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Changpeng Zhao को WhatsApp यूज़रनेम नहीं मिला, सामने आया एक नया स्कैम रिस्क

  • इस हफ्ते WhatsApp के नए रोलआउट में CZ अपना पसंदीदा username रिजर्व नहीं कर पाए
  • WhatsApp में अब phone नंबर की जगह usernames, लेकिन scammers बना सकते हैं मिलते-जुलते handles
  • Telegram के "@crypto" हैंडल को मिला $25 मिलियन का ऑफर, WhatsApp पर भी जागी ऐसी उम्मीदें

Changpeng Zhao इस हफ्ते WhatsApp के ग्लोबल रोलआउट के दौरान अपनी पसंदीदा यूज़रनेम रिजर्व करने में असफल रहे। यह घटना दिखाती है कि जैसे ही ऐप फोन नंबर को मेन आइडेंटिफायर के तौर पर हटाता है, स्कैमर्स कितनी आसानी से पहचानी जाने वाली नामों का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं।

CZ, जो Binance के पूर्व चीफ एग्जीक्यूटिव हैं, क्रिप्टोकरेन्सी की दुनिया के सबसे पहचानने योग्य पब्लिक फिगर्स में गिने जाते हैं। उनकी ये नाकाम कोशिश WhatsApp के नए सिस्टम के तहत सामने आ रहे बड़े जोखिम को उजागर करती है।

WhatsApp के यूज़रनेम फीचर ने बढ़ाई स्कैमिंग की चेतावनी

WhatsApp ने इस हफ्ते यूज़र्स को कस्टम यूज़रनेम रिजर्व करने की सुविधा दी है, जिससे अब फोन नंबर की जगह यूज़रनेम से कनेक्ट किया जा सकेगा।

WhatsApp ने कहा कि क्रिएटर्स, छोटे बिजनेस और ऑर्गनिजेशन्स अब अपने मौजूदा Instagram या Facebook यूज़रनेम को ऐप पर क्लेम कर सकते हैं। एक ऑप्शनल यूज़रनेम की key भी है जो सुरक्षा बढ़ाती है, लेकिन WhatsApp का फर्स्ट-कम फर्स्ट-सर्व्ड रोलआउट का मतलब है कि जो हैंडल क्लेम नहीं किए गए, वे पहले रजिस्टर करने वाले को मिल जाएंगे।

WhatsApp नए कॉन्टैक्ट्स पर रेट-लिमिट लगाने और यूज़रनेम की key को बार-बार गेस करने की कोशिशें ब्लॉक करने की भी प्लानिंग कर रहा है। ये उपाय Telegram पर सामने आई उन्हीं दुरुपयोग पैटर्न्स को टार्गेट कर रहे हैं, जिन्हें काबू करने में Telegram को मुश्किल हुई थी।

स्कैमर्स देखने में एक जैसे लगने वाले अक्षरों का भी गलत फायदा उठा सकते हैं, जैसे कैपिटल I की जगह लोअरकेस l का इस्तेमाल। ऐसे ट्रिक्स को पकड़ना लगभग नामुमकिन है जब तक हैंडल्स को बगल-बगल न देखा जाए।

WhatsApp यूज़र प्रीमियम यूज़रनेम के लिए कर रहे हैं होड़, भविष्य में मुनाफे की उम्मीद

हर दिन बढ़ती संख्या में यूज़र्स WhatsApp पर डिमांड में रहने वाले यूज़रनेम जल्दी रिजर्व करने की कोशिश कर रहे हैं। यह ट्रेंड करीब-करीब वही है जो पहले Telegram पर देखा गया, जहां शुरुआती एडॉप्टर्स ने हाई-प्रोफाइल हैंडल्स के लिए सात-आंकड़ा रकम पाई थी।

Telegram के फाउंडर Pavel Durov ने जुलाई 2025 में बताया था कि एक शुरुआती “@crypto” हैंडल पर $25 मिलियन की ऑफर आई थी। 2025 के डाटा के मुताबिक “@news” $5.8 मिलियन में बिका। अब कुछ यूज़र्स उम्मीद कर रहे हैं कि WhatsApp पर फेमस ब्रांड्स, सेलिब्रिटीज़, और क्रिप्टोकरेन्सी टर्म्स के नाम पहले से रिजर्व करने पर भी वैसी ही वैल्यू मिल सकती है।

WhatsApp यूज़रनेम ऐप में डायरेक्ट फ्री में रिजर्व किए जा सकते हैं। Meta ने अभी तक इनके लिए कोई मार्केटप्लेस नहीं बनाया है जहां इन्हें खरीदा या बेचा जा सके। Telegram के टोकनाइज्ड Fragment प्लेटफॉर्म के उलट, यह गैप, इनके रीसेल वैल्यू को लिमिट कर सकता है।

यूज़र्स अपनी सुरक्षा के लिए क्या कर सकते हैं?

CZ का अनुभव यह दिखाता है कि जैसे-जैसे इंपर्सोनेशन स्कैम बदल रहे हैं, रिस्क भी बढ़ रहे हैं। हाल ही में एक इंपर्सोनेशन-बेस्ड स्टेकिंग स्कैम के बाद क्रिमिनल सजा भी हुई है, जिससे यह साफ है कि रेग्युलेटर्स अब इन मामलों पर ध्यान दे रहे हैं।

सिक्योरिटी रिसर्चर्स सलाह देते हैं कि WhatsApp की ऑप्शनल यूज़रनेम key मैन्युअली इनेबल करें, क्योंकि Meta इसे डिफ़ॉल्ट रूप से बंद रखता है। इसके बिना, अगर किसी को यूज़रनेम पता चल गया, तो वह पहली ही कोशिश में उस शख्स को मैसेज भेज सकता है।

की को एक्टिवेट करने के लिए चार अंकों का कोड डालना जरूरी है, तभी कोई अनजान व्यक्ति आप तक पहुंच पाएगा। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि यूज़रनेम बुक करने के बाद भी, मिलते-जुलते अक्षरों पर नजर जरूर रखें, क्योंकि सिर्फ यूज़रनेम रिजर्व करने से ऑथेंटिसिटी की पुष्टि नहीं होती।

सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि किसी पॉपुलर कॉन्टैक्ट से आई किसी भी मैसेज पर भरोसा करने से पहले उसके ऑफिसियल, वेरिफाइड अकाउंट से कन्फर्म कर लें।

WhatsApp यूजर्स के लिए आगे क्या?

क्रिप्टो यूजर्स के लिए 2024 में धोखाधड़ी का रिस्क पहले ही बढ़ चुका है। जून के हैक में हुए नुकसान बताते हैं कि हमलावर अब भी प्लेटफॉर्म्स और लोगों दोनों को टारगेट कर रहे हैं। ये इम्पर्सनेशन रिस्क इंडस्ट्री में चल रही बड़ी बहस को भी दिखाता है, जिसमें लंबे समय से चल रही quantum risk डिबेट जैसे डिजिटल ट्रस्ट से जुड़े नए खतरों पर फोकस किया गया है।

WhatsApp का नया यूज़रनेम फीचर अभी सभी के लिए कुछ हफ्ते दूर है, जिससे Meta के पास सुरक्षा उपाय जोड़ने का थोड़ा और वक्त है। सवाल बस ये है कि क्या ये सिक्योरिटी फीचर्स इतने जल्दी लागू हो पाएंगे, जितनी जल्दी स्कैमर्स नए तरीकों को अपना लेते हैं—ये WhatsApp के तीन अरब यूजर्स के लिए बड़ा प्वाइंट है।


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