Alphabet (GOOGL) ने 30 अप्रैल 2026 को अपने मार्केट वैल्यू में $300 बिलियन से ज्यादा का इजाफा किया, जिससे उसकी मार्केट कैप $4.5 ट्रिलियन के ऊपर चली गई। वहीं, Meta Platforms (META) ने उसी दिन करीब $175 बिलियन गंवा दिए, जबकि उसके टॉप-लाइन नतीजे मजबूत रहे।
दोनों कंपनियों ने 29 अप्रैल को बाजार बंद होने के बाद Q1 2026 के रिजल्ट शेयर किए। इनवेस्टर्स ने Google को उसके साफ-साफ दिख रहे AI रेवेन्यू के लिए रिवॉर्ड किया, वहीं Meta को उसके ज्यादा पूंजीगत खर्च (capital spending) की गाइडेंस के लिए पनिश किया।
क्लाउड रेवेन्यू ने बाजी मारी
Google Cloud ने Q1 में $20 बिलियन रेवेन्यू रिपोर्ट किया, जो साल-दर-साल 63% अधिक रहा। बैकलॉग $460 बिलियन से भी ज्यादा पहुंच गया, जो लगातार डबल हो रहा है। एंटरप्राइज AI की डिमांड सप्लाई से काफी आगे दिख रही है।
“Google Cloud में ग्रोथ में जोरदार तेजी आई और रेवेन्यू 63% बढ़कर $20.0 बिलियन हो गया, जिसकी लीड ले रही है Google Cloud Platform (GCP) में एंटरप्राइज AI सॉल्यूशंस और AI इंफ्रास्ट्रक्चर की डिमांड, साथ ही core GCP services,” इस घोषणा में कहा गया।
इस तिमाही में Search क्वेरी ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई, जिसमें Gemini इंटीग्रेशन का बड़ा रोल रहा। उपभोक्ता AI सब्सक्रिप्शन 350 मिलियन पार कर गए। साथ ही, Alphabet ने अपने डिविडेंड में 5% की बढ़ोतरी भी की।
Q1 का कैपिटल एक्सपेंडिचर $35.7 बिलियन रहा। कंपनी ने 2026 पूरे साल के लिए कैपेक्स गाइडेंस $180 बिलियन से $190 बिलियन तक बढ़ा दी, जबकि 2027 में खर्च “काफी अधिक” रहने की बात कही।
मार्केट्स ने इस खर्च को पॉजिटिव तरीके से लिया क्योंकि क्लाउड रेवेन्यू पहले से ही इस खर्च को कन्वर्ट कर रहा है। इस वजह से इनवेस्टर्स की सेंटीमेंट पॉजिटिव रही और Google का मार्केट कैप 1 ही दिन में $300 बिलियन बढ़कर $4.5 ट्रिलियन के पार चला गया।
इस लेख को लिखने के समय, Google की Alphabet स्टॉक $377.62 पर ट्रेड कर रही थी, जो एक नया ऑल-टाइम हाई है।
इसके विपरीत, मार्केट्स ने Meta को सजा दी क्योंकि कंपनी ने पूंजी खर्च को लेकर ज्यादा एग्रेसिव गाइडेंस दी थी।
दुनिया की दो टॉप इकोनॉमी से भी बड़ी
Alphabet की $4.5 ट्रिलियन वैल्यूएशन अब जापान और इंडिया की सालाना GDP से भी आगे निकल गई है। जापान की इकोनॉमी लगभग $4.2 ट्रिलियन के आसपास है, वहीं इंडिया की $4.1 ट्रिलियन है। सिर्फ एक US लिस्टेड कंपनी अब दुनिया की दो सबसे बड़ी नेशनल इकोनॉमीज़ से ऊपर पहुंच गई है।
Alphabet का 2026 में खर्च उसी डेटा-सेंटर इकोनॉमी में जाएगा जहां Bitcoin (BTC) माइनर्स भी कम्पीट करते हैं। अब पावर, GPU और ग्रिड कैपेसिटी के लिए हाइपरस्केलर्स सीधे मुकाबला कर रहे हैं।
कई लिस्टेड माइनर्स पहले ही AI होस्टिंग कॉन्ट्रैक्ट्स की तरफ मूव कर चुके हैं। इस बदलाव से प्रूफ-ऑफ-वर्क माइनिंग और AI क्लाउड होस्टिंग की लाइन अब धुंधली होती जा रही है।
Google की सिर्फ $300 बिलियन की एक दिन की कमाई ने ही Bitcoin और Ethereum (ETH) के अलावा ज्यादातर मेजर altcoins के कंबाइंड मार्केट वैल्यू को पीछे छोड़ दिया। यह दिखाता है कि इस चारण में कैपिटल कितनी तेजी से AI इन्फ्रास्ट्रक्चर स्टोरीज़ में घूम रहा है।
सवाल यह है कि क्या AI capex कंप्यूट टोकन, पब्लिक माइनर्स और डिसेंट्रलाइज्ड GPU नेटवर्क्स तक पहुंचेगा या नहीं। Meta की गिरावट दिखाती है कि मार्केट्स को सिर्फ खर्च नहीं, रिटर्न भी चाहिए।





