बताया कि बिलकुल शुरुआत से बनाना ज्यादा महंगा और मुश्किल है, वहीं थर्ड-पार्टी ट्रस्टेड प्रोवाइडर्स के रेडीमेड सॉल्यूशन्स से वॉलेट जल्दी और आसानी से नए फीचर्स जोड़ सकते हैं।
ChangeNOW के अपने प्रोडक्ट्स की लिस्ट भी इसी पैटर्न को फॉलो करती है। पार्टनर्स को सपोर्टेड किसी भी कॉइन में स्वैप प्रॉफिट मिल सकता है, इसलिए कंपनी ने ऑटो-कन्वर्जन USDT या उनकी पसंद की किसी और करेंसी में जोड़ दिया ताकि वोलैटिलिटी का रिस्क कम हो सके।
वॉलेट्स KYC और AML स्टॉप्स से जुड़े सपोर्ट केस हैंडल नहीं करना चाहते थे, इसलिए ChangeNOW ने प्री-चेक बनाया, जो उन डिपॉजिट्स को डिक्लाइन कर देता है जिनका पेआउट नहीं होगा। Mar के मुताबिक ऐसे केस लगभग जीरो हो गए।
Tron पर Gasless USDT स्वैप्स का फीचर भी इसी तरह की डिमांड पर आया। अगर कोई यूज़र USDT से Bitcoin स्वैप करना चाहता है, तो उसे गैस के लिए TRX की जरूरत पड़ती थी, जो कि खुद Mar ने भी फेस किया था। यह फीचर यूजर्स को Tron पर बिना गैस पे किए USDT भेजने देता है, जिससे यूज़र से एक्टिव स्वैप में कन्वर्शन बेहतर हो जाता है।
कुल मिलाकर, Mar के अनुसार छोटे वॉलेट के लिए वह माप मायने रखती है जो यूज़र को आखिर में मिलता है, न कि लेबल पर लिखा fee। उनके अनुसार, ChangeNOW की पार्टनर फीचर्स एक-एक करके यूज़र्स की डिमांड पर बनाई गई थीं ताकि यूज़र को स्वैप पूरा करने के लिए ऐप छोड़ना न पड़े। Mar का मानना है कि जब कोई वॉलेट प्राइस में बड़े प्रतिद्वंद्वी से मैच नहीं कर सकता, तब यहीं से उनके बिज़नेस की शुरुआत होती है।











