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Compliant क्रिप्टो पेमेंट्स पर Transacta: फास्ट ऑनबोर्डिंग और हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शंस को स्केल करना

जैसे-जैसे एडॉप्शन बढ़ रहा है, बिज़नेस ऐसे क्रिप्टो पेमेंट प्रोवाइडर की तलाश कर रहे हैं जो लाइसेंसिंग, कंप्लाइंस सपोर्ट, तेज़ execution और एक ऐसा सर्विस मॉडल दे सकें जो असली operational इस्तेमाल के लिए बना हो। यह खासतौर पर उन सेक्टर्स में जरूरी है जहाँ ट्रांज़ेक्शन वैल्यूज हाई होती हैं, कस्टमर की उम्मीदें ज्यादा रहती हैं और पेमेंट फ्लो पर अक्सर करीब से नज़र रखनी पड़ती है।

Transacta एक licensed crypto प्रोवाइडर है, जो पिछले आठ साल से मार्केट में है और बिज़नेस को क्रिप्टो पेमेंट एक्सेप्ट करने और इंस्टेंटली कन्वर्ट करने में मदद करता है। इसकी सर्विस में क्रिप्टो इनवॉइसिंग, ई-कॉमर्स चेकआउट, और कार्ड प्रोसेसिंग शामिल है, जबकि क्रिप्टो POS और पेआउट्स जल्द जोड़े जाएंगे।

कंपनी के पास स्विट्ज़रलैंड और एस्तोनिया में रेग्युलेटरी कवरेज है और MiCA के लिए एप्लाई भी किया है। इसके अलावा, zerohash के साथ पार्टनरशिप के बाद अब यह 49 US राज्यों में भी बिजनेस को एक्सेस दे पा रही है।

Transacta ने समय के साथ बड़े ट्रांजेक्शन और प्राइवेट एविएशन, यॉट सेल और चार्टर, रियल एस्टेट, लग्ज़री ट्रेवल, लग्ज़री कॉमर्स, और एस्क्रो सर्विसेज जैसे सेक्टर्स में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है।

बिजनेस सर्विस के साथ-साथ कंपनी इंडिविजुअल यूज़र्स के लिए भी प्रोडक्ट्स डेवलप कर रही है, जिसमें वॉलेट सर्विस, licensed exchange, कार्ड्स और फ्यूचर्स शामिल हैं।

इस इंटरव्यू में, Transacta की मार्केटिंग हेड Tanya Tkachenko, कंपनी की स्ट्रेंथ्स, उसके पार्टनरशिप फोकस, और विस्तार, रेग्युलेशन व हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन पर अपने अनुभव साझा कर रही हैं।

Beincrypto: आज के मार्केट में आपकी सबसे बड़ी कॉम्पिटिटिव एडवांटेज क्या है?

Tanya Tkachenko: हमारी सबसे बड़ी कॉम्पिटिटिव एडवांटेज सिंपल है: हम बिज़नेस को क्रिप्टो पेमेंट्स स्वीकार करने का एक सस्ता और बेहद तेज़ तरीका देते हैं।

हम कोई सेटअप फीस नहीं लेते। हम ऑनबोर्डिंग फीस भी नहीं लेते। साथ ही, हम merchant से कोई ट्रांजेक्शन फीस भी नहीं लेते। इसलिए जब बिजनेस क्लाइंट को इनवॉइस भेजता है, तो उसे उतना ही अमाउंट मिलता है, बिना किसी कटौती के। यही हमारी वैल्यू प्रपोजिशन का सबसे अहम हिस्सा है।

दूसरा पॉइंट है स्पीड। हम आमतौर पर एक, दो या कभी-कभी तीन बिजनेस डेज़ में ही बिजनेस को ऑनबोर्ड कर लेते हैं, जो कई दूसरे प्रोवाइडर से बहुत तेज़ है। यह इसलिए संभव हो पाता है क्योंकि हमारे पास खुद की AML ऑफिसर्स और कंप्लायंस स्पेशलिस्ट्स की टीम है, जो डॉक्युमेंट तैयार करने और प्रोसेस को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद करती है।

जीरो सेटअप फीस, जीरो merchant fees और फास्ट ऑनबोर्डिंग का कॉम्बिनेशन हमें उन बिजनेस के लिए एक मजबूत ऑप्शन बनाता है जो जल्दी शुरुआत करना चाहते हैं और कॉस्ट कंट्रोल में रखना चाहते हैं।

