Bitcoin (BTC) एनालिस्ट Willy Woo ने उस चुनौती का जवाब दिया है, जो इकॉनोमिस्ट Saifedean Ammous ने सबसे पहले 2019 में रखी थी। Woo का तर्क है कि Bitcoin की फिक्स्ड सप्लाई से उधार लेना ज्यादा रिस्की हो जाता है, जिससे इकोनॉमिक ग्रोथ धीमी पड़ सकती है।
Ammous, जिनकी किताब The Bitcoin Standard काफी पॉपुलर है, ने X पर फिर से अपनी पुरानी कॉल शेयर की है। वह आज भी किसी इकॉनोमिस्ट का ऐसा जवाब चाहते हैं, जो साफ बताए कि हार्ड-कैप्ड मनी क्यों फेल हो सकती है। उनके 2019 के पोस्ट में “snarky eyerolls” से आगे की कोई ठोस दलील मांगी थी। हालांकि, अब तक सबसे डिटेल्ड जवाब किसी एकेडमिक की बजाय एक क्रिप्टो एनालिस्ट की तरफ से ही आया है।
Bitcoin की फिक्स्ड सप्लाई लेंडिंग को कैसे रोकती है?
Woo सीधे Bitcoin की फिक्स्ड सप्लाई को डेब्ट से जोड़ते हैं। जब कोई करेंसी लगातार मजबूत होती जाती है, तो उधार लेने वालों को ऐसे पैसों में लोन चुकाना पड़ता है, जिसकी वैल्यू लगातार बढ़ रही होती है। ऐसे में डिफ़ॉल्ट का रिस्क भी हाई हो जाता है और लेंडर्स पीछे हटने लगते हैं।
Woo मौजूदा ग्लोबल AI इन्फ्रास्ट्रक्चर फंडिंग का उदाहरण देते हैं, जो डेब्ट-फ्यूल्ड ग्रोथ को दिखाता है। कुछ इनवेस्टर्स पहले से ही AI डाटा सेंटर बूम को एक संभावित क्रैश का कारण मानते हैं।
इतिहास में भी कुछ ऐसा ही हुआ है। Woo बताते हैं कि गोल्ड स्टैंडर्ड के दौरान भी, पेपर मनी का गोल्ड बैकिंग से रेशियो बढ़ाया गया, ताकि लेंडिंग रिस्क कम हो सके। इससे क्रेडिट फ्लो स्केयर रिज़र्व एसेट्स पर भी चलता रहा।
धीमी ग्रोथ या कम बबल्स?
Woo, Bitcoin की फिक्स्ड सप्लाई के नुकसान को एकतरफा नेगेटिव नहीं मानते। उनका कहना है कि अगर Bitcoin स्टैंडर्ड पर सतोशीज (BTC की सबसे छोटी यूनिट) चलती है, तो इकोनॉमिक ग्रोथ स्लो होगी लेकिन बबल्स भी बहुत कम बनेंगे।
एक यूज़र ने तर्क दिया कि सेविंग्स से नीचे से पूंजी बनती है। Woo इससे असहमत हैं। वह कहते हैं कि असली ग्रोथ टेक्नोलॉजी, एनर्जी और रॉ मैटीरियल से आती है, जिन्हें बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर और मेगा कैपिटल पूल्स की ज़रूरत होती है।
Woo पहले भी तर्क दे चुके हैं कि Bitcoin 6-8 साल के डेब्ट साइकल को फॉलो कर सकता है।
ये बहस पुराना डिवाइड दिखाती है। Bitcoin के एडवोकेट्स हमेशा $ की खोई हुई खरीदारी क्षमता को हार्ड मनी के सपोर्ट में रखते हैं, जबकि क्रिटिक्स Bitcoin की फिक्स्ड सप्लाई को क्रेडिट के लिए रुकावट बताते हैं।
Woo का जवाब ये बताता है कि दोनों ही साइड्स एक ही मैकेनिज्म को अलग नजरिए से देखती हैं। असली सवाल है – क्या एक सतोशी आधारित इकोनॉमी तेज ग्रोथ के बजाय कम बबल्स को चुनेगी?









