2025 में Silver ने प्रमुख एसेट्स में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया, जिसमें इसने gold और Bitcoin दोनों को काफी पीछे छोड़ दिया।
यह तेजी केवल speculation की वजह से नहीं आई थी। बल्कि, यह macroeconomic बदलावों, industrial demand और geopolitical दबाव के अनोखे मेल का नतीजा थी, जो 2026 तक जारी रह सकता है।
Silver की 2025 परफॉर्मेंस का मौजूदा हाल
दिसंबर 2025 के अंत तक, Silver करीब $71 प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था, जो साल की शुरुआत से 120% से भी ज्यादा ऊपर था। वहीं, Gold ने इसी समय लगभग 60% की तेजी दिखाई, जबकि Bitcoin ने साल की शुरुआत के मुकाबले थोड़ा नीचे क्लोज किया, हालांकि अक्टूबर में इसका प्राइस अपने पीक पर पहुंचा था।
Silver प्राइस 2025 की शुरुआत में करीब $29 प्रति औंस था और पूरे साल steady चढ़ता रहा। साल के दूसरे हिस्से में बढ़त और तेज हो गई जब सप्लाई डिफ़िसिट बढ़ गया और industrial demand उम्मीद से ज्यादा रही।
Gold ने भी शानदार rally दिखाई, करीब $2,800 से ऊपर उठकर $4,400 प्रति औंस से ऊपर पहुंच गया, जिसमें घटती real yields और central-bank demand ने अहम रोल प्ले किया।
लेकिन Silver ने Gold के मुकाबले कहीं ज्यादा बेहतर प्रदर्शन किया, जो precious-metal cycles में इसकी हिस्टोरिकल तेजी के अनुरूप रहा।
Bitcoin ने अलग दिशा पकड़ी। अक्टूबर की शुरुआत में इसका प्राइस $126,000 के रिकॉर्ड लेवल के करीब पहुंचा, लेकिन फिर अचानक गिरकर दिसंबर के अंत में $87,000 पर आ गया।
Metals से अलग, Bitcoin late-year risk-off माहौल में safe-haven inflows को संभाल नहीं पाया।
Macro कंडीशंस ने हार्ड एसेट्स को फायदा पहुंचाया
2025 में कई मैक्रोइकोनॉमिक फैक्टर्स ने सिल्वर को सपोर्ट किया। सबसे महत्वपूर्ण, ग्लोबल मॉनिटरी पॉलिसी ईजिंग की तरफ बढ़ गई। US Federal Reserve ने साल के अंत तक कई बार रेट कट किया, जिससे रियल यील्ड्स नीचे गए और $ कमजोर हुआ।
साथ ही, महंगाई (inflation) की चिंता बनी रही। ऐसा कॉम्बिनेशन आम तौर पर उन असली एसेट्स (tangible assets) के लिए फायदेमंद होता है जिनकी मॉनिटरी और इंडस्ट्रियल वैल्यू होती है।
गोल्ड के मुकाबले, सिल्वर को सीधा फायदा इकोनॉमिक ग्रोथ से होता है। 2025 में यह ड्यूल रोल बहुत निर्णायक साबित हुआ।
Industrial Demand बना मुख्य Driver
सिल्वर की रैली अब इन्वेस्टमेंट फ्लो की बजाय फिजिकल डिमांड पर बेस्ड है। इंडस्ट्रियल यूसेज कुल सिल्वर कंजम्प्शन का लगभग आधा हिस्सा है और यह लगातार बढ़ रहा है।
एनर्जी ट्रांजिशन इसमें अहम रोल निभा रहा है। सोलर पावर सिल्वर की सबसे बड़ी नई डिमांड बनी रही, जबकि ट्रांसपोर्ट और इन्फ्रास्ट्रक्चर में इलेक्ट्रिफिकेशन ने पहले से टाईट सप्लाई को और दबाव में डाल दिया।
ग्लोबल सिल्वर मार्केट्स ने 2025 में लगातार पांचवां साल एनुअल डेफिसिट रिकॉर्ड किया। सप्लाई रिस्पॉन्ड नहीं कर पाई, क्योंकि ज्यादातर सिल्वर प्रोडक्शन बेस-मेटल माइनिंग का बाई-प्रोडक्ट है, न कि प्राइमरी सिल्वर प्रोजेक्ट्स से।
Electric Vehicles से स्ट्रक्चरल डिमांड बढ़ी
इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) ने 2025 में सिल्वर की डिमांड काफी बढ़ा दी। हर EV में 25 से 50 ग्राम सिल्वर लगता है, जो इंटरनल-कंबशन व्हीकल से लगभग 70% ज्यादा है।
जबकि ग्लोबल EV सेल्स डबल डिजिट रेट से बढ़ रही हैं, ऑटोमोटिव सिल्वर डिमांड हर साल करोड़ों औंस तक पहुंच गई।
चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर ने इस ट्रेंड को और तेज किया। हाई-पावर फास्ट चार्जर्स में पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और कनेक्टर्स के लिए किलो के हिसाब से सिल्वर की जरूरत होती है।
साइकलिकल इन्वेस्टमेंट डिमांड के उलट, EV से जुड़ी सिल्वर कंजम्प्शन स्ट्रक्चरल है। प्रोडक्शन ग्रोथ डायरेक्ट फिजिकल ऑफ-टेक में बदलती है।
Defense Spending से सप्लाई चुपचाप टाइट हुई
मिलिट्री डिमांड अब पहले के मुकाबले कम नज़र आने के बावजूद पहले से ज्यादा मायने रखती है। मॉडर्न वेपन्स सिस्टम्स गाइडेंस इलेक्ट्रॉनिक्स, रेडार, सिक्योर कम्युनिकेशन और ड्रोन के लिए सिल्वर पर भारी निर्भर हैं।
एक सिंगल क्रूज़ मिसाइल में सैकड़ों औंस सिल्वर हो सकता है, जो इस्तेमाल के दौरान पूरी तरह से नष्ट हो जाता है। इसलिए डिफेंस डिमांड नॉन-रिसायक्लेबल है।
ग्लोबल मिलिट्री स्पेंडिंग 2024 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई और 2025 में भी Ukraine और Middle East में वॉर के बीच बढ़ती रही।
Europe, United States और Asia ने एडवांस्ड गोला-बारूद की खरीद बढ़ा दी है और वे चुपचाप physical चांदी को अब्ज़ॉर्ब कर रहे हैं।
Geopolitical shocks ने ट्रेंड को और मजबूत किया
जियोपॉलिटिकल टेंशन्स ने चांदी के पक्ष को और मजबूत किया। लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों से डिफेंस के लिए स्टॉकपाइलिंग बढ़ी, वहीं ट्रेड में फ्राॅगमेंटेशन ने जरूरी मटेरियल्स की सप्लाई को लेकर सुरक्षा की चिंता बढ़ा दी।
Gold के मुकाबले, चांदी नेशनल सिक्योरिटी और इंडस्ट्रियल पॉलिसी दोनों के बीच आती है। कई गवर्नमेंट्स ने चांदी को एक स्ट्रैटेजिक मटेरियल के तौर पर क्लासिफाई किया है, जिससे यह पता चलता है कि इसका रोल इंडस्ट्रियल और मिलिट्री टेक्नोलॉजी दोनों में कितना जरूरी है।
इस डाइनैमिक की वजह से एक अनोखा फीडबैक लूप बन गया: जियोपॉलिटिकल रिस्क के चलते न सिर्फ सेफ-हेवन इन्वेस्टमेंट डिमांड बढ़ी, बल्कि रियल इंडस्ट्रियल कंजम्प्शन भी तेजी से ऊपर गया।
2026 में आउटपरफॉर्मेंस बढ़ सकती है क्यों
आगे देखते हुए, ज्यादातर वही फैक्टर्स silver प्राइस को 2025 में ऊपर ले गए, आज भी मौजूद हैं। EV एडॉप्शन लगातार बढ़ रही है। Grid expansion और renewable investment अभी भी पॉलिसी प्रायोरिटी बने हुए हैं। डिफेंस बजट में भी कोई कमी नहीं देखी जा रही है।
इस सब के साथ, चांदी की सप्लाई लिमिटेड है। नए माइनिंग प्रोजेक्ट्स को शुरू होने में काफी वक्त लगता है और recycling भी मिलिट्री यूज की वजह से बढ़ रहे इंडस्ट्रियल लॉसेस को कवर नहीं कर पा रही है।
Gold अच्छा परफॉर्म कर सकता है अगर रियल यील्ड्स कम रहें। Bitcoin भी रिकवरी दिखा सकता है अगर रिस्क एपटाइट बेहतर हो। लेकिन इन दोनों में मॉनेटरी प्रोटेक्शन के साथ ग्लोबल इलेक्ट्रिफिकेशन और डिफेंस स्पेंडिंग का डायरेक्ट एक्सपोजर नहीं है।
यही कॉम्बिनेशन है जिसकी वजह से कई एनालिस्ट्स 2026 के लिए चांदी को यूनिक पोज़िशन में मान रहे हैं।
Silver का 2025 रैली सिर्फ एक स्पेक्युलेटिव spike नहीं थी। यह ग्लोबल इकोनॉमी में चांदी के कंजम्प्शन में आ रहे गहरे स्ट्रक्चरल बदलाव को दर्शाती है।
अगर ये ट्रेंड ऐसे ही रहे, तो चांदी की ड्यूल भूमिका—मॉनेटरी hedge और इंडस्ट्रियल जरूरत—2026 में इसे फिर Gold और Bitcoin दोनों से आगे ले जा सकती है।