XRP प्राइस हाल ही के सेशन्स में ज्यादातर स्थिर रहा है, जबकि रिपोर्ट्स में ये सामने आया कि Goldman Sachs के पास XRP ETF में $150 मिलियन से ज्यादा की हिस्सेदारी है। इस ख़ुलासे ने कुछ समय के लिए ये नैरेटिव मजबूत किया कि XRP में इंस्टीट्यूशनल इंटरेस्ट बढ़ रहा है। लेकिन अगर हम ETF फ्लो, ऑन-चेन एक्टिविटी, और मार्केट पार्टिसिपेशन को बारीकी से देखें, तो पूरी तस्वीर थोड़ी जटिल है।
भले ही एक बड़ी बैंक ने बड़ी पोजीशन बनाई है, लेकिन XRP लिक्विडिटी को चलाने वाले ज्यादा बड़े इन्वेस्टर्स की कमिटमेंट कमजोर होती दिख रही है।
ETF फ्लो में भरोसा कमज़ोर पड़ रहा है
XRP ETF में इंस्टीट्यूशनल पार्टिसिपेशन उतना बड़ा नहीं है जितना कई हेडलाइंस में बताया गया है।
रेग्युलेटरी डिस्क्लोजर्स के मुताबिक, 83 इंस्टीट्यूशनों ने 13F फाइलिंग्स के जरिए XRP ETF एक्सपोजर रिपोर्ट किया है, जिनकी कुल होल्डिंग्स करीब $211 मिलियन की है। इसमें सबसे बड़ा सिंगल पोजीशन Goldman Sachs के पास है, जिसके पास कई XRP ETF प्रोडक्ट्स में $150 मिलियन से ज्यादा है।
ये फाइलिंग्स 31 दिसंबर 2025 की पोजीशन्स को रिफ्लेक्ट करती हैं, जो अब तक की सबसे लेटेस्ट रिपोर्टिंग स्नैपशॉट है। हालांकि, XRP ETF में इंस्टीट्यूशनल शेयर अभी भी काफी कम है। ये डिस्क्लोजर मार्च में दोबारा चर्चा में आया जब XRP प्राइस को दोबारा मोमेंटम हासिल करने में मुश्किल हो रही थी।
उस समय की फाइलिंग स्नैपशॉट के अनुसार, XRP ETF के पास टोटल $1.20 बिलियन की एसेट्स थीं। इसका मतलब सिर्फ 16% ETF कैपिटल ही सीधे उन इंस्टीट्यूशनों से जुड़ा है जिन्हें 13F डिस्क्लोजर फाइल करनी होती है।
बाकी 84% ETF कैपिटल उन पार्टिसिपेंट्स से आती है जो इन फाइलिंग्स में नहीं दिखते। इसमें छोटे एडवाइजरी फर्म, फैमिली ऑफिस, रिटेल ब्रोकरेज इन्वेस्टर्स और अन्य मार्केट प्लेयर्स आते हैं, जिनकी रिपोर्टिंग $100 मिलियन के नीचे है।
क्योंकि ये इन्वेस्टर्स ETF कैपिटल का बड़ा हिस्सा बनाते हैं, इसलिए वे ETF फ्लो के डायरेक्शन में भी ज्यादा रोल निभाते हैं। लेटेस्ट फ्लो डेटा दिखाता है कि इनकी रूचि अब तेज़ी से कम हो रही है।
मार्च अब XRP ETF के इतिहास का पहला नेगेटिव महीना बन गया है (डेटा फिलहाल डेवेलप हो रहा है), जिससे पिछले साल के एंड में आए तेज़ इनफ्लो के बाद लगातार मंदी का ट्रेंड जारी है।
स्पॉट मार्केट इंडीकेटर्स से ट्रेंड को मजबूती
एक महत्वपूर्ण इंडिकेटर है Chaikin Money Flow (CMF)। यह मैट्रिक प्राइस मूवमेंट और ट्रेडिंग वॉल्यूम को मिलाकर बायिंग और सेलिंग प्रेशर को मापती है। जब CMF ज़ीरो से ऊपर जाता है, तो इसका मतलब है कि बड़ी रकम की अक्युमिलेशन (मुमकिन है ETFs की वजह से) हो रही है, यानी बायर्स का ट्रेडिंग में दबदबा है। जब यह ज़ीरो से नीचे जाता है, तो यह डिस्ट्रिब्यूशन इंडिकेट करता है, जिसमें सेलर्स वॉल्यूम को कंट्रोल करते हैं।
XRP/USD Coinbase चार्ट पर, CMF ने 7 जनवरी को पीक किया था। तब से, प्राइस और CMF दोनों में लगातार गिरावट आ रही है। 11 मार्च तक, CMF लगभग –0.10 तक गिर गया है, जो पूरी तरह से ज़ीरो लाइन से नीचे है। यह पहले ट्रैक की गई कमज़ोर ETF फ्लो से भी मेल खाता है। क्योंकि रिटेल जैसे इन्वेस्टर्स ETF मार्केट का 84% हिस्सा बनाते हैं, इसलिए CMF में कमजोरी का मुख्य कारण ये निवेशक ही हैं।
