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तेज़ चेन की ओर बढ़ते Capital Markets, World Markets ने MegaETH पर लॉन्च किया

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Danijela Tomić

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Shilpa Lama

20 फ़रवरी 2026 12:16 UTC

सालों से, क्रिप्टो मार्केट्स में एक बड़ा गैप देखने को मिलता आया है। DeFi ने ओपन और ट्रांसपेरेंट ट्रेडिंग की शुरुआत की, वहीं ज्यादातर प्राइस डिस्कवरी अब भी सेंट्रलाइज्ड एक्सचेंजेस पर ही होती रही। इसकी मुख्य वजह इन्फ्रास्ट्रक्चर थी। ज्यादातर ब्लॉकचेन एप्लिकेशन्स चलाने पर फोकस करती थीं, ना कि हाई-स्पीड ट्रेडिंग पर। ऑर्डर बुक्स, टाइट स्प्रेड्स और रियल-टाइम हेजिंग के लिए तेज एक्सेक्यूशन और कम लागत चाहिए होती है — ये अब ज़रूरी हो चला है।

इतने बड़े वॉल्यूम्स पर इन्फ्रास्ट्रक्चर पर दबाव साफ महसूस होता है। DeFiLlama के मुताबिक, डीसेंट्रलाइज्ड परपैचुअल फ्यूचर्स मार्केट्स अब हर दिन लगभग $20–30 बिलियन का वॉल्यूम क्लियर कर रही हैं। वहीं, मंथली वॉल्यूम्स रेगुलरली $1 ट्रिलियन तक पहुंच रहे हैं, जो मार्केट कंडीशन्स पर निर्भर करता है।

जैसे-जैसे ये ट्रेंड तेज़ हो रहा है, MegaETH — एक हाई-परफॉर्मेंस Ethereum Layer 2, जिसे अल्ट्रा-लो लेटेन्सी और हाई थ्रूपुट के लिए डिज़ाइन किया गया है — अब लाइव हो चुका है। इस Layer 2 नेटवर्क पर 17 फरवरी को लॉन्च होने वाले पहले फ्लैगशिप एप्लिकेशन्स में से एक था World Markets — जो एक डीसेंट्रलाइज्ड ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है और स्पॉट ट्रेडिंग, परपैचुअल फ्यूचर्स और लेंडिंग को एक ही अकाउंट में यूनिफाई करता है।

नेटवर्क पर लॉन्च होने वाले पहले फुल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक होकर ये बता रहा है कि क्या परफॉर्मेंस-फोकस्ड चेन संस्थागत-स्टाइल मार्केट स्ट्रक्चर को ऑन-चेन सपोर्ट कर सकती हैं।

जब मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर से आगे निकल जाता है

DeFi की पहली वेव में ज्यादातर फोकस कंपोज़ेबिलिटी पर रहा। प्रोटोकॉल्स एक-दूसरे के ऊपर स्टैक हुए, लिक्विडिटी AMMs के बीच मूव हुई, और लेंडिंग मार्केट्स खूब चलीं।

लेकिन सीरियस ट्रेडिंग, यील्ड फार्मिंग से अलग होती है।

ऑर्डर बुक्स को लगातार अपडेट की जरूरत होती है। मार्केट मेकर्स को प्रिडिक्टेबल फीस चाहिए। हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स को ऐसा एक्सेक्यूशन चाहिए जो सेंट्रलाइज्ड वेन्यूज़ से सेकंड्स के फर्क में पीछे न रहे। लीवरेज जुड़ने पर छोटी से छोटी इनएफिशिएंसी का असर बड़ा हो जाता है।

यहीं पर ज्यादातर जनरल-पर्पज़ चेन को मुश्किल आई।

Base या Arbitrum जैसे नेटवर्क्स पर गैस फीस ट्रैफिक बढ़ने पर काफी ऊपर-नीचे होती रहती है। लेटेन्सी, भले स्वैप्स या NFT मिंट्स के लिए ठीक हो, लेकिन लीवरेज्ड डेरिवेटिव्स को मैनेज करते वक्त ये रियल इशू बन जाती है।

World Markets के फाउंडर Kevin Coons ने खुलकर कहा:

“अब तक किसी भी जनरल पर्पज़ चेन पर सफल DEX नहीं बन पाया है। दो आसान वजहें हैं — गैस और स्पीड। गैस कॉस्ट लगभग 100x तक ज्यादा हो सकती है। ज्यादा गैस कॉस्ट के चलते मार्केट मेकर्स टाइट स्प्रेड्स कोट नहीं कर पाते, जिसका मतलब है ऑन-चेन एक्सचेंजेस Binance जैसे एक्सचेंज से कम्पीट नहीं कर पाते, लेकिन अब ऐसा हो सकता है।”

भले कोई 100x वाले तुलना से सहमत हो या नहीं, बड़ी बात यही है: टाइट स्प्रेड्स और फास्ट एक्सेक्यूशन कैपिटल मार्केट्स में ऑप्शनल नहीं, बल्कि जरूरी हैं। ये उसकी बुनियाद हैं।

