Germany के वैज्ञानिकों ने 80 साल के एक व्यक्ति की ब्लड सेल्स को लेकर उन्हें 20 साल से भी कम उम्र की तरह दिखाया। लैब डिश में 60 साल से ज्यादा की molecular aging अचानक गायब होती दिखाई दी।
यह discovery एक बड़ा सवाल खड़ा करती है, जिसका जवाब ढूंढने के लिए रिसर्चर्स और इन्वेस्टर्स अरबों $ खर्च कर रहे हैं। क्या यही साइंस भविष्य में इंसानी टिश्यूज को फिर से जवान बना सकती है?
एंटी-एजिंग: टेक्नोलॉजी का अगला evolution?
University of Bonn के रिसर्चर्स ने immature ब्लड सेल्स को डायरेक्ट neural stem सेल्स में कन्वर्ट किया, जो आगे चलकर ब्रेन सेल्स बन सकती हैं। उन्होंने इसका age epigenetic clocks से मापा, जो aging से जुड़ी DNA में chemical changes को ट्रैक करती हैं।
क्लॉक्स ने शानदार reversal दिखाया। सबसे बड़ी बात, रिसर्चर्स ने इसे होते हुए देखा।
पहले की techniques में सेलुलर age को तेजी से रीसेट किया जाता था, जिसमें इंटरमीडिएट stem-cell स्टेज से गुजरना पड़ता था। लेकिन Bonn की method ने यह स्टेप skip कर दिया, जिससे साइंटिस्ट्स को rejuvenation धीरे-धीरे होते देखने का मौका मिला।
“हमारे approach में rejuvenation धीरे-धीरे हुआ और 100 दिनों तक ट्रैक किया जा सका,” रिसर्च लीड करने वाले Professor Oliver Brüstle ने कहा।
इससे वैज्ञानिकों को यह पता लगाने का समय मिलता है कि कौन से substances process को तेज या interrupt करते हैं। यह भविष्य में Alzheimer’s जैसी बीमारियों को समझने में मदद कर सकता है, जिसमें aging मेन risk factor है।
हालांकि, एक्सपेरिमेंट ने यह establish नहीं किया है कि यह process सुरक्षित तरीके से लोगों में diseases का इलाज कर सकता है या नहीं।
पहला इंसानी टेस्ट शुरू हो चुका है
जनवरी में, US रेग्युलेटर्स ने Life Biosciences को ER-100 टेस्ट करने की अनुमति दी, जो एक experimental इलाज है, जिसे आंखों की damaged सेल्स को rejuvenate करने के लिए डिजाइन किया गया है।
कंपनी ने इसके पहले इंसानी नतीजे भी शेयर किए हैं।
तीन glaucoma मरीजों ने इलाज को 56 दिनों तक tolerate किया। दो मरीजों में vision टेस्ट्स में शुरुआती सुधार भी दिखा। ये नतीजे 8 अक्टूबर को जारी किए गए, लेकिन ये फिलहाल एक बहुत छोटी, अनकंट्रोल्ड सेफ्टी ट्रायल तक सीमित हैं।
यह तरीका Bonn के एक्सपेरिमेंट से अलग है, लेकिन दोनों का मकसद age-related cellular processes को रीसेट करना है।
अभी ये कहना मुश्किल है कि ये बदलाव वाकई में इंसानी हेल्थ में long-term सुधार लाते हैं या नहीं।
एजिंग को रिवर्स करने की अरबों $ की रेस
इनवेस्टर्स पहले से ही इस संभावना में जबरदस्त पैसा लगा रहे हैं।
लॉन्जेविटी बायोटेक में 2025 में रिकॉर्ड $18.4 बिलियन का इन्वेस्टमेंट आया, जबकि 2024 में यह $4.7 बिलियन था। 2026 के सितंबर मध्य तक इसमें और $12.1 बिलियन लगा दिए गए थे।
Coinbase के को-फाउंडर Brian Armstrong की NewLimit ने जून में $435 मिलियन जुटाए, जिसमें Eli Lilly Ventures भी शामिल है। इसका प्लान 2027 में बुजुर्ग लीवर सेल्स पर टार्गेट करने वाली थैरेपी का ह्यूमन ट्रायल शुरू करने का है।
Sam Altman-समर्थित Retro Biosciences मई में $1.8 बिलियन वैल्यूएशन पर पहुंच गई थी और ये पहले से ही एक एक्सपेरिमेंटल अल्जाइमर की गोली की टेस्टिंग कर रही है।
Altos Labs ने सेलुलर रीजुवनेशन के लिए $3 बिलियन जुटाए हैं, जबकि क्रिप्टो फंडेड VitaDAO अब तक 30 से ज्यादा लॉन्जेविटी प्रोजेक्ट्स को सपोर्ट कर चुकी है।
ये कंपनियां उम्र संबंधी बीमारियों के लिए अलग-अलग तरीके अपना रही हैं। सभी को यह दिखाने की चुनौती है कि उनके ट्रीटमेंट्स लोगों के लिए सुरक्षित और असरदार हैं।
Bonn एक्सपेरिमेंट शोधकर्ताओं को इस सवाल की जांच का नया तरीका देता है। इसके मॉलीक्युलर क्लॉक्स पहले ही छह दशक पीछे जा चुके हैं।
दवा क्या इन लैब के नतीजों को लंबा और स्वस्थ जीवन देने में बदल पाएगी, यही असली परीक्षा है।











