Goldman Sachs के इकोनॉमिस्ट्स की नई रिसर्च के मुताबिक, AI ने पिछले एक साल में US की मासिक पेरोल ग्रोथ को लगभग 16,000 जॉब्स से कम कर दिया है, जिससे बेरोजगारी दर में 0.1 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है।
इस एनालिसिस में उन नौकरियों को अलग किया गया है, जिन्हें AI से रिप्लेस किए जाने का रिस्क है और उन जॉब्स को, जहां यह टेक्नोलॉजी इंसानों के काम को सपोर्ट कर रही है। यह फर्क दिखाता है कि लेबर मार्केट हेडलाइन आंकड़ों से कहीं ज्यादा असमान है।
AI किन जॉब्स को रिप्लेस कर रहा है
Goldman Sachs की इकोनॉमिस्ट Elsie Peng की स्टडी ने एक डिस्प्लेसमेंट स्कोर को IMF के कॉम्प्लिमेंटेरिटी इंडेक्स के साथ मिलाकर एनालिसिस किया। इसका नतीजा उन रोल्स को हाइलाइट करता है, जहां AI वर्कर्स को रिप्लेस कर देता है, न कि सिर्फ उनके रोल्स के साथ ओवरलैप करता है।
Peng के अनुसार, टेलीफोन ऑपरेटर्स, इंश्योरेंस क्लेम्स क्लर्क्स और बिल कलेक्टर्स सबसे ज्यादा रिप्लेसमेंट रिस्क फेस कर रहे हैं। इन्हीं के बाद कस्टमर सर्विस रिप्रेजेंटेटिव्स और डाटा एंट्री स्टाफ का नंबर आता है। इन जॉब्स में ऑपरेटिंग कॉस्ट्स और एक्सपोज़्ड कंपनियों में जॉब पोस्टिंग्स पहले ही कम हो चुकी हैं।
हालांकि, ये नुकसान सभी पर बराबर नहीं है। रिसर्च बताती है कि जॉब्स में गिरावट का असर ज्यादातर युवाओं और कम अनुभव वाले वर्कर्स पर पड़ता है। ये लोग AI सिस्टम्स के साथ सीधे कॉम्पिटीशन में रहते हैं, खासकर उन टास्क्स में जो पहले वाइट-कालर जॉब्स में एंट्री-लेवल के ऑप्शन्स थे। इसी वजह से प्रोफेशनल सर्विसेज में एंट्री-लेवल हायरिंग में भी पिछले एक साल में तेज गिरावट आई है।
AI कहां नए जॉब्स बना रहा है
फिर भी, हर एक्सपोज़्ड जॉब घट नहीं रही है। सिर्फ उन जॉब्स को देखें, जिनमें AI के साथ काम बढ़ने की संभावना ज्यादा है, तो Goldman Sachs का अनुमान है कि AI ने हर महीने करीब 9,000 नई जॉब्स जोड़ी हैं। इससे बेरोजगारी दर में थोड़ी कमी भी आई है।
एजुकेशन वर्कर्स, जजेस और कंस्ट्रक्शन मैनेजर्स इस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं। इन रोल्स में फिजिकल प्रेजेंस, जजमेंट या इंटरपर्सनल स्किल्स की जरूरत होती है, जिन्हें AI पूरी तरह से नहीं दोहरा सकता। Peng द्वारा बताई गई स्टडीज के अनुसार, इन सेक्टर्स में कंपनियों की प्रोडक्टिविटी ज्यादा बढ़ी है और जॉब ओपनिंग्स भी ज्यादा दिखी हैं।
Peng जेवन्स पैरेडॉक्स के जरिए इस पैटर्न को समझाते हैं, जिसमें 19वीं सदी में देखा गया कि एफिशियंसी बढ़ने पर कुल डिमांड भी बढ़ जाती है। जब AI आउटपुट प्रति यूनिट की लागत घटा देता है, तो खरीदार ज्यादा मात्रा में खरीदना चाहते हैं। इससे एक्सपोज़ड सेक्टर्स में दोबारा ज्यादा वर्कर्स की जरूरत पड़ती है।
हालांकि, कुल आंकड़ा AI द्वारा नौकरियों के निर्माण में असली भूमिका को कम कर सकता है। डेटा सेंटर के कंस्ट्रक्शन से जुड़ी हायरिंग और AI एडॉप्शन से होने वाले वाइडर प्रोडक्टिविटी गेंस Goldman के मौजूदा अनुमान में कवर नहीं होती।
इसलिए, जैसे-जैसे 2026 तक कॉरपोरेट AI खर्च बढ़ता है, US रोजगार पर इसका असली नेट इफेक्ट अब भी खुला सवाल बना हुआ है। अगली मासिक जॉब्स रिपोर्ट से शायद नई जानकारी मिलेगी कि सब्स्टीट्यूशन ट्रेंड तेज हो रहा है या नहीं।