Coons के अनुसार:

“स्पीड भी मायने रखती है। Binance के रेंज में होना ऑन-चेन प्राइस डिस्कवरी के लिए जरूरी है। MegaETH पहली चेन है जहां यह मुमकिन है।”

उनका ये स्टेटमेंट एक बड़े ट्रेंड को दिखाता है। अगर डीसेंट्रलाइज्ड मार्केट्स को कंपटीशन में आना है, तो सिर्फ ट्रांसपेरेंट ही नहीं, बल्कि एफिशिएंट भी होना पड़ेगा।

MegaETH और परफॉर्मेंस चेन की बढ़त

MegaETH ने खुद को पहले के Ethereum स्केलिंग प्रयासों से बिल्कुल अलग पोजीशन किया है।

सिर्फ़ सस्ता गैस पर फोकस करने के बजाय, यह प्रोजेक्ट परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स पर ध्यान देता है जो सेंट्रलाइज्ड सिस्टम्स के करीब हैं, जिसमें बहुत हाई थ्रूपुट और कम कन्फर्मेशन टाइम शामिल है। इस प्रोजेक्ट ने पब्लिकली ऐसे स्ट्रेस टेस्ट का ज़िक्र किया है, जिनमें मेननेट लॉन्च से पहले ही अरबों ट्रांजेक्शंस प्रोसेस की गई हैं।

ऑफिशियल डॉक्युमेंट्स और इकोसिस्टम मटेरियल खासतौर पर लेटेंसी-सेंसिटिव यूज़ केसेस जैसे ऑर्डर बुक्स और गेमिंग के लिए एक्सीक्यूशन स्पीड को हाइलाइट करते हैं।

यह तरीका दूसरी जगह भी दिखाई देता है। Hyperliquid, जो ट्रेडिंग-फोकस्ट एनवायरनमेंट है, उन सबसे एक्टिव परपैचुअल फ्यूचर्स वेन्यूज में से एक बन गया है, जो ऑनचेन डेली वॉल्यूम में अक्सर अरबों डॉलर क्लियर करता है।

मुख्य बात यह है कि मार्केट्स उन इन्फ्रास्ट्रक्चर की ओर खिंचाव महसूस करती हैं जो खासतौर से ट्रेडिंग वर्कलोड्स के लिए बने हैं। जनरल-पर्पज़ चेन गायब नहीं हो रही हैं, लेकिन कैपिटल मार्केट्स अब ऐसे एनवायरनमेंट्स की तरफ मूव कर रहे हैं जो फाइनेंशियल थ्रूपुट को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किए गए हैं।

World Markets क्या बदलने की कोशिश कर रहे हैं

World Markets ने इस एनवायरनमेंट में यूनिफाइड मार्जिन के स्ट्रक्चरल डिज़ाइन के साथ एंट्री की है।

ट्रेडर्स को अपना कैपिटल अलग-अलग स्पॉट मार्केट्स, परपैचुअल फ्यूचर्स और लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स में बांटने की ज़रूरत नहीं है, बल्कि इस सिस्टम में सबकुछ एक ही पोर्टफोलियो के तहत रखा जाता है।

सुनने में यह आसान लगता है, लेकिन असल में यह उन स्ट्रैटेजीज़ के लिए रास्ता खोलता है, जो पहले ऑनचेन मुश्किल थीं—जैसे बेसिस ट्रेड्स, जो बॉरो रेट्स और परपैचुअल फंडिंग रेट्स के बीच के स्ट्रक्चरल गैप का फायदा उठाते हैं।

पारंपरिक DeFi में कैपिटल अक्सर टुकड़ों में बंटा और ज़्यादा ओवरकोलेटरलाइज़्ड रहता है, जिससे ट्रेडर्स को बॉरोइंग, हेजिंग और एक्सीक्यूशन अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर करना पड़ता है, और अरबों डॉलर का कैपिटल या तो निष्क्रिय या लॉक पड़ जाता है क्योंकि इन्फ्रास्ट्रक्चर ने ये फंक्शंस कभी कंसोलिडेट नहीं किए।

World Markets इस सबको कंसोलिडेट करने की कोशिश करता है। प्लेटफॉर्म का ATLAS रिस्क इंजन पोर्टफोलियो-लेवल मार्जिनिंग और अंडरकोलेटरलाइज़्ड लेंडिंग की सुविधा देता है – ये फीचर्स आमतौर पर प्राइम ब्रोकर मॉडल्स में देखने को मिलते हैं, DeFi के शुरुआती प्रोटोकॉल्स में नहीं।

पारंपरिक फाइनेंस में, हेज फंड्स कंसोलिडेटेड अकाउंट्स के तहत ऑपरेट करते हैं, जिसमें रिस्क पोर्टफोलियो लेवल पर आंका जाता है। DeFi में अब तक ऐसा नहीं हुआ है।

