सितंबर 2026 में, कुल क्रिप्टोकरेन्सी मार्केट कैप करीब 7% बढ़ा। कई बड़े एसेट्स ने मल्टी-मंथ हाई छूए। तो क्या अब हम एक तय बुल मार्केट में हैं? और कौन से एसेट्स बड़ी जीत दर्ज करेंगे?
यह मार्केट साइकिल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अभी तक मार्केट के पक्ष में कई चीज़ें नहीं हुईं। US Fed ने इंटरेस्ट रेट्स बढ़ाए, और Senate CLARITY Act को आगे बढ़ाने में फेल हो गया। इसके बावजूद, Bitcoin प्राइस जनवरी के बाद से अपने सबसे ऊँचे स्तर पर पहुंच गई।
BloFin Research के एनालिस्ट्स का कहना है कि अगला बुल मार्केट बिल्कुल अलग दिख सकता है। उनके अनुसार, किसी एक टोकन कैटेगरी या एप्लिकेशन से यह साइकिल परिभाषित नहीं होगी।
बल्कि, इसे पांच अलग-अलग लेयर्स से आकार मिलेगा।
अगला बुल मार्केट क्रिप्टो के अंदर पैसा नहीं रोकेगा
अब तक हर क्रिप्टो बुल मार्केट का अपना एक हेडलाइन नैरेटिव रहा है। ये स्टोरीज़ Bitcoin को डिजिटल पैसा मानने से लेकर स्मार्ट-कॉन्ट्रैक्ट प्लेटफॉर्म्स, DeFi और NFTs तक थीं।
BloFin Research का कहना है कि इन साइकिल्स में ज्यादातर एक्टिविटी क्रिप्टो के अंदर ही सीमित रही। नया कैपिटल आया, एक टोकन से दूसरे टोकन में मूव हुआ और नए तरह की स्पेक्युलेशन हुई। ये सच रहा भले ही ट्रेंड्स के पीछे की टेक्नोलॉजी का उद्देश्य और भी ज्यादा बड़ा रहा हो।
हालांकि, अब चीज़ें बदली हुई दिख रही हैं। क्रिप्टो के कई सबसे तेजी से बढ़ते सेक्टर्स एक जैसे ट्रेंड दिखा रहे हैं। ये सभी मिलकर इस ओर इशारा करते हैं कि क्रिप्टो अब पूरे फाइनेंशियल वर्ल्ड के लिए एक पैरेलल मार्केट की तरह काम कर सकता है।
- Stablecoins
- Tokenization
- RWA perps
- Prediction markets
- Token value accrual
ये सेक्टर्स अक्सर अलग-अलग नैरेटिव के रूप में डिस्कस किए जाते हैं, लेकिन BloFin Research इन्हें एक ही स्टैक की लेयर्स मानता है।
1. Stablecoins
Stablecoins इस स्टैक की कैश लेग बनाते हैं। BloFin Research के मुताबिक, अब ये क्रिप्टो ट्रेडिंग से रियल-वर्ल्ड पेमेंट्स की ओर बढ़ रहे हैं।
यह एडॉप्शन में साफ़ दिखता है। Visa का स्टेबलकॉइन सेटलमेंट वॉल्यूम $20 बिलियन के सालाना रन रेट को पार कर गया है। यह एक साल पहले के स्तर से 15 गुना ज्यादा है।
अगला कदम शायद यह हो सकता है कि AI एजेंट्स, डेटा और कंप्यूटिंग पावर के लिए स्टेबलकॉइन्स में पेमेंट करें। BlackRock ने अपनी हाल ही की एक रिपोर्ट में भी यही बात कही थी और स्टेबलकॉइन्स को “मशीन-नेटिव मनी” के लिए एक प्रमुख कैंडिडेट बताया था।
2. टोकनाइज़ेशन
टोकनाइज़ेशन रियल-वर्ल्ड ओनरशिप को ऑन-चेन लाकर एसेट लेग उपलब्ध कराता है। BloFin Research के अनुसार, कमोडिटी और स्टॉक्स अब सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले टोकनाइज़्ड एसेट्स में शामिल हैं।
Q1 के आखिर तक टोकनाइज़्ड कमोडिटी $5.55 बिलियन तक पहुंच गई हैं, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा गोल्ड का है। यह 2025 की शुरुआत से 289% की बढ़त है।
टोकनाइज़्ड इक्विटीज़ की ग्रोथ और भी तेज रही है, इस साल 390% बढ़कर मिड-सितंबर तक $4.43 बिलियन पहुंच गई। फिर भी, $151.9 ट्रिलियन के ग्लोबल लिस्टेड-इक्विटी मार्केट में से सिर्फ़ लगभग 0.0029% ही टोकनाइज़ हुई है। जैसे-जैसे एक्सेस बढ़ेगा और ऑन-चेन यूज़ गहरा होगा, ग्रोथ के लिए बहुत जगह है।
3. RWA परप्स
RWA परप्स लिवरेज लेग का हिस्सा हैं। इन कॉन्ट्रेक्ट्स के ज़रिए ट्रेडर्स बिना असली एसेट्स के मालिक बने, स्टॉक्स, कमोडिटी या इंडेक्स में लिवरेज पोजीशन ले सकते हैं।
एक RWA परप्स को मुख्य रूप से एक भरोसेमंद प्राइस फीड, लिक्विडिटी, कोलेटरल और लिक्विडेशन सिस्टम चाहिए होता है। वहीं किसी एसेट को टोकनाइज़ करने के लिए लीगल स्ट्रक्चरिंग, कस्टडी और इन्वेस्टर-इलिजिबिलिटी के नियम ज़रूरी हैं।
