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KuCoin की Sabina Liu: 2026 में क्रिप्टो ग्रोथ कहां से आ रही है

  • Sabina Liu का कहना है, 2026 मार्केट cycle को institutional participation, रेग्युलेशन और product development आगे बढ़ा रहे हैं
  • Europe MiCA और बढ़ती डिमांड से डिजिटल assets में मजबूत स्थिति बना रहा है
  • Tokenized real world asset मार्केट में जबरदस्त ग्रोथ, distribution और investor access अभी शुरुआती दौर में

Paris Blockchain Week ने हमें दिखाया कि 2026 में डिजिटल असेट मार्केट कैसे डेवलप हो रहा है। इस इवेंट में रेग्युलेशन, इन्वेस्टर डिमांड, टोकनाइजेशन और ग्रोथ के लिए जरूरी कंडीशन्स पर चर्चा हुई।

BeInCrypto के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में, KuCoin की Managing Director EU, Sabina Liu ने इस समय चल रहे साइकल, बढ़ती इंस्टीट्यूशनल पार्टिसिपेशन और यूरोप में सबसे ज्यादा अटेंशन मिलने वाले एरियाज़ पर अपना नजरिया शेयर किया।

इस इंटरव्यू में मैक्रो लिक्विडिटी, टोकनाइज्ड real world assets का आउटलुक, रेग्युलेटेड डिजिटल असेट ग्रोथ में यूरोप की भूमिका, और वो मार्केट असम्प्शंस भी शामिल हैं जिन्हें Sabina Liu दोबारा देखने लायक मानती हैं।

Q1. आपका पैनल 2026 के लिए डिजिटल असेट फोरकास्ट देख रहा है। आपकी नजर से इस साइकल में कौन सी चीजें सच में अलग लग रही हैं?

इस साइकल में अलग ये है कि एक्टिविटी पहले जैसी मोमेंटम-बेस्ड नहीं है, अब ये लॉन्ग-टर्म मार्केट डेवलपमेंट पर टिकती जा रही है। हम देख रहे हैं कि इंस्टीट्यूशनल पार्टिसिपेशन मजबूत हो गई है, वहीँ रिटेल इन्वेस्टर्स भी एक्टिव हैं। साथ ही, TradFi और DeFi में भी मिलना-जुलना बढ़ रहा है। इससे सिर्फ मार्केट फ्लो ही नहीं बदल रहे, बल्कि प्रोडक्ट्स को डिजाइन और डिस्ट्रीब्यूट करने का तरीका भी इकोसिस्टम में बदल रहा है।

साथ ही, टोकनाइजेशन जैसे एरियाज़, खासकर RWA में, प्रयोग से एडॉप्शन की ओर बढ़ रहे हैं, खासतौर पर डिमांड साइड में। इसमें रेग्युलेटरी क्लैरिटी, TradFi प्लेयर्स की पार्टिसिपेशन और ऑन-चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर का बढ़ना मदद कर रहा है।

ओवरऑल, फोकस अब डिस्ट्रीब्यूशन और एक ज्यादा कंप्लायंट, सस्टेनेबल फ्रेमवर्क पर है, ताकि लॉन्ग-टर्म ग्रोथ हो सके।

Paris Blockchain Week 2026: डिजिटल असेट मार्केट की नई दिशा

मैक्रो लिक्विडिटी डिजिटल असेट मार्केट के लिए एक अहम बैकड्रॉप है, जैसे कि बाकी एसेट क्लासेस के लिए होता है। ये रिस्क चाहत, कैपिटल फ्लोज और शॉर्ट-टर्म मार्केट एक्टिविटी को प्रभावित कर सकता है।

इस साइकल में खास बात ये है कि मार्केट सिर्फ़ लिक्विडिटी कंडीशन्स तक सीमित नहीं है। हम इन्फ्रास्ट्रक्चर में प्रोग्रेस, इंस्टीट्यूशनल पार्टिसिपेशन में बढ़ोतरी और टोकनाइजेशन व RWA जैसे क्षेत्रों में शुरुआत देख रहे हैं।

लिक्विडिटी ग्रोथ की रफ्तार को जरूर प्रभावित कर सकती है, लेकिन उस ग्रोथ की मजबूती रेग्युलेटरी क्लैरिटी, प्रोडक्ट मैच्योरिटी और मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर की गहराई जैसे स्ट्रक्चरल फैक्टर्स पर निर्भर करेगी।

Q3. RWA को आने वाले समय के सबसे बड़े अवसरों में माना जा रहा है। आज, खासकर यूरोप में, आपको डिस्ट्रीब्यूशन में सबसे बड़ी चुनौती क्या दिखती है?

