Zcash (ZEC) ने 8 जनवरी को तेज़ सेल-ऑफ़ के बाद वापसी की, जिसकी वजह इसके कोर डेवलपमेंट टीम को लेकर चिंता थी।
Electric Coin Company (ECC) लीडरशिप की नई सफाई के बाद रिकवरी आई, जिससे प्राइवेसी-फोकस्ड ब्लॉकचेन को छोड़े जाने की आशंकाएं कम हुईं।
ECC की सफाई से Exit को लेकर नया नजरिया
ZEC प्राइस 20% से ज्यादा गिर गई थी और कुछ देर के लिए $390 से नीचे आ गई, फिर $430 के ऊपर रिकवर हुई।
गिरावट के दौरान ट्रेडिंग वॉल्यूम तेजी से बढ़ गई, जिससे ऐसा लगा कि यह फोर्स्ड सेलिंग हेडलाइन रिस्क के कारण थी, न कि प्रोटोकॉल फंडामेंटल में किसी बदलाव के कारण।
यह सेल-ऑफ़ ECC के CEO Josh Swihart के पहले के स्टेटमेंट के बाद हुई थी। उन्होंने कहा कि पूरी ECC टीम ने “constructive discharge” के चलते, Bootstrap nonprofit बोर्ड के साथ गवर्नेंस विवादों के कारण छोड़ दिया था।
इस पहली खबर के बाद चिंता बढ़ गई कि Zcash ने अपनी कोर डिवेलपर्स टीम खो दी है।
हालांकि, बाद में उसी दिन आई स्पष्टीकरण ने सिचुएशन को नया फ्रेम दिया। Swihart ने कहा टीम पूरी तरह Zcash को कमिटेड है और अब नए स्टार्टअप स्ट्रक्चर के तहत काम कर रही है।
साथ ही, उन्होंने जोर देकर कहा कि यह बदलाव nonprofit गवर्नेंस की स्ट्रक्चरल लिमिट्स की वजह से था। यह प्रोजेक्ट से बाहर जाने का फैसला नहीं था।
इस सफाई में यह भी साफ़ कहा गया कि Zcash प्रोटोकॉल पहले जैसा ही है और पूरी तरह ऑपरेशनल है।
कोई कंसेंसस रूल, क्रिप्टोग्राफिक सिस्टम, या नेटवर्क इन्फ्रास्ट्रक्चर में बदलाव नहीं हुआ है।
Zcash गवर्नेंस विवाद, प्रोटोकॉल संकट नहीं
यह विवाद गवर्नेंस और ऑर्गनाइज़ेशनल कंट्रोल को लेकर है, टेक्निकल डिवेलपमेंट को लेकर नहीं। ECC स्टाफ ने Zcash डिवेलपमेंट को संभाल रहे nonprofit स्ट्रक्चर से बाहर आकर एक नई कॉरपोरेट एंटिटी में वही टीम, मिशन और रोडमैप रखा है।
इसी डिफरेंस को शुरुआती मार्केट रिएक्शन में नजरअंदाज कर दिया गया। पहले ऐसा लगा कि यह मास रेजिगनेशन या प्रोजेक्ट में ब्रेकडाउन है, जिससे सेलिंग प्रेशर बढ़ गया।
जैसे-जैसे और जानकारी आई, सेंटिमेंट में स्थिरता आई।
कई इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने शुरुआती narrative की सार्वजनिक रूप से आलोचना की और कहा कि मार्केट रिएक्शन को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया है। Infrastructure सेक्टर के लीडर्स ने इस घटना को developer के बाहर जाने की बजाय कंपनी restructuring बताया।
इस तरह के रेस्पॉन्स से सबसे खराब संभावनाओं पर से फोकस हट गया और development की continuity पर बात की गई।
हालांकि governance से जुड़े issues अब भी सुलझे नहीं हैं, पर प्रोटोकॉल में disruption का immediate खतरा जितना बताया गया, उतना गंभीर नहीं लग रहा है। अब मार्केट की निगाहें नए development structure की execution पर हैं और देखा जा रहा है कि बेहतर communication से future में ऐसे झटकों को टाला जा सकता है या नहीं।