Standard Chartered की डिजिटल एसेट्स टीम ने अनुमान लगाया है कि 2028 के अंत तक $4 ट्रिलियन की टोकनाइज्ड एसेट्स ऑन-चेन होंगी। इसमें स्टेबलकॉइन और real world assets (RWA) दोनों का बराबर हिस्सा रहेगा। इस प्रेडिक्शन में DeFi को उस पूंजी के लिए नेचुरल बैक-एंड के रूप में बताया गया है।
यह रिपोर्ट बैंक के ग्लोबल हेड ऑफ डिजिटल एसेट्स रिसर्च Geoff Kendrick द्वारा आई है। उनका कहना है कि कंपोज़ेबिलिटी लीडिंग प्रोटोकॉल्स को ऐसा स्ट्रक्चरल एडवांटेज देती है, जिसे ट्रेडिशनल फाइनेंस कॉपी नहीं कर सकता।
Standard Chartered कंपोज़ेबिलिटी को मल्टीप्लायर के रूप में कर रहा है पेश
Kendrick के अनुसार, कंपोज़ेबिलिटी वो प्रॉपर्टी है, जिसके जरिए एक ही ऑन-चेन पोज़िशन यील्ड कमा सकती है। यही पोजिशन एक ही समय में कोलेटरल की तरह भी काम कर सकती है और ट्रेडेबल भी रह सकती है।
ऑफ-चेन, इसी एक्सपोजर के लिए अलग इंटरमीडियरीज़ और लीगल एग्रीमेंट्स की ज़रूरत होती है। Geoffrey Kendrick ने BlackRock के BUIDL फंड का उदाहरण दिया, जिसमें लगभग $2.7 बिलियन की एसेट्स हैं।
यह टोकनाइज्ड ट्रेजरी प्रोडक्ट लगभग 4% यील्ड देता है और स्टेबलकॉइन्स को सपोर्ट करता है। साथ ही, यह Aave जैसे लेंडिंग मार्केट्स में कोलेटरल के रूप में भी सर्व करता है।
“टोकनाइज्ड एसेट्स 2028 के अंत तक $4 ट्रिलियन तक पहुंच जाएंगी (आधा स्टेबलकॉइन्स और आधा RWA में)। ऑन-चेन एसेट्स में इतनी तेज़ बढ़ोतरी के लिए DeFi प्रोटोकॉल्स में हाई थ्रूपुट की जरूरत होगी। मजबूत रिस्क मैट्रिक्स और गवर्नेंस वाले एवेल्ड DeFi प्रोटोकॉल्स को सबसे ज्यादा फायदा होगा। इन DeFi प्रोटोकॉल्स के एसेट प्राइसेस को इसका सीधा फायदा मिलेगा,” Kendrick ने कहा।
TradFi में, ऐसे मल्टी-यूज प्रोफाइल के लिए पूंजी को अलग-अलग इंटरमीडियरीज़ और साइलोड सिस्टम्स में डिवाइड करना पड़ता है।
Standard Chartered का मानना है कि यह स्ट्रक्चरिंग कैपिटल की इफेक्टिव कॉस्ट को काफी कम कर देती है।
थ्रूपुट के लिए तीन मुख्य चैनल
बैंक ने प्रोटोकॉल रिवेन्यू के लिए तीन मेन फैक्टर्स बताए हैं, जो एक-दूसरे को कंम्पाउंड करते हैं:
- ज्यादा एसेट्स ऑन-चेन मूव होती हैं
- इनमें से ज्यादा हिस्सा DeFi में डिपॉजिट होता है
- फिर उस डिपॉजिट का भी बड़ा हिस्सा बोर्रो किया जाता है
Circle का USD Coin (USDC) इसका बेहतरीन उदाहरण है। इसकी मार्केट कैप और DeFi प्लेटफॉर्म्स में लेंड किए गए शेयर दोनों एक साथ बढ़ रहे हैं।
जिन प्रोटोकॉल्स में रिस्क मैट्रिक्स कंजरवेटिव हैं और गवर्नेंस प्रोफेशनल है, वे सबसे ज्यादा इनफ्लो को आकर्षित करेंगे।
Catalyst Watch
Kendrick का कहना है कि CLARITY Act अगला बड़ा ट्रिगर है जो इंस्टीट्यूशनल माइग्रेशन को लेंडिंग रेल्स की तरफ ले जा सकता है। Polymarket के ट्रेडर्स अभी इस बिल के 2026 में पास होने की संभावना लगभग 64% मानते हैं।
Standard Chartered का अनुमान है कि आज ऑन-चेन के मुकाबले ऑफ-चेन लगभग 1,000 गुना ज्यादा वैल्यू है।
जिन प्रोटोकॉल्स के पास मजबूत और टेस्टेड रिस्क फ्रेमवर्क हैं, उन्हें सबसे ज्यादा फायदा होगा। वहीं, नए या कम ऑडिटेड प्लेटफॉर्म्स इंस्टीट्यूशनल स्केल पर शार्प ड्रॉडाउन रिस्क ले सकते हैं।
अब देखना यह है कि क्या बड़े इंस्टीट्यूशनल ट्रेजरर बड़े स्तर पर अपने टोकनाइज्ड फंड्स ओपन लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स में पार्क करना शुरू करते हैं।
अगर इस दिशा में वॉल्यूम आता है तो Kendrick का फ्रेमवर्क कन्फर्म हो जाएगा। इससे DeFi की भूमिका ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से इंस्टीट्यूशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर की ओर बदल जाएगी।









