Polymarket के ट्रेडर्स के एक छोटे समूह ने प्लेटफॉर्म के ज्यादातर प्रॉफिट पर कब्जा जमाया है, एक नई शैक्षणिक स्टडी में सामने आया है। लगभग 3% अकाउंट्स ने कुल $ प्रॉफिट का 27% कलेक्ट किया, और अब Wall Street की कॉम्पिटिशन से यह बढ़त कम होती जा रही है।
Yale और London Business School के रिसर्चर्स द्वारा सह-लेखित इस वर्किंग पेपर में दो साल के Polymarket ट्रेड्स को जांचा गया। इसमें 1.72 मिलियन अकाउंट्स और 210,322 मार्केट्स को कवर किया गया है।
Polymarket ट्रेडर्स की बढ़त क्यों घट रही है
लेखकों ने एक सांख्यिकीय टेस्ट का उपयोग किया, जिसमें हर ट्रेडर के इतिहास को हजारों बार दोहराकर स्किल और लक को अलग किया गया।
Theis Jensen, Yale के इकोनॉमिस्ट और इस स्टडी के सह लेखक हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जैसे-जैसे कॉम्पिटिशन बढ़ेगा, स्किल्ड ट्रेडर्स का हिस्सा लगभग 3% से घटकर 1% से भी नीचे आ सकता है।
उन्होंने समझाया कि ज्यादा कॉम्पिटिशन से प्राइसिंग इम्प्रूव होती है।
“अगर काफी स्किल्ड लोग हैं, तो वे आपस में कॉम्पिट करने लगते हैं, जिससे प्राइस ज्यादा करेक्ट हो जाती है।”
Jensen, Yale School of Management
Julie Hoover, Bank of America की equity एनालिस्ट, ने कहा कि टाइटर स्प्रेड्स की वजह से मिसप्राइसिंग पकड़ना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि छोटे स्पेशलिस्ट्स अभी भी निचे मार्केट्स में बढ़त बनाए रख सकते हैं। उन्होंने ये भी जोड़ा कि प्लेटफॉर्म की contracts की वाइड रेंज से स्पेशलिस्ट्स डीप और नैरो एक्सपर्टीज बना सकते हैं।
Jensen ने यह भी जोड़ा कि बड़ी institutions आमतौर पर लो-लिक्विडिटी मार्केट्स से दूर रहती हैं। वहां छोटे-छोटे ऑर्डर्स से institution की खुद की बढ़त भी कम हो सकती है और स्पेशलिस्ट्स के लिए मौका बच जाता है।
बाकी लोगों के लिए ज्यादा फेयर ट्रेडिंग
जिन ट्रेडर्स के पास स्थायी बढ़त नहीं है, वे भी ज्यादा सटीक प्राइसिंग से फायदा उठा सकते हैं। बेहतर प्राइस से गलत साइड बार-बार चुनने का चांस कम हो जाता है।
Federal Reserve के researchers ने पाया कि Kalshi के मैक्रोइकॉनॉमिक कॉन्ट्रैक्ट्स ने स्टैंडर्ड forecasting benchmarks के बराबर या बेहतर प्रदर्शन किया। इसका हेडलाइन मंदी का अनुमान तो Bloomberg consensus से भी बेहतर रहा।
संस्थागत वॉल्यूम बढ़ने से prediction market प्लेटफार्म्स के लिए ट्रांजैक्शन फीस से होने वाली इनकम भी बढ़ती है। बेहतर कैलिब्रेटेड प्राइस इन्हें hedging, forecasting और मार्केट-डाटा टूल्स के रूप में और मजबूत बना सकते हैं।
जैसे-जैसे संस्थागत निवेश का फ्लो जारी है, यह बढ़त अब खास फर्म्स के बीच केंद्रित होती जा रही है। इस पेपर के ऑथर्स का कहना है कि सिर्फ सबसे बड़े और हाईली सोफिस्टिकेटेड फंड्स ही लगातार मार्केट को बीट कर पाएंगे।









