CertiK की Skynet State of Digital Asset Regulations Report (मंगलवार को प्रकाशित) के अनुसार, डिजिटल एसेट फर्म्स के लिए सबसे बड़ा रेग्युलेटरी रिस्क अब सिक्योरिटी क्लासिफिकेशन नहीं बल्कि एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) एनफोर्समेंट बन गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 की पहली छमाही में AML से जुड़ी फाइन्स $900 मिलियन से ज्यादा रहीं, जबकि US SEC द्वारा क्रिप्टो पर जुर्माने साल-दर-साल 97% गिर गए हैं, क्योंकि अब US DOJ और FinCEN ने एजेंडा अपने हाथ में ले लिया है।
एनफोर्समेंट का फोकस क्लासिफिकेशन से AML प्रेशर की ओर शिफ्ट
दो बड़े सेटलमेंट्स ने इस ट्रेंड को मजबूत किया है। OKX ने फरवरी 2025 में U.S. अथॉरिटीज को $504 मिलियन का भुगतान किया, क्योंकि उस पर बिना लाइसेंस के मनी ट्रांसमिटिंग बिजनेस चलाने का आरोप था। प्रॉसीक्यूटरों ने $5 बिलियन से ज्यादा की संदिग्ध ट्रांजेक्शन्स का हवाला दिया।
जनवरी में KuCoin ने $297 मिलियन के सेटलमेंट पर सहमति दी थी, जिसमें बैंक सीक्रेसी एक्ट से जुड़ी गलती शामिल थी। इसके को-फाउंडर्स ने पद छोड़ा और exchange ने कम-से-कम दो साल के लिए U.S. मार्केट छोड़ दी।
यूरोपियन रेग्युलेटर्स ने भी इसी तरह का दबाव डाला है। इसी अवधि में यूरोपियन मार्केट में AML से जुड़ी फाइन्स 767% बढ़ गईं, जबकि SEC द्वारा डिजिटल-एसेट फर्म्स पर मौद्रिक जमानत लगभग $142 मिलियन तक गिर गईं।
जैसे-जैसे फ्रेमवर्क mature हो रहा है, compliance cost भी बढ़ रही है
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 वह साल है जब रेग्युलेटर्स ने यह बहस छोड़ दी है कि कौन-से टोकन सिक्योरिटीज है। अब Hong Kong, United Arab Emirates, European Union, और New York में लाइसेंसिंग के लिए स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट ऑडिट जरूरी हो गए हैं।
Stablecoin की निगरानी में भी ऐसा ही बदलाव आया है। अब पॉलिसी में रिजर्व मैनेजमेंट, रिडेम्प्शन मैकेनिज्म और क्रॉस-बॉर्डर सेटलमेंट सबसे अहम हो गए हैं।
Basel Committee का framework, 1 जनवरी 2026 से लागू होगा, इस डिवाइड को औपचारिक बनाता है।
टोकनाइज्ड ट्रेडिशनल एसेट्स और क्वालिफाइंग stablecoins को फेवरीबल ट्रीटमेंट मिलेगा।
वहीं, बिना किसी बैकिंग वाले क्रिप्टो, जैसे Bitcoin (BTC) और ether (ETH) पर ज्यादा कैपिटल चार्ज लगेगा।
एक्सचेंज, कस्टोडियंस और इश्युअर्स के लिए रिपोर्ट में मुख्य संदेश यह है कि अब ट्रांजेक्शन मॉनिटरिंग, सैंक्शन्स स्क्रीनिंग और लाइसेंसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को क्लासिफिकेशन की बहस से ज्यादा महत्व दिया जा रहा है।
आगे यह देखने वाली बात होगी कि छोटी exchanges भी बड़ी फर्म्स के बराबर compliance का बोझ उठा पाएंगी या नहीं। इसी के आधार पर कंसोलिडेशन का अगला फेज तय होगा।