हम देखते हैं कि अलग-अलग टाइप के बिजनेस हमारे पास अलग-अलग कारणों से आते हैं। कुछ पहले से ही क्रिप्टो प्रोसेस कर रहे हैं और उन्हें ज्यादा भरोसेमंद ऑपरेशनल सॉल्यूशन, बेहतर डैशबोर्ड, अच्छा इंटरफेस या मजबूत कंप्लायंस सपोर्ट चाहिए होता है। कुछ पहले वाले प्रोवाइडर के साथ प्रॉब्लम्स के बाद आते हैं, जो अक्सर रेग्युलेशन या कंप्लायंस से जुड़ी होती हैं। वहीं, कुछ ऐसे क्लाइंट होते हैं जो क्रिप्टो के लिए बिल्कुल नए हैं लेकिन उनका क्लाइंट उनसे क्रिप्टो में पेमेंट मांग रहा होता है। ज्यादातर मामलों में, सभी के लिए एक बात कॉमन है- जल्द शुरूआत। वो जितना जल्दी हो सके, शुरू करना चाहते हैं और इसी वजह से हम खासतौर पर स्ट्रॉन्ग ऑप्शन बन जाते हैं।

एक और फायदा हमारी हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शंस में एक्सपर्टीज़ है। हम मल्टी-मिलियन-$ पेमेंट्स के साथ काम करते हैं, जिसमें सिर्फ स्टैंडर्ड प्रोसेसिंग सेटअप से काम नहीं चलता। हमारे पास खुद के लिक्विडिटी पूल्स और भरोसेमंद लिक्विडिटी प्रोवाइडर्स हैं, जिससे हम बड़ी ट्रांजेक्शन को जल्दी कन्वर्ट और सैटल कर पाते हैं।

इस लेवल पर कंप्लायंस की जरूरत भी काफी बढ़ जाती है। अगर आप एक या दो मिलियन $ ट्रांसफर कर रहे हैं, तो source of funds, ट्रांजेक्शन का मकसद, जुरिस्डिक्शन और रिस्क एक्सपोजर पर सवाल जरूर होते हैं। हमारे पास डेडिकेटेड टीम है जो बिजनेस की मदद करती है कि ये रिक्वायरमेंट्स सही से पूरी हों और प्रोसेस फास्ट हो। हर प्रोवाइडर इतने वॉल्यूम को ऑपरेशनल या तकनीकी तरीके से सपोर्ट नहीं कर सकता, लेकिन हम कर सकते हैं।

BeInCrypto: आपकी रणनीति में पार्टनरशिप्स का क्या रोल है?

Tanya Tkachenko: हमारे लिए पार्टनरशिप्स बहुत ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं, और मैं इन्हें दो मुख्य कैटेगरी में बांटती हूं।

पहली कैटेगरी है, उन व्यवसायों से हमारा रिश्ता जिन्हें हम सर्विस देते हैं। हम उन्हें सिर्फ कस्टमर नहीं, बल्कि पार्टनर मानते हैं। हमारे पास कई क्लाइंट आते हैं जिन्हें क्रिप्टोकरेन्सी या ब्लॉकचेन की गहरी जानकारी नहीं होती, लेकिन वे अपनी कमाई का एक अहम हिस्सा हमें संभालने के लिए देते हैं। हम इस भरोसे को बहुत महत्व देते हैं।

साथ ही, ये रिश्ते हमें अलग-अलग इंडस्ट्रीज़ को और गहराई से समझने में मदद करते हैं। इससे हमें पता चलता है कि वे कौनसी परेशानियां सुलझाना चाहते हैं, उनकी पेमेंट फ्लो कैसे काम करती हैं, और उन्हें प्रोवाइडर से क्या चाहिए। ये रिश्ता सिर्फ एकतरफा नहीं होता, बल्कि दोनों का ग्रोथ होता है।

दूसरी कैटेगरी है – compliance, रेग्युलेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर और सिक्योरिटी में स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप। एक ऐसी कंपनी होने के नाते जिसका फोकस compliance पर है, हम हमेशा ऐसे पार्टनर की तलाश में रहते हैं, जो हमारी ऑपरेशनल कैपेसिटी स्ट्रॉन्ग बना सकें, सिक्योरिटी स्टैंडर्ड्स को बेहतर कर सकें या हमें नए मार्केट में सस्टेनेबल तरीके से एंटर कराने में मदद करें। यही वजह है कि हम इंडस्ट्री इवेंट्स में जाते हैं। हम उन लोगों और कंपनियों को ढूंढते हैं जो हमारे इकोसिस्टम को मजबूत बना सकें।

हाल ही में इसका उदाहरण है zerohash के साथ हमारी पार्टनरशिप। ये हमारी कंपनी के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण उपलब्धि है। zerohash ऐसी कानूनी और इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस प्रोवाइड करता है, जिससे बिजनेस यूएस में आसानी से ऑपरेट कर सकते हैं और ये एक highly respected कंपनी है। इसने Morgan Stanley, Stripe, और Interactive Brokers जैसी कंपनियों की बड़ी लॉन्चिंग में सपोर्ट किया है।

हमारे लिए ये पार्टनरशिप दो वजहों से खास है। पहली, इससे हमें यूएस मार्केट में अपना दायरा बढ़ाने का मौका मिला है। दूसरी, ये दिखाता है कि ऐसी कंपनी के साथ काम करने के लिए कितना भरोसा और तैयारी चाहिए। इससे साबित होता है कि हमने compliance, operations, और readiness में बहुत सीरियस investment की है।

BeInCrypto: आपने पहले onboarding speed का जिक्र किया था। Transacta जॉइन करने के बाद बिजनेस को सपोर्ट किस तरह मिलता है?