RWA का टोकनाइजेशन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन डिस्ट्रीब्यूशन अभी भी एक बड़ा चैलेंज है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई साइड पर प्रगति हो रही है, लेकिन डिस्ट्रीब्यूशन अभी भी यूज़ केस की मजबूती और पार्टिसिपेंट्स या इन्वेस्टर्स की इन प्रोडक्ट्स तक पहुंच की क्षमता पर निर्भर है, वो भी तब जब एक क्लियर और कंसिस्टेंट रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क हो।

स्केलेबल डिस्ट्रीब्यूशन के लिए जरूरी है कि इंफ्रास्ट्रक्चर, रेग्युलेशन और यूज़र एक्सेस आपस में अलाइन हों, ताकि RWAs ज्यादा एक्सेसिबल इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स में डेवलप हो सकें।

Q4. क्या आपको लगता है कि Europe रेग्युलेटेड डिजिटल एसेट ग्रोथ के अगले फेज को लीड करने के लिए मजबूत स्थिति में है?

Europe रेग्युलेटेड डिजिटल एसेट ग्रोथ के अगले फेज में लीड रोल निभाने के लिए अच्छी तरह से पोजिशन्ड है। इस रीजन ने एक क्लियर और स्ट्रक्चर्ड रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिससे मार्केट को पूरे इकोसिस्टम में भरोसेमंद बेस मिलता है।

जैसे-जैसे मार्केट मैच्योर हो रहा है और इंस्टीट्यूशनल पार्टिसिपेशन बढ़ रहा है, ये क्लैरिटी और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है। इससे प्लेटफॉर्म्स, काउंटरपार्टिज और इन्वेस्टर्स ज्यादा प्रेडिक्टेबिलिटी और कॉन्फिडेंस के साथ ऑपरेट कर सकते हैं, जो लॉन्ग-टर्म कैपिटल फॉर्मेशन के लिए जरूरी है।

डिजिटल एसेट्स का ग्लोबल इकोसिस्टम

Q5. आपके हिसाब से 2026 में कौन सी इंस्टीट्यूशंस मार्केट ग्रोथ में सबसे ज्यादा योगदान करेंगी?

Europe में MiCAR के तहत बनी फर्म्स डिजिटल एसेट्स में पहले पार्टिसिपेट न करने वाले रिटेल और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स को जोड़ने में महत्वपूर्ण रोल निभाएंगी। इससे एडॉप्शन को बढ़ावा मिलेगा।

स्टेबलकॉइन का बढ़ता इश्यूएंस इनोवेशन और पेमेंट यूज़ केस को भी ड्राइव करेगा, जिससे HQLAs की और टोकनाइजेशन की जरूरत होगी।

साथ ही, और भी ज्यादा इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स अब डिजिटल एसेट स्पेस में कैपिटल अलोकेट कर रहे हैं। ओवरऑल, मार्केट एक ज्यादा मैच्योर इकोसिस्टम में डेवलप हो रहा है।

Q6. ये सोच बढ़ रही है कि इस क्रिप्टो मार्केट का असली टेस्ट ये नहीं है कि वह कितना शॉर्ट-टर्म कैपिटल अट्रैक्ट कर सकता है, बल्कि ये है कि वो लॉन्ग-टर्म कैपिटल को कितना अच्छे से सपोर्ट कर सकता है। क्या आप इससे सहमत हैं?

काफी हद तक, हां। लॉन्ग-टर्म कैपिटल मार्केट को गहराई, मजबूती और सस्टेनेबल ग्रोथ देता है, जबकि शॉर्ट-टर्म कैपिटल भी एक्टिविटी को बढ़ाता है। दोनों का इकोसिस्टम में अपना-अपना रोल है और दोनों अलग-अलग इन्वेस्टमेंट इंटेंशन को सर्व करते हैं।

मार्केट को लॉन्ग-टर्म कैपिटल को सही तरीके से सपोर्ट करने के लिए ट्रस्ट दिखाना होगा, जिसमें कंप्लायंस, गवर्नेंस और भरोसेमंद इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है। जो प्लेटफॉर्म्स और मार्केट्स इन स्टैंडर्ड्स को पूरा करेंगे, वही ग्रोथ के अगले फेज को सपोर्ट करने के लिए सबसे मजबूत स्थिति में होंगे।

Q7. 2026 में आगे के लिए कौन सी ऐसी मार्केट असम्पशन है, जिसे लोगों को रिपीट करना बंद कर देना चाहिए?

एक आम मान्यता ये है कि मार्केट सिर्फ मोमेंटम-ड्रिवन, रिटेल-लीड साइकल के रूप में ही बिहेव करता रहेगा।

इस समय हम देख रहे हैं कि मार्केट एक नए फेज में जा रहा है, जहाँ अब संस्थागत और इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित निवेश पर ज़ोर दिया जा रहा है। अब कैपिटल एलोकेशन फैसले ज़्यादा लॉन्ग-टर्म हो रहे हैं और इन्हें सुलझे हुए फ्रेमवर्क के साथ सपोर्ट किया जा रहा है।


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