BloFin Research के एनालिस्ट्स मानते हैं कि यही फर्क यह समझाता है कि सिंथेटिक एक्सपोज़र टोकनाइज़्ड ओनरशिप की तुलना में तेज़ी से स्केल क्यों कर सकता है।
DefiLlama के डेटा के अनुसार, RWA-perps वॉल्यूम Q1 में $122 बिलियन से बढ़कर Q3 में $2.2 ट्रिलियन हो गया है। ओपन इंटरेस्ट अब $15.3 बिलियन के ऊपर पहुंच चुका है।
4. Prediction मार्केट्स
Prediction मार्केट्स जानकारी का लेग बनती हैं। ये न्यूज़ और उम्मीदों को ट्रेडर्स के पैसों से बैक्ड संभावनाओं में बदल देती हैं। इस वजह से Prediction मार्केट्स इस साल क्रिप्टो के सबसे बड़े सेक्टर्स में से एक रही है।
ऑन-चेन Prediction मार्केट वॉल्यूम सितंबर में लगभग $5.24 बिलियन तक पहुंच गया है, Dune डैशबोर्ड के मुताबिक। यह सितंबर 2025 के लगभग $1.56 बिलियन से तीन गुना से भी ज्यादा है।
2026 FOMC मीटिंग्स से पहले, Kalshi और Polymarket पर ऑड्स आने वाले आर्थिक डेटा के जवाब में मूव हुए थे। फिर हर निर्णय के करीब आते ही ये CME FedWatch की तरफ शिफ्ट हो गए।
BloFin Research बताता है कि ये probability फीड्स अब मशीन-रीडेबल बन रही हैं, जिससे AI एजेंट्स इन्हें लाइव सिग्नल्स की तरह यूज़ कर पाते हैं।
5. Token वैल्यू Accrual
वैल्यू accrual बुल मार्केट की आखिरी टेस्ट है। आसान भाषा में, वैल्यू accrual का मतलब है कि किसी क्रिप्टो प्रोटोकॉल की सफलता उसके टोकन होल्डर्स के लिए कैसे वैल्यू में बदलती है।
एनालिस्ट्स का मानना है कि यूज़ेज को टोकन होल्डर्स के लिए वैल्यू में बदलने के लिए एक भरोसेमंद मेकैनिज़्म जरूरी है। यह बायबैक, बर्न, डिस्ट्रीब्यूशन या ट्रेजरी ग्रोथ के रूप में हो सकता है।
उदाहरण के लिए, अगर कोई DEX $10 बिलियन का ट्रेडिंग वॉल्यूम करता है और $20 मिलियन असली फीस कमाता है, लेकिन उस $20 मिलियन का कोई कनेक्शन उसके टोकन से नहीं है, तो उस टोकन की वैल्यू accrual कमजोर है।
अभी का टोकन-एमिशन मॉडल अब भरोसे के काबिल नहीं रह गया है। पारंपरिक इन्वेस्टर्स, जो रेवेन्यू और कैश फ्लो पर ध्यान देते हैं, वे भी टोकन वैल्यू से मापने लाइक लिंक की डिमांड करते हैं।
BloFin Research तीन बड़े DeFi प्रोटोकॉल्स के उदाहरण देता है, जिनमें हर एक ने अलग मेकैनिक्सम अपनाया है। Hyperliquid अपने ट्रेडिंग फीस से खरीदे गए HYPE को बर्न करता है, Uniswap प्रोटोकॉल फीस को UNI बर्न से लिंक करता है और Aave अपनी इनकम को अपने DAO को भेजता है, जिससे AAVE बायबैक फंड हो सकता है।
इस साल buyback खर्च भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। क्रिप्टो प्रोजेक्ट्स ने अगस्त के अंत तक अपनी खुद की टोकन $638 मिलियन में repurchase किए, Allium Labs के डेटा के अनुसार। Hyperliquid और Pump.fun ने इस कुल का लगभग 90% हिस्सा बनाया।
कैसे ये लेयर्स एक-दूसरे को सपोर्ट करते हैं
ये पांच लेयर्स एक-दूसरे को मजबूती देती हैं। Stablecoins को perps के collateral और tokenized securities के settlement asset की तरह यूज़ किया जाता है। Tokenized stocks और RWA perps दोनों ही अपनी प्राइस traditional मार्केट्स से लेते हैं, लेकिन इनकी जरूरतें अलग-अलग हैं। टोकनाइज़ेशन ownership देती है, जबकि perps leveraged प्राइस एक्सपोज़र देते हैं।
Perps और prediction मार्केट्स का डेटा फिर ट्रेडर्स, models और AI एजेंट्स के लिए एक सिग्नल बन जाती है। इस पूरी एक्टिविटी से मिलने वाली फीस value लेयर को feed करती है।
लेकिन दो संभावित चुनौतियां हैं। AI एजेंट payments के लिए infrastructure तो आ रहा है, लेकिन अभी volume वहां नहीं पहुंचा है। Equity perps की वैल्यू एक pricing signal के तौर पर liquidity पर भी निर्भर करती है, क्योंकि कम liquidity वाले मार्केट्स में काफी noise या manipulation हो सकती है।