World Markets ऑनचेन प्राइम ब्रोकर-स्टाइल कैपिटल मैनेजमेंट को दोहराने की कोशिश कर रहा है, जिससे ट्रेडर्स को वो स्ट्रक्चर मिल सके जो आमतौर पर सिर्फ़ इंस्टीट्यूशनल डेस्क्स के लिए रिज़र्व थे।

Liquidations और रिस्क पर नया नजरिया

लीक्विडेशन मैकेनिक्स लेवरेज्ड ट्रेडिंग के सबसे विवादित हिस्सों में से एक हैं।

ज्यादातर exchanges, चाहे वो सेंट्रलाइज्ड हों या डिसेंट्रलाइज्ड, ऐसे ऑटोमेटेड सिस्टम्स पर निर्भर करते हैं जो थ्रेशोल्ड ब्रेक होने पर पोजीशंस को क्लोज कर देते हैं। ये सिस्टम्स सॉल्वेंसी के लिए ज़रूरी हैं, लेकिन कभी-कभी ट्रेडर के डिस्क्रेशन से ऊपर चले जाते हैं।

World Markets अपना मॉडल अलग तरह से फ्रेम करता है। Coons का मानना है:

“सोफिस्टिकेटेड ट्रेडर्स के पास हाई लीवरेज पोर्टफोलियो होते हैं। वे हेजिंग के जरिए रिस्क कम करते हैं… exchanges अभी इन लॉसेस को अपने यूज़र्स में सोशलाइज़ कर देते हैं, क्योंकि उनकी पोजीशंस क्लोज हो जाती हैं। World Markets में आप अपने रिस्क के ऊपर पूरी कंट्रोल रखते हैं। हम आपके लिए आपका रिस्क तय नहीं करते।”

इस आइडिया का मकसद ट्रेंडर्स को काउंटरपार्टी एक्सपोज़र पर ज्यादा डायरेक्ट कंट्रोल देना है, ताकि हमेशा एक्सचेंज द्वारा की गई फोर्स्ड लिक्विडेशन पर निर्भर न रहना पड़े।

ये मॉडल स्केल हो पाएगा या नहीं, यह एडॉप्शन और लिक्विडिटी डेप्थ पर निर्भर करेगा। लेकिन स्ट्रक्चरली, यह सख्त और साइलो वाली लिक्विडेशन लॉजिक से हटकर पोर्टफोलियो-बेस्ड रिस्क मैनेजमेंट की ओर इशारा करता है।

On-chain मार्केट्स किस दिशा में बढ़ रहे हैं

अगर बड़ा नजरिया देखें, तो यह समय सिर्फ किसी एक प्लेटफॉर्म से बड़ा है। डिसेंट्रलाइज्ड मार्केट्स अब उस जनरल-पर्पस इन्फ्रास्ट्रक्चर से आगे बढ़ रहे हैं, जिन पर वे शुरुआत में बने थे। DeFi का पहला फेज एक्सेस और कम्पोजिबिलिटी पर केंद्रित था। अब अगले फेज में कैपिटल एफिशिएंसी, बेहतर एक्सीक्यूशन क्वॉलिटी और ऐसा मार्केट स्ट्रक्चर जरूरी है जो असली ट्रेडिंग वॉल्यूम को संभाल सके।

Messari के 2025 डेरिवेटिव्स रिसर्च के अनुसार, परचुअल फ्यूचर्स वॉल्यूम के हिसाब से DeFi का सबसे बड़ा सेगमेंट बन गया है और कुल ऑन-चेन एक्टिविटी में इनका बड़ा हिस्सा है।

इस लेवल पर, अच्छा परफॉर्मेंस ऑप्शनल नहीं रह जाता। सेंट्रलाइज्ड वेन्यूज से कॉम्पिटिशन के लिए तगड़े स्प्रेड, फास्ट एक्सीक्यूशन और गहरी लिक्विडिटी चाहिए होती है, और ये सब उसी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर डिपेंड करते हैं जो खासतौर पर फाइनेंशियल वर्कलोड्स के लिए डिजाइन किया गया हो।

MegaETH खुद को इस बदलते ट्रेंड के साथ एडजस्ट कर रहा है, और World Markets की लॉन्चिंग मार्क कर रही है सबसे शुरुआती कोशिशों में से एक, जिसमें पूरी तरह इंटीग्रेटेड ट्रेडिंग स्टैक— जिसमें सेंट्रल लिमिट ऑर्डर बुक भी है—ऐसे इन्फ्रास्ट्रक्चर पर चलता है जो हाई-स्पीड फाइनेंशियल एक्सीक्यूशन के लिए खास डिजाइन किया गया हो। यह DeFi के मैच्योर होने का संकेत है, जहां चेन खुद एक स्ट्रैटेजिक चॉइस बन जाती है जो कैपिटल मार्केट्स की डिमांड से मेल खाती है।

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