Tanya Tkachenko: हर बिजनेस जो हमारे साथ अकाउंट ओपन करता है, उसे एक dedicated मैनेजर मिलता है, लेकिन इसे समझना जरूरी है कि इसका मतलब क्या है। ये सिर्फ एक पारंपरिक अकाउंट मैनेजर नहीं है, बल्कि एक क्रिप्टो और compliance स्पेशलिस्ट है, जो पूरी रिलेशनशिप के दौरान बिजनेस को सपोर्ट करता है, सिर्फ onboarding प्रोसेस में नहीं।

ये जरूरी है क्योंकि regulations लगातार बदलती रहती हैं, और बिजनेस को अक्सर गाइडेंस की जरूरत होती है कि ये बदलाव उनके ट्रांजैक्शन फ्लो, रिस्क exposure या फीस और jurisdictions पर कैसे असर डालेंगे। हमारे compliance मैनेजर्स रेगुलर अपडेट देते हैं, सवालों के जवाब देते हैं, और कंपनियों को मार्केट के अंदर आसान नेविगेशन में मदद करते हैं, जिससे उन्हें अंदर से गहरी क्रिप्टो नॉलेज की जरूरत न पड़े।

ये सपोर्ट खास तौर पर तब जरूरी हो जाता है जब हम luxury segments या उन बिजनेस के साथ काम करते हैं जो high-net-worth individuals को सर्विस देते हैं। ऐसे क्लाइंट्स के पास ट्रांजैक्शन हैंडलिंग, jurisdictions या compliance requirements से जुड़े बहुत खास requests हो सकते हैं। इन्हें काफ़ी सावधानी से manage करना पड़ता है, क्योंकि इन इंडस्ट्रीज में पर्सनल रिलेशनशिप्स बहुत महत्वपूर्ण होती हैं।

हम अपने merchants को ऐसी सिचुएशंस में आत्मविश्वास के साथ respond करने में मदद करते हैं। हमारे लिए ये सपोर्ट हमारे product का ही हिस्सा है। बिजनेस को हम पर सिर्फ पेमेंट्स process करने के लिए ही नहीं, बल्कि क्रिप्टो पेमेंट्स से जुड़े रूल्स समझने और उसके अंदर सुरक्षित ऑपरेट करने के लिए भी डिपेंड कर पाना चाहिए।

BeInCrypto: आप compliance और regulation को कैसे अप्रोच करते हैं? इसका product development पर क्या असर पड़ता है?

Tanya Tkachenko: Transacta मार्केट में आठ साल से है, और हमारे अंदर एक मजाक चलता है कि अगर आपने हमारे बारे में ज्यादा सुना नहीं, तो उसका एक कारण यही है।

इसका कारण यह है कि हमने हमेशा सबसे पहले फंडामेंटल्स पर फोकस किया है: कंप्लायंस, लाइसेंसिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑपरेशनल कैपेसिटी पर। हम नहीं चाहते थे कि जब तक ये बुनियादें मजबूत न हो, तब तक पब्लिक में कोई बोल्ड स्टेटमेंट दें।

यही फिलॉसफी प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर भी लागू होती है। हम कानूनी और कंप्लायंस टीम्स को बहुत जल्दी रोडमैप डिस्कशन में शामिल करते हैं। अगर कोई नई फीचर या प्रोडक्ट तैयार करने पर विचार चल रहा होता है, तो हम सबसे पहले उसके पीछे रेग्युलेटरी टाइमलाइन समझना चाहते हैं। जब तक हमें पूरा विश्वास नहीं होता कि हम किसी देश, कस्टमर टाइप या यूज़ केस को सही से सपोर्ट कर सकते हैं, तब तक हम डेवलपमेंट शुरू नहीं करते।

इस प्रोसेस से हमारा काम उन कंपनियों के मुकाबले थोड़ा धीरे चलता है जो जल्दी लॉन्च करती हैं और बाद में रेग्युलेटरी सवालों से निपटती हैं। लेकिन हमारे लिए यह जरूरी है कि ऐसी चीज़ बनाने में रिसोर्सेस न खर्च करें जिसे कंप्लायंस के नज़रिए से सही तरीके से सपोर्ट नहीं कर सकते।

