Venezuela के कई बिजनेस एलाइट्स को यह चिंता है कि अगर bolivar की जगह US dollar ले लेता है, तो Venezuela अपनी घरेलू करंसी को $ के मुकाबले डेवल्यू करने की क्षमता खो देगा। उनका मानना है कि यह अयोग्यता Venezuela को अनकम्पेटिटिव बना देगी।
एलाइट्स की यह चिंता निराधार है। लेकिन बहुत सारे लोग अब भी मानते हैं कि कोई भी देश अपनी करंसी को डेवल्यू करके तरक्की कर सकता है, क्योंकि डीवैल्यूएशन का यह झूठ कुछ खास एलाइट सर्कल्स में बार-बार सुनाई देता है।
असल में, सिर्फ बार-बार कहने से कोई बात सही नहीं हो जाती, बल्कि उसके लिए ठोस तर्क और सबूत चाहिए।
सच्चाई यह है कि घरेलू करंसी की डीवैल्यूएशन से कॉम्पिटिटिवनेस और समृद्धि आती है, ये सोच सुनने में चाहे सही लगे, लेकिन यह मात्र एक गलतफहमी है।
Venezuela ने अपनी करंसी को 99.9% डीवैल्यू कर दिया। समृद्धि कहाँ है?
अगर डीवैल्यूएशन से तरक्की आती, तो Venezuela आज सबसे समृद्ध देशों में होता।
2007 से अब तक bolivar में मैक्सी-डीवैल्यूएशन हुआ है, और इसने लगभग अपनी सारी वैल्यू ($ के मुकाबले 99.9999%) खो दी है।
इसी दौरान, Venezuela की इकॉनमी बुरी तरह गिर गई और GDP per capita इंडेक्स 100 से घटकर 37.22 हो गया। यह समृद्धि नहीं, बल्कि गरीबी है।
आखिर कैसे इतना कमाने वाले बिजनेस एलाइट्स बार-बार करंसी डीवैल्यूएशन की ये गलती दोहरा लेते हैं?
ऐसा इसलिए है क्योंकि उनमें से कई वही करते हैं, जिसे दिवंगत David Henderson (OECD के चीफ इकोनॉमिस्ट) ने Do-It-Yourself-Economics (DIYE) कहा था।
DIYE यानी आलसी लोगों की सोच, जिसमें अधूरी थ्योरी और बिना तर्क की बातें आसानी से फैलाई और बार-बार दोहराई जाती हैं।
ऐसी गलतफहमियों का आर्थिक थ्योरी या असली आंकड़ों से कोई लेना-देना नहीं है।
Ecuador की डॉलराइजेशन ने डीवैल्यूएशन के मिथक को तोड़ दिया
करंसी डीवैल्यूएशन पर हुआ सीरियस रिसर्च साफ दिखाता है कि करंसी डीवैल्यूएशन का मिथक बस एक भ्रम है।
भले ही डीवैल्यूएशन और एक्सपोर्ट्स के बीच रिश्ता हो, लेकिन यह रिश्ता पॉजिटिव नहीं, नेगेटिव है, जैसा कि DIYE अपनाने वाले बिजनेसमैन और वुमन बार-बार कहते हैं। Ecuador से मिले सबूत भी वही दिखाते हैं, जो सीरियस इकोनॉमिक रिसर्च में पाया गया है।
1998 से जनवरी 2000 के पहले हफ्ते तक Ecuadorian sucre ने US $ के मुकाबले अपनी 75.6% वैल्यू खो दी थी और देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह गिर गई थी। इसके बाद, President Jamil Mahuad ने 9 जनवरी को घोषणा की कि Ecuador अब sucre को बंद कर म्यूज़ियम में रखेगा और उसकी जगह US $ को अपनाएगा।
डॉलर एडॉप्शन के बाद से, Ecuador की एक्सपोर्ट ग्रोथ उसकी जीडीपी (GDP) से भी तेज़ रही है।
जो देश पहले एक mini-petrostate था, वह अब एक्सपोर्ट-लैड इकोनॉमी बन गया है – नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट्स सालाना 7.1% की ग्रोथ रेट से बढ़ रही हैं, जोकि उसकी जीडीपी (4.3%/yr) की रेट से करीब दोगुनी है।
Ecuador के नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट्स में प्रॉन्स (prawns) की इंडस्ट्री को खासतौर पर नोट करना जरूरी है, जो डॉलर एडॉप्शन (dollarization) के बाद इंटरनेशनल कंपटीशन को हटा चुकी है। डॉलर एडॉप्शन के बाद, Ecuador की प्रॉन इंडस्ट्री ने पूरी दुनिया में अपना दबदबा बना लिया है।
अब यह इंडस्ट्री Ecuador की कुल आबादी के 1.6% लोगों को जॉब देती है और देश की जीडीपी में 6% योगदान करती है, जो जर्मनी के ऑटोमोबाइल सेक्टर से ज्यादा है। जैसा कहा जाता है, आंकड़े हजार शब्दों से ज्यादा बोलते हैं।
अब वक्त आ गया है कि करेंसी की वैल्यू घटाने वाले भ्रम को एक तरफ फेंक दिया जाए, जहां उसकी जगह है।