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इसका मतलब है कि मार्केट में लगातार सेल-ऑफ़ प्रेशर बना हुआ है, न कि अक्युमिलेशन (अधिकतर छोटे ग्रुप्स की ओर से)। खास तौर पर, वही इन्वेस्टर्स ग्रुप जो ETF में डोमिनेट करता है—छोटे non-13F पार्टिसिपेंट्स—मुमकिन है कि वही स्पॉट एक्सचेंजेज़ पर भी ट्रेड करते हैं। इसका मतलब है कि कमजोर CMF इस बड़े इन्वेस्टर बेस की घटती रुचि को इंडिकेट कर सकता है।
नुकसान में बढ़ती सप्लाई और DEX एक्टिविटी में गिरावट से निवेशकों की उदासीनता झलकती है
ऑन-चेन डेटा एक्स्ट्रा क्लू देता है कि पार्टिसिपेशन क्यों स्लो हो रहा है। Glassnode के मुताबिक, कुल XRP सर्क्युलेटिंग सप्लाई, जो फिलहाल लॉस में है, वह करीब 37.9 बिलियन कॉइन्स तक पहुंच गई है। सप्लाई इन लॉस यह दिखाता है कि कितने टोकन्स अपनी आखिरी ट्रांसफर प्राइस से ऊँचे करंट मार्केट वैल्यू पर नहीं बिक पाए हैं।
जब यह मैट्रिक बढ़ती है, तो इसका मतलब है कि ज्यादा इन्वेस्टर्स अप्रीक्षित नुकसान में अपने कॉइन्स को होल्ड कर रहे हैं।
अभी का रीडिंग 7 जुलाई 2024 के बाद सबसे हाई लेवल दिखा रही है, जब सप्लाई इन लॉस थोड़े समय के लिए करीब 39.05 बिलियन XRP तक पहुँची थी।
नुकसान में बैठे बड़े होल्डर्स क्लस्टर अक्सर मार्केट एक्टिविटी को कम कर देते हैं। ऐसे इन्वेस्टर्स आमतौर पर वेट करते हैं, एक्टिव ट्रेडिंग में हिस्सा नहीं लेते। नेटवर्क एक्टिविटी भी इसी बिहेवियर को दिखा रही है।
साल की शुरुआत से अब तक DEX ट्रांजैक्शन काउंट लगभग 713,335 ट्रांजैक्शन पर आ गई है, जो 2026 में अब तक का सबसे कम स्तर है।
डिसेंट्रलाइज्ड एक्सचेंज आमतौर पर सेल्फ कस्टडी यूजर्स और क्रिप्टो-नेटिव ट्रेडर्स की एक्टिविटी को कैप्चर करते हैं, जो सीधे ब्लॉकचेन नेटवर्क्स से इंटरैक्ट करते हैं। DEX एक्टिविटी में गिरावट यह दर्शाती है कि सिर्फ ETF मार्केट में ही नहीं, बल्कि डिसेंट्रलाइज्ड ट्रेडिंग एनवायरनमेंट में भी भागीदारी कम हो रही है।
राइजिंग लॉसेस और घटता ट्रांजैक्शन लेवल दोनों मिलकर XRP इकोसिस्टम में ब्रॉडर स्लोडाउन की ओर इशारा करते हैं।
XRP प्राइस गिरते चैनल में फंसी हुई
XRP प्राइस स्ट्रक्चर भी इसी सतर्क सेंटीमेंट को दर्शाता है। 12-घंटे के चार्ट पर, XRP 15 फरवरी से एक डिसेंडिंग पैरलल चैनल के अंदर ट्रेड कर रहा है, जो आमतौर पर लगातार सेलिंग प्रेशर का संकेत देता है।
इस चैनल के अंदर कई अहम प्राइस लेवल्स मौजूदा मार्केट स्ट्रक्चर को डिफाइन करते हैं। सबसे बड़ा रेजिस्टेंस करीब $1.47 के पास है, जो डिसेंडिंग चैनल की अपर बाउंड्री से मेल खाता है। इस लेवल के ऊपर कंफर्म ब्रेकआउट का मतलब होगा कि स्ट्रक्चर में बदलाव आ रहा है और खरीदार फिर से कंट्रोल में हैं।
जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक नीचे जाने का रिस्क ज्यादा रहेगा।
फिलहाल, सबसे अहम XRP प्राइस सपोर्ट $1.22 के पास है, जो 0.618 फिबोनाच्ची रिट्रेसमेंट लेवल से मेल खाता है।
अगर $1.22 का लेवल टूटता है, तो अगला डीप डाउनसाइड टारगेट $1.15 और $1.07 के पास नजर आ सकता है।
फिलहाल, कमजोर ETF फ्लो, घटती मनी-फ्लो मोमेंटम और घटती नेटवर्क एक्टिविटी ये इशारा करती हैं कि XRP मार्केट अब भी मजबूत डिमांड की तलाश में है, ताकि कोई सस्टेन्ड रिकवरी शुरू हो सके।