यूरोप में फ्रेमवर्क अब ज्यादा प्रेडिक्टेबल हो गया है। हमारे पास स्विस और एस्टोनिया के लाइसेंस हैं, और हम विकसित होते रेग्युलेटरी एनवायरमेंट में MiCA को ध्यान में रखकर ऑपरेट कर रहे हैं। इससे हमें विस्तार और प्रोडक्ट प्लानिंग के लिए क्लियर रूल सेट मिल जाता है।

यूनाइटेड स्टेट्स में सब कुछ काफी ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड है। वहां फेडरल ज़रूरतें, हर राज्य के अलग नियम, FinCEN की जिम्मेदारियां और ज्यादा सख्त AML और KYC एक्सपेक्टेशन हैं। इसी जटिलता के कारण हमने US मार्केट में पार्टनरशिप-बेस्ड रास्ता चुना। इसे सही तरीके से प्लान करने में समय लगा, लेकिन हम तब तक मार्केट में नहीं उतरे या उसके चारों ओर कुछ भी बनाना शुरू नहीं किया जब तक हम पूरी तरह तैयार नहीं थे।

तो ओवरऑल, रेग्युलेशन हमें नेगेटिव तरीके से स्लो नहीं करता। यह तय करता है कि हम कैसे बिल्ड करें। हम चाहते हैं कि हर नया मार्केट और हर नया प्रोडक्ट टिकाऊ आधार पर खड़ा हो।

Beincrypto: अगले दो से तीन साल में आप मार्केट को कैसे बदलता देखती हैं?

Tanya Tkachenko: हमारे नजरिए से सबसे बड़ी ट्रेंड यह है कि क्रिप्टो एडॉप्शन लगातार बढ़ रहा है। ज्यादा लोग और ज्यादा बिज़नेस अब क्रिप्टो का प्रैक्टिकल तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे मार्केट में बड़ा बदलाव आ गया है।

इसका एक अहम हिस्सा है एंड यूजर्स के व्यवहार में बदलाव। अब हम देख रहे हैं कि लोग सिर्फ स्पेक्युलेटिव पर्पज से आगे बढ़ रहे हैं। वे अब सिर्फ खरीदकर होल्ड नहीं कर रहे हैं। वे इसे नॉर्मल पैसे की तरह खर्च करने के तरीके ढूंढ रहे हैं। यही वजह है कि क्रिप्टो कार्ड जैसी प्रोडक्ट्स पॉपुलर हो रही हैं। जैसे-जैसे लोग रोजमर्रा की फाइनेंशियल एक्टिविटी में क्रिप्टो के इस्तेमाल में सहज हो रहे हैं, पेमेंट प्रोवाइडर भी ज्यादा अहम हो रहे हैं।

एक और जरूरी कारण है रेग्युलेटरी क्लैरिटी का सुधार। नए फ्रेमवर्क्स से कंपनियों को ट्रस्ट बनाना, नए मार्केट्स में विस्तार करना और अपने मॉडल को कस्टमर्स व पार्टनर्स को समझाना आसान हो रहा है। इससे इंस्टीट्यूशनल एक्टिविटी भी प्रभावित होती है। Banks, बड़ी फाइनेंशियल कंपनियां और दूसरे प्रमुख प्लेयर्स अब stablecoins और ब्लॉकचेन-आधारित सिस्टम्स में ज्यादा इंटरेस्ट दिखा रहे हैं, जिससे पूरी मार्केट को मजबूत ट्रस्ट सिग्नल मिलता है।

जब इंस्टीट्यूशन्स ज्यादा एक्टिव होती हैं, बिज़नेस और इंडिविजुअल्स मार्केट को अलग नजरिए से देखने लगते हैं। तब यह कम स्पेक्युलेटिव और ज्यादा यूज़फुल लगता है। इसका मतलब यह नहीं कि एक्टिविटी में जबर्दस्त उछाल नजर आएगा। मेरा मानना है, मार्केट धीरे-धीरे डवेलप करता रहेगा, जो कि हेल्दी है। इसी तरह सीरियस मार्केट बनता है।

डेमोग्राफिक्स भी मायने रखते हैं। Millennials और Gen Z अब सबसे एक्टिव खर्च करने वाले ग्रुप्स में शामिल हैं, और ये पहले से ही डिजिटल-पहली फॉर्म्स ऑफ मनी के साथ सहज हैं। बिज़नेस को इन्हें उन्हीं पेमेंट मेथड्स के जरिए सर्व करना पड़ेगा जो इन्हें पसंद हैं।

तो ओवरऑल, मुझे लगता है अगले कुछ सालों में असली यूसेज बढ़ेगा, मार्केट में धीरे-धीरे maturity आएगी, और उन प्रोवाइडर्स की डिमांड बढ़ेगी जो क्रिप्टो को रोज़ के बिज़नेस ऑपरेशन्स से विश्वसनीय तरीके से जोड़ सकें